Samachar Nama
×

पाकिस्तान में सिखों के गुरुद्वारों की बदहाली, विदेशों में विरासत संरक्षण के दावों पर उठे सवाल

पाकिस्तान में सिखों के गुरुद्वारों की बदहाली, विदेशों में विरासत संरक्षण के दावों पर उठे सवाल
पाकिस्तान में सिखों के गुरुद्वारों की बदहाली, विदेशों में विरासत संरक्षण के दावों पर उठे सवाल

इस्लामाबाद, 1 नवंबर (आईएएनएस)। पाकिस्तान में सिख समुदाय और उसकी धार्मिक विरासत के संरक्षण को लेकर इस्लामाबाद के दावों पर सवाल उठने लगे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के कई ऐतिहासिक गुरुद्वारे लंबे समय से उपेक्षा, जर्जर स्थिति और अतिक्रमण का सामना कर रहे हैं। वहीं, पाकिस्तानी अधिकारी विदेशों में सिख विरासत के संरक्षण, धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने और गुरुद्वारों के जीर्णोद्धार के बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं।

खालसा वॉक्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की ओर से अमेरिका में सिख समुदाय तक पहुंच बनाने की कोशिशों और देश के भीतर सिख धार्मिक स्थलों की वास्तविक स्थिति के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है।

सोशल मीडिया पर सामने आई खबरों के अनुसार, पंजाब के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री और पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष रमेश सिंह अरोड़ा ने हाल ही में अमेरिका में कई गुरुद्वारों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने प्रवासी सिख समुदाय से 'अडॉप्ट ए गुरुद्वारा' पहल के तहत धार्मिक विरासत के संरक्षण में भागीदारी करने की अपील की। साथ ही नवंबर में आयोजित होने वाले गुरुपर्व समारोहों में शामिल होने का न्योता दिया और वीजा प्रक्रिया आसान बनाने का आश्वासन भी दिया। हालांकि, सोशल मीडिया पर साझा की गई कुछ पोस्ट में आरोप लगाया गया कि अमेरिका के गुरुद्वारा प्रबंधन समितियों से नकद राशि और कैशियर चेक भी लिए गए।

रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब के पुरातत्व महानिदेशालय से कथित तौर पर जुड़े अंजुम जावेद ने कैलिफोर्निया के लैथ्रोप में 'द सिख किंगडम' नामक कार्यक्रम में हिस्सा लिया। उन्होंने ननकाना साहिब से खैबर दर्रे तक आर्थिक गलियारा विकसित करने का प्रस्ताव रखा। इस योजना में जमरूद किले और बाबा फूला सिंह छावनी के पुनर्विकास को भी शामिल किया गया।

उन्होंने कथित तौर पर दावा किया कि विरासत विकास परियोजनाओं के लिए करीब 70 करोड़ डॉलर की राशि जुटाई गई है, जिसमें विश्व बैंक से मिले 9.4 करोड़ डॉलर भी शामिल हैं। इस परियोजना के जरिए हर साल बड़ी संख्या में सिख पर्यटकों को पाकिस्तान लाने की योजना बताई गई। हालांकि, पाकिस्तान में सिख धार्मिक स्थलों की मौजूदा स्थिति इन दावों पर सवाल खड़े करती है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान के कई गुरुद्वारे जर्जर हालत में हैं। कुछ धार्मिक स्थलों पर अतिक्रमण किया गया है, जबकि कुछ का इस्तेमाल दूसरे उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है। इसके अलावा सिख समुदाय के लोगों पर हमले, धार्मिक भेदभाव और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं भी लगातार सामने आती रही हैं।

पाकिस्तान में सिख धार्मिक विरासत की सुरक्षा में लापरवाही का एक बड़ा उदाहरण जुलाई में सामने आया, जब पंजाब प्रांत के फर्रुखाबाद में 125 साल पुराने गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा साहिब को ध्वस्त कर दिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, एक स्थानीय कारोबारी ने कथित तौर पर बिना कानूनी अनुमति और अदालत के आदेश के इस ऐतिहासिक गुरुद्वारे को गिराने का काम कराया।

इस घटना के बाद गुरुद्वारे के कुछ हिस्से मलबे में तब्दील हो गए। स्थानीय सिख समुदाय के लोगों ने इसके विरोध में सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। इसके बाद ही संबंधित अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया। खालसा वॉक्स की रिपोर्ट में बताया गया कि 24 जून की रात फर्रुखाबाद के सिख समुदाय के लिए बेहद दर्दनाक थी। जिस ऐतिहासिक इमारत में कई पीढ़ियों से उनके पूर्वज प्रार्थना करते आए थे, उसे मशीनों से तोड़ दिया गया। यह गुरुद्वारा एक सदी से भी अधिक पुराना था और सिंह सभा आंदोलन के दौर में स्थापित हुआ था।

रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित विभाग के एक अधिकारी ने बाद में स्वीकार किया कि स्थानीय सिखों के विरोध प्रदर्शन से पहले विभाग ने इस ध्वस्तीकरण पर ध्यान नहीं दिया था। इससे यह सवाल खड़ा हुआ कि आखिर धार्मिक अल्पसंख्यकों की विरासत की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने वाले विभाग ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की। रिपोर्ट में कहा गया कि यह केवल प्रशासनिक लापरवाही का मामला नहीं है, बल्कि पाकिस्तान में सिख समुदाय को अपनी धार्मिक पहचान और ऐतिहासिक विरासत बचाने के लिए बार-बार संघर्ष करना पड़ रहा है। ऐसे में विदेशों में सिख विरासत के संरक्षण और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के पाकिस्तान के दावों के बीच देश के भीतर गुरुद्वारों की बदहाल स्थिति इस पूरे अभियान की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

--आईएएनएस

डीएससी

Share this story

Tags