Samachar Nama
×

हरियाणा सरकार धान और बाजरा की खरीद में तेजी लाने में विफल रही: भूपिंदर हुड्डा

हरियाणा सरकार धान और बाजरा की खरीद में तेजी लाने में विफल रही: भूपिंदर हुड्डा
हरियाणा सरकार धान और बाजरा की खरीद में तेजी लाने में विफल रही: भूपिंदर हुड्डा

चंडीगढ़, 16 अक्टूबर (आईएएनएस)। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर हुड्डा ने शुक्रवार को किसानों की दुर्दशा के लिए राज्य भाजपा को जिम्मेदार ठहराया।

उन्होंने कहा कि बार-बार अनुरोध करने के बावजूद, सरकार न केवल धान और बाजरा की खरीद में तेजी लाने में विफल रही, बल्कि खरीद केंद्रों से खरीदे गए उत्पादों की समय पर ढुलाई सुनिश्चित करने में भी नाकाम रही।

विपक्ष के नेता ने एक बयान में कहा कि सरकार की उदासीनता के कारण दो दिनों की बारिश ने किसानों की महीनों की मेहनत को बर्बाद कर दिया है। राज्य भर की मंडियों में लाखों मीट्रिक टन धान पानी में डूब गया है, जिससे किसानों और कमीशन एजेंटों दोनों को भारी नुकसान हुआ है।

उन्होंने सरकार से 3,100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदने के अपने वादे को पूरा करने की मांग की और सरकार से इन नुकसानों की भरपाई के लिए बोनस देने का आग्रह किया। पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने राज्य भर की कई मंडियों का दौरा किया और किसानों तथा कमीशन एजेंटों से बात की, लेकिन उन्हें सरकार की व्यवस्थाओं से कोई भी संतुष्ट नहीं मिला।

उन्होंने कहा कि हर जगह शिकायत एक ही थी: खरीद प्रक्रिया सुचारू रूप से नहीं चल रही है। किसान कई समस्याओं में फंसे हुए हैं, जिनमें गेट पास, सत्यापन प्रक्रिया, खरीद सीमा, लंबे ट्रैफिक जाम और अत्यधिक प्रतीक्षा समय जैसी समस्याएं शामिल हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों की जानबूझकर अनदेखी इस हद तक पहुंच गई है कि नमी मापने वाली मशीनों में भी छेड़छाड़ पाई गई है। जब एक ही बैच की उपज को तीन अलग-अलग मशीनों से जांचा गया, तो दर्ज की गई नमी का स्तर एक जैसा नहीं था।

हुड्डा ने कहा कि यह सब सरकार की सोची-समझी साजिश का हिस्सा है। उन्होंने बताया कि सरकार जानबूझकर किसानों की उपज को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदने से बचने की कोशिश कर रही है, जिससे किसान अपनी फसलें निजी एजेंसियों को कम दामों पर बेचने के लिए मजबूर हो रहे हैं।

सरकार के इस रवैये के कारण किसान धान को एमएसपी से 400 रुपए प्रति क्विंटल कम और बाजरा को एमएसपी से 800 से 900 रुपये प्रति क्विंटल कम दाम पर बेचने के लिए मजबूर हैं।

--आईएएनएस

एमएस/

Share this story