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मुंबई के मुहर्रम जुलूस में जहरीला कैप्सूल बांटने वाला आरोपी प्रेमजी अपने समुदाय से करता है नफरत

मुंबई के मुहर्रम जुलूस में जहरीला कैप्सूल बांटने वाला आरोपी प्रेमजी अपने समुदाय से करता है नफरत
मुंबई के मुहर्रम जुलूस में जहरीला कैप्सूल बांटने वाला आरोपी प्रेमजी अपने समुदाय से करता है नफरत

मुंबई, 30 जून (आईएएनएस)। मुंबई में मुहर्रम के जुलूस के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को जहरीला कैप्सूल बांटने की साजिश की जांच में नई बातें सामने आई हैं। आरोपी फैयाज प्रेमजी ने पुलिस को बताया कि उसका मकसद किसी की जान लेना नहीं बल्कि मुहर्रम के जुलूस के दौरान परेशानी पैदा करना था।

आरोपी फैयाज प्रेमजी ने पुलिस को बताया कि उसका मकसद किसी की जान लेना नहीं था, बस लोगों को परेशान करना था। आरोपी ने घटना के पहले इसका प्रैक्टिकल भी किया था कि कितना ग्राम गोली देने से मौत होती है। इसलिए आरोपी ने 1 ग्राम की पैकेट खुद तैयार किया था, ताकि इस जहरीली गोली खाने से किसी की मौत न हो।.

आरोपी फैयाज़ निसार हुसैन प्रेमजी (39) के बारे में परेशान करने वाली बातें सामने आई हैं, जिनमें पारिवारिक जीवन में उथल-पुथल, समाज से बहिष्कृत होना और मानसिक स्वास्थ्य का बिगड़ना शामिल है।

पुलिस के मुताबिक, फैयाज प्रेमजी मुहर्रम जुलूस से करीब दो सप्ताह पहले नजदीकी एक सस्ते होटल में रुका था, वहां रहने के दौरान उसने कथित तौर पर एक ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म के जरिए 30,000 खाली कैप्सूल और लगभग 50 किलोग्राम जिंक फास्फाइड मंगवाया। जिंक फास्फाइड एक बहुत जहरीला रसायन है, जिसका इस्तेमाल आमतौर पर चूहों को मारने के लिए किया जाता है। आरोपी ने कई दिनों तक एक होटल के कमरे में ही ये कैप्सूल तैयार किए।

मुंबई पुलिस ने जांच में पाया है कि प्रेमजी का वैवाहिक और पारिवारिक जीवन बिखर गया था, जिससे वह भावनात्मक रूप से परेशान हो गया था और अपने ही समुदाय के लोगों के प्रति उसके मन में नाराजगी थी।

आरोपी को अपने धर्म के खिलाफ गुस्सा था, उसने कुछ साल पहले मुस्लिम धर्म के प्रथाओं और परंपराओं का विरोध करते हुए पर्चे बाटा था, इसके बाद धार्मिक गुरुओं ने कथित तौर पर उसके परिवार को समुदाय से बहिष्कृत कर दिया थाय़

सामाजिक रूप से अलग-थलग पड़ने के बाद प्रेमजी अपनी मां, बड़े भाई मोहम्मद अब्बास और अपनी दो छोटी बहनों, सकीना और रुबीना के साथ पुणे चला गया। बताया जाता है कि वह कभी-कभी मुंबई आता था और डॉर्मिटरी में रहता था। प्रेमजी ने बैचलर ऑफ बिज़नेस एडमिनिस्ट्रेशन (बीबीए) किया है और शादीशुदा था, लेकिन पत्नी ने चार साल पहले उसे छोड़ दिया था।

जांचकर्ताओं का मानना ​​है कि परिवार में तनावपूर्ण रिश्तों और भाई व रिश्तेदारों द्वारा नजरअंदाज किए जाने की भावना ने उसे गंभीर मानसिक स्थिति बिगाड़ दी। पुलिस ने बताया कि वह कई तरह की दवाएं और गोलियां भी ले रहा था।

2019 में प्रेमजी अपनी मां, भाई और बहनों के साथ ईरान चला गया, जहा उसने फ़ास्ट फूड का बिजनेस शुरू किया और 2025 में वह पुणे लौट आया। आरोपी के बयान के अनुसार उसके दादाजी ने भी शिया समुदाय की कठोर प्रथाओं के खिलाफ अभियान चलाया था, जिसका असर शायद उसके नजरिए पर पड़ा होगा।

पुलिस ने बताया कि 2025 में पुणे लौटने के बाद प्रेमजी मुहर्रम के कार्यक्रमों का इंतजार कर रहा था और उसने कथित तौर पर हमले की योजना बहुत पहले ही बना ली थी। ऑनलाइन तरीके से कैप्सूल बनाना सीखा और कथित तौर पर यूट्यूब पर वीडियो देखकर घर पर ही लगभग 30,000 कैप्सूल बनाए।

पुलिस के अनुसार, प्रेमजी का मानना ​​था कि उसकी निजी परेशानियों, जैसे कि उसकी टूटी हुई शादी और परिवार में अस्थिरता के लिए उसका अपना समुदाय ही ज़िम्मेदार था। उसने कथित तौर पर बदला लेने के लिए इस्लाम के एक खास पंथ के लोगों को निशाना बनाने का फैसला किया।

बता दें कि मुंबई के भायखला और डोंगरी इलाकों में मुहर्रम का जुलूस निकल रहा था, तभी प्रेमजी को जुलूस में शामिल लोगों के बीच बैग में रखे कैप्सूल बांटते हुए देखा गया। सुरक्षा के लिए तैनात पुलिसकर्मियों ने उससे कैप्सूल के बारे में पूछा, तो उसने जवाब दिया कि वे दर्द निवारक (पेनकिलर) हैं, जिनका मकसद जुलूस के दौरान लगी चोटों से होने वाली तकलीफ को कम करना था।

हालांकि, जल्द ही सलमान सैयद समेत दो लोगों ने बेचैनी और उल्टी की शिकायत की। पुलिस को बताया गया कि दोनों ने प्रेमजी द्वारा बांटे गए कैप्सूल खाए थे।

पुलिस ने प्रेमजी को डोंगरी के एक होटल से हिरासत में ले लिया। तलाशी के दौरान 14,900 कैप्सूल मिले, जिनमें चूहे मारने वाली दवा का पाउडर भरा हुआ था। जांचकर्ताओं को यह भी पता चला कि उसने 50 किलोग्राम जिंक फॉस्फाइड और लगभग 30,000 खाली कैप्सूल खरीदे थे।

पुलिस ने बताया कि प्रेमजी अभी हिरासत में है और उससे कड़ी पूछताछ की जा रही है। जांचकर्ता इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या उसकी मानसिक स्थिति और निजी शिकायतों ने इस कथित साजिश में कोई अहम भूमिका निभाई है।

जांचकर्ताओं का कहना है कि अपने समुदाय के प्रति नाराज़गी के बावजूद, प्रेमजी कट्टरपंथी या किसी चरमपंथी संगठन से जुड़ा हुआ नहीं लगता है। हालांकि उसने इराक और ईरान की काफी यात्राएं की थीं, इसलिए अधिकारी सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रहे हैं। उसके हालिया इंटरनेट इस्तेमाल, बातचीत और ऑनलाइन सर्च का पता लगाने के लिए उसके मोबाइल फोन को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।

--आईएएनएस

ओपी/पीएम

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