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हरियाणा का गैंगस्टर हिमांशु भाऊ और उसका सहयोगी अमेरिका की हिरासत में

हरियाणा का गैंगस्टर हिमांशु भाऊ और उसका सहयोगी अमेरिका की हिरासत में
हरियाणा का गैंगस्टर हिमांशु भाऊ और उसका सहयोगी अमेरिका की हिरासत में

वाशिंगटन, 24 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारत के मोस्ट वांटेड भगोड़ों में से एक हरियाणा का गैंगस्टर हिमांशु भाऊ और उसका एक साथी अमेरिका में इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (आईसीई) की हिरासत में हैं। अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की है।

अमेरिकी सरकार के ऑनलाइन बंदी लोकेटर की शुक्रवार रात की जांच में दो भारतीय मूल के लोग, हिमांशु सिगरोहा और नीरज कौशिक, नेवादा के हेंडरसन में 18 ईस्ट बेसिक रोड स्थित हेंडरसन डिटेंशन सेंटर में आईसीई की हिरासत में दिखे। यह सेंटर लास वेगास के बाहर है। उनके मामलों को लास वेगास में आईसीई के एनफोर्समेंट एंड रिमूवल ऑपरेशंस (ईआरओ) कार्यालय द्वारा संभाला जा रहा है।

अधिकारियों के मुताबिक ये दोनों लोग भाऊ और उसका साथी नीरज फरीदपुरिया ही हैं। आईसीई की लिस्टिंग से साफ है कि यह मामला इमिग्रेशन हिरासत का है। दोनों में से किसी के खिलाफ अमेरिका में कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं मिला है और न ही आईसीई या एफबीआई ने गिरफ्तारी को लेकर कोई सार्वजनिक बयान जारी किया है।

भाऊ का असली नाम हिमांशु रिटोलिया है और वह हरियाणा के रोहतक का रहने वाला है। उसके खिलाफ अगस्त 2023 से इंटरपोल का रेड नोटिस जारी है और वह भारत में 18 मामलों में वांटेड है। इन मामलों में हत्या, हत्या की कोशिश, जबरन वसूली, धमकी और जालसाजी शामिल है।

भाऊ को लास वेगास में ट्रैक कर गुरुवार, 22 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया। भारत उसकी निर्वासन प्रक्रिया में तेजी लाने की कोशिश कर रहा है और अधिकारियों की एक टीम अमेरिका जा सकती है।

उसका साथी फरीदपुरिया को एंकल मॉनिटर हटाने के बाद पकड़ा गया। उसे इस साल की शुरुआत में हिरासत में लिया गया था और जमानत पर रिहा किया गया था।

भाऊ गैंग का उत्तर भारत में कई हाई-प्रोफाइल अपराधों से संबंध रहा है। गैंग ने अगस्त 2025 में यूट्यूबर एल्विश यादव के गुरुग्राम स्थित घर के बाहर फायरिंग की जिम्मेदारी ली थी।

इस मामले पर भारतीय जांच एजेंसियों की पैनी नजर रहेगी, जो वांटेड गैंगस्टरों को वापस लाने के लिए अब औपचारिक प्रत्यर्पण के बजाय अमेरिकी इमिग्रेशन प्रक्रिया का सहारा ले रही हैं।

1997 की भारत-अमेरिका प्रत्यर्पण संधि के तहत प्रत्यर्पण में लंबी अदालती प्रक्रिया लगती है, जबकि इमिग्रेशन सिस्टम के जरिए निकाले जाने की प्रक्रिया अक्सर तेज साबित हुई है।

इसका सबसे ताजा उदाहरण अनमोल बिश्नोई का है, जिसे 2024 में अमेरिका में हिरासत में लिया गया था और 19 नवंबर 2025 को भारत निर्वासित किया गया था। नई दिल्ली पहुंचने पर उसे राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने गिरफ्तार कर लिया था।

भाऊ और फरीदपुरिया का भी यही रास्ता होगा या नहीं, यह उनके इमिग्रेशन मामलों के नतीजे पर निर्भर करेगा, जिसमें अमेरिकी इमिग्रेशन जज के सामने शरण या अन्य राहत के लिए उनका कोई दावा भी शामिल है।

हेंडरसन डिटेंशन सेंटर शहर द्वारा संचालित एक सुविधा है जो संघीय एजेंसी के साथ एक समझौते के तहत आसीई के बंदियों को रखती है।

--आईएएनएस

वीकेयू/पीएम

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