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बंगला साहिब की पवित्रता बनाए रखें, विरोध-प्रदर्शन का स्थान न बनाएं : विक्रमजीत सिंह साहनी

बंगला साहिब की पवित्रता बनाए रखें, विरोध-प्रदर्शन का स्थान न बनाएं : विक्रमजीत सिंह साहनी
बंगला साहिब की पवित्रता बनाए रखें, विरोध-प्रदर्शन का स्थान न बनाएं : विक्रमजीत सिंह साहनी

नई दिल्ली, 11 अक्टूबर (आईएएनएस)। राज्यसभा सदस्य विक्रमजीत सिंह साहनी ने रविवार को दिल्ली के गुरुद्वारा बंगला साहिब का इस्तेमाल विरोध-प्रदर्शन के लिए किए जाने की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों को राजनीतिक प्रदर्शनों के बजाय पूजा-अर्चना, सेवा और आध्यात्मिक चिंतन के लिए समर्पित रहना चाहिए।

साहनी ने कहा कि गुरुद्वारों में सभी का लंगर और आश्रय देकर स्वागत करने की पुरानी परंपरा रही है, चाहे उनकी पृष्ठभूमि या मकसद कुछ भी हो। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि दया और मेहमाननवाजी की इस भावना का गलत इस्तेमाल करके पवित्र स्थलों को विरोध-प्रदर्शन की जगहों में नहीं बदला जाना चाहिए।

घटनाक्रम को स्पष्ट करते हुए सांसद ने बताया कि दिल्ली पुलिस के जवान शनिवार को सुबह करीब 11 बजे जूते-चप्पल रखने की जगह तक जाने वाले तय रास्ते से गुजरे थे और वे मुख्य गुरुद्वारा परिसर में दाखिल नहीं हुए थे।

प्रदर्शनकारी शनिवार को दोपहर करीब 1 बजे इकट्ठा हुए। साहनी ने इस बात पर चिंता जताई कि गुरुद्वारा स्वयंसेवकों के ऐसी गतिविधियों से बचने के अनुरोध के बावजूद गुरुद्वारा परिसर के भीतर नारे लगाए गए और प्लेकार्ड दिखाए गए। उन्होंने कहा कि सेवा और मानवता के सिख सिद्धांतों के अनुरूप, लंगर या आश्रय लेने वाले शांतिप्रिय लोगों का हमेशा स्वागत किया गया है।

साहनी ने इस बात पर जोर दिया कि प्रदर्शनकारियों को मानवीय मदद देने और पूजा-स्थल को विरोध-प्रदर्शन की जगह बनने देने के बीच साफ फर्क होना चाहिए। उन्होंने कहा, "हमारे गुरुद्वारे सेवा, दया और भाईचारे के प्रतीक हैं। आइए हम उनकी पवित्रता बनाए रखें और ऐसी घटनाओं को नफरत फैलाने या समाज में बंटवारा करने का जरिया न बनने दें।"

इस बीच साहनी ने मशहूर गायक दिलजीत दोसांझ और आयोजकों का शुक्रिया अदा किया कि उन्होंने 1 नवंबर को होने वाले दिल्ली कॉन्सर्ट का समय बदलने की उनकी अपील पर विचार किया।

उन्होंने कहा, "मैं दिलजीत दोसांझ का तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूं कि उन्होंने मेरी गुजारिश को खुशी-खुशी मान लिया। वह पंजाब के सच्चे सपूत हैं, पगड़ी पहनने वाले एक ऐसे ग्लोबल आइकॉन हैं जिन पर गर्व किया जा सकता है, और लाखों लोगों के लिए प्रेरणा हैं। पीड़ितों और उनके परिवारों के दुख के प्रति उनकी संवेदनशीलता उस दया और ज‍िम्मेदारी को दिखाती है जो उनके कद के साथ आती है।"

--आईएएनएस

एएसएच/वीसी

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