गुजरात में बनेगी निर्यात संवर्धन परिषद, एमएसएमई और स्टार्टअप को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने में मिलेगी मदद
गांधीनगर, 5 नवंबर (आईएएनएस)। गुजरात सरकार ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) और स्टार्टअप सहित राज्य के उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने और निर्यात बढ़ाने के लिए गुजरात निर्यात संवर्धन परिषद (जीईपीसी) की स्थापना को मंजूरी दी है।
यह परिषद उद्योग एवं खान विभाग के तहत विशेष प्रयोजन वाहन (एसपीवी) के रूप में काम करेगी। इसके जरिए निर्यात से जुड़ी सलाह, अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच, तकनीकी सहायता, वित्त और लॉजिस्टिक्स संबंधी सुविधाओं के लिए एक साझा संस्थागत मंच उपलब्ध कराया जाएगा। परिषद प्रत्येक जिले के लिए अलग-अलग निर्यात संवर्धन योजनाएं भी तैयार करेगी। इसके तहत स्थानीय उत्पादों और ऐसे उद्योगों की पहचान की जाएगी, जिनमें अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचने की क्षमता है।
3 नवंबर को जारी सरकारी प्रस्ताव के अनुसार, जीईपीसी की स्थापना कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 8 के तहत पूरी तरह राज्य के स्वामित्व वाली गैर-लाभकारी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के रूप में की जाएगी। इसका पंजीकृत कार्यालय गांधीनगर में होगा। यह प्रस्ताव गुजरात के विनिर्माण क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने के लिए गठित टास्क फोर्स की सिफारिशों के बाद सामने आया है। टास्क फोर्स ने निर्यात विकास को औद्योगिक वृद्धि के तीन प्रमुख स्तंभों में से एक बताया था।
गुजरात स्टेट इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मेशन (जीआरआईटी) ने मई 2025 में एक रिपोर्ट तैयार कर निर्यात संवर्धन के लिए अलग संस्थागत व्यवस्था बनाने की सिफारिश की थी। इसके बाद उद्योग आयुक्तालय की ओर से प्रस्ताव भेजे जाने पर राज्य सरकार ने इसे मंजूरी दी। परिषद का मुख्य ध्यान छोटे उद्यमों को विदेशी बाजारों तक पहुंचने में आने वाली परेशानियों को दूर करने पर होगा। इनमें अंतरराष्ट्रीय बाजार की जरूरतों, निर्यात प्रक्रियाओं, नियमों और अनिवार्य प्रमाणपत्रों की सीमित जानकारी जैसी चुनौतियां शामिल हैं।
इसके तहत उद्यमियों को विदेशी बाजारों की पहचान, बाजार में प्रवेश की रणनीति तैयार करने, कारोबारी परामर्श, मार्गदर्शन और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। उद्यमियों और निर्यातकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाएं, सेमिनार और कौशल विकास से जुड़ी गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी। सरकारी संस्थानों और व्यापारिक संगठनों के साथ साझेदारी के जरिए परिषद घरेलू और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों तथा विपणन कार्यक्रमों में निर्यातकों की भागीदारी सुनिश्चित करेगी।
निर्यात से जुड़ी प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए जीईपीसी डिजिटल ट्रेड प्लेटफॉर्म, निर्यातक पोर्टल, साझा सुविधा केंद्र, इन्क्यूबेशन सेंटर, परीक्षण एवं प्रमाणन सुविधाएं और लॉजिस्टिक्स सहायता प्रणाली विकसित करने की योजना बना रही है। निर्यातकों को उत्पादों की गुणवत्ता जांच, अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन, व्यापार वित्त, बीमा, शिपमेंट से पहले और बाद की वित्तीय सुविधाओं तथा आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन में भी सहायता दी जाएगी।
परिषद बाजार संबंधी जानकारी, व्यापार विश्लेषण, उत्पाद विकास, ब्रांडिंग और अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुपालन को लेकर भी मार्गदर्शन उपलब्ध कराएगी। परिषद के कामकाज का एक प्रमुख हिस्सा राज्य की निर्यात संवर्धन रणनीति के अनुरूप प्रत्येक जिले के लिए अलग जिला निर्यात संवर्धन योजना तैयार करना होगा। इन योजनाओं को समय-समय पर जिले की उत्पादन क्षमता, औद्योगिक विशेषताओं, बाजार की मांग और निर्यात की संभावनाओं का आकलन करने के बाद अपडेट किया जाएगा। जिला निर्यात संवर्धन परिषदें (डीईपीसी) क्षेत्रीय और सेक्टर आधारित संस्थानों के साथ मिलकर निर्यात संबंधी गतिविधियों का समन्वय और निगरानी करेंगी।
सरकार गुजरात में निर्मित उत्पादों को वैश्विक ब्रांड के रूप में स्थापित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग और मार्केटिंग अभियान भी चलाएगी। निर्यात को बढ़ावा देने के साथ परिषद आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी काम करेगी। इसके लिए आयात पर निर्भर क्षेत्रों की पहचान की जाएगी और घरेलू विकल्प विकसित करने वाले निर्माताओं को तकनीकी, वित्तीय और परामर्श संबंधी सहायता दी जाएगी।
जीईपीसी निर्यात संबंधी प्रक्रियाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), ब्लॉकचेन, डिजिटलीकरण और इंडस्ट्री 4.0 जैसी आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल को भी प्रोत्साहित करेगी। इसके अलावा हरित तकनीकों, पर्यावरण अनुकूल उत्पादों और अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण मानकों के अनुपालन के जरिए टिकाऊ निर्यात को बढ़ावा दिया जाएगा। विदेशी बाजारों में पेटेंट, ट्रेडमार्क और कॉपीराइट सहित बौद्धिक संपदा अधिकार हासिल करने के इच्छुक निर्यातकों को भी सहायता मिलेगी। परिषद अंतरराष्ट्रीय व्यापार विवादों, कानूनी मामलों और गैर-टैरिफ बाधाओं से निपटने में भी मदद करेगी।
कंपनी की शुरुआती अधिकृत और चुकता पूंजी एक लाख रुपये निर्धारित की गई है। इसकी पूरी शेयर पूंजी राज्य सरकार के अधिकृत प्रतिनिधियों के माध्यम से राज्यपाल के नाम पर रखी जाएगी। परिषद कानूनी प्रावधानों के अनुसार बैंकों और वित्तीय संस्थानों से धन जुटाने और ऋण लेने में भी सक्षम होगी। परिषद के निदेशक मंडल में न्यूनतम तीन और अधिकतम 15 सदस्य होंगे। मुख्य सचिव इसके अध्यक्ष होंगे, जबकि उद्योग एवं खान विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रधान सचिव या सचिव उपाध्यक्ष की भूमिका निभाएंगे। उद्योग आयुक्त परिषद के प्रबंध निदेशक होंगे।
इसके अलावा बंदरगाह एवं परिवहन विभाग, कुटीर एवं ग्रामीण उद्योग विभाग, कृषि, किसान कल्याण एवं सहकारिता विभाग, एमएसएमई आयुक्तालय, गुजरात औद्योगिक विकास निगम (जीआईडीसी), आईएनडीईएक्सटीबी, गुजरात इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड और वित्त विभाग के प्रतिनिधि भी निदेशक मंडल में शामिल होंगे। सरकार का उद्देश्य निर्यात संवर्धन से जुड़ी सभी गतिविधियों को एक साझा संस्थागत ढांचे के तहत लाना और गुजरात के विभिन्न जिलों की उत्पादन क्षमताओं को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ना है।
--आईएएनएस
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