हरियाणा: सिरसा में लगेगा किन्नू जूस प्लांट, पीपीपी मॉडल से किसानों की आय बढ़ाने पर जोर
चंडीगढ़, 6 अप्रैल (आईएएनएस)। हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने सोमवार को अवसंरचना संबंधी सचिवों की समिति की बैठक की अध्यक्षता की। इसमें सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत सिरसा में किन्नू जूस प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित करने पर विचार किया गया।
इस बैठक में राज्य की फलों की अर्थव्यवस्था को बदलने और किन्नू किसानों की आय बढ़ाने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर दिया गया।
राज्य के बजट में घोषित यह प्रस्तावित अत्याधुनिक प्लांट, सिरसा में वीटा मिल्क प्लांट परिसर में 26.39 करोड़ रुपए की लागत से लगाया जाएगा।
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि यह प्रोजेक्ट, जिसे पीपीपी मोड के तहत 33 साल की रियायत अवधि के साथ विकसित किया जाएगा, सभी हितधारकों को लाभ पहुंचाने के लिए डिजाइन किया गया है।
हरियाणा डेयरी जूस प्लांट लगाने के लिए लगभग तीन एकड़ जमीन उपलब्ध कराएगी, जबकि निजी भागीदार जरूरी प्लांट और मशीनरी के साथ-साथ सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर भी लगाएगा और प्लांट का संचालन करेगा।
यह तय किया गया कि यह प्रोजेक्ट मुख्य रूप से फल और सब्जी प्रोसेसिंग उद्योग स्थापित करने पर केंद्रित होगा, जिसमें मुख्य जोर किन्नू जूस प्रोसेसिंग पर होगा, और जरूरत पड़ने पर वायबिलिटी गैप फंडिंग सहायता भी दी जाएगी।
एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि शुरुआती तौर पर, यह संगठन एक फल और सब्जी प्रोसेसिंग उद्योग स्थापित करेगा और, यदि जरूरत पड़ी, तो बाद के चरण में कृषि-आधारित प्रोसेसिंग उद्योग की संभावनाओं का भी पता लगाया जा सकता है।
हरियाणा डेयरी डेवलपमेंट कोऑपरेटिव फेडरेशन के प्रबंध निदेशक रोहित यादव ने कहा कि राज्य सालाना लगभग 4.40 लाख मीट्रिक टन किन्नू का उत्पादन करता है, जिसमें अकेले सिरसा का योगदान कुल उत्पादन का लगभग 55 प्रतिशत है। यह नई सुविधा हर साल लगभग 9,000 मीट्रिक टन किन्नू और 12,600 मीट्रिक टन अन्य फलों को प्रोसेस करेगी, जिससे प्रीमियम पैकेटबंद जूस तैयार होगा।
खास बात यह है कि किन्नू उत्पादन का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा मुख्य रूप से बी-ग्रेड फल, जिनकी पहले कम कीमत मिलती थी अब वैल्यू-एडेड प्रोसेसिंग के लिए इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे किसानों की आय में सीधे तौर पर बढ़ोतरी होगी।
इस पहल की एक मुख्य विशेषता इसका किसान-केंद्रित दृष्टिकोण है, जिसके तहत कच्चे माल की खरीद हरियाणा के किसानों से ही की जाएगी।
मुख्य सचिव रस्तोगी ने इस बात पर जोर दिया कि यह प्रोजेक्ट सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर, सहकारी संस्थाओं और निजी उद्यम के बीच तालमेल का एक बेहतरीन उदाहरण है, जिसका मकसद ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी आय के अवसर पैदा करना है।
--आईएएनएस
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