गुजरात पुलिस ने सीसीटीवी और साइबर टूल्स की मदद से 28 दिनों में 42 लापता बच्चों का पता लगाया
गांधीनगर, 31 जुलाई (आईएएनएस)। गुजरात पुलिस ने राज्यव्यापी 'ऑपरेशन सुरक्षित साइबर स्पेस' के तहत सीसीटीवी एनालिटिक्स, साइबर टूल्स और डिजिटल सर्विलांस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके 1 जुलाई से 28 जुलाई के बीच राज्य भर में लापता हुए 42 बच्चों का पता लगाया और उन्हें उनके परिवारों से मिलाया।
पुलिस ने शुक्रवार को जिन मामलों का जिक्र किया, उनमें से एक मामला आनंद जिले के खंभात की 7वीं क्लास की एक छात्रा का था, जो स्कूल जाते समय लापता हो गई थी। लड़की खंभात नागरिक सहकारी बैंक प्राइमरी स्कूल जाने के लिए खोडियार नगर सोसाइटी स्थित अपने घर से निकली थी, लेकिन स्कूल नहीं पहुंची। जब उसकी क्लास टीचर ने उसके माता-पिता को इसकी जानकारी दी, तो वे खंभात सिटी पुलिस के पास पहुंचे।
पुलिस ने 'विश्वास फेज-2' सीसीटीवी नेटवर्क के फुटेज और दूसरे डिजिटल सर्विलांस टूल्स की मदद से कुछ ही घंटों में लड़की का पता लगा लिया। वह अपनी साइकिल के साथ मिली और उसे उसके परिवार से मिला दिया गया।
पुलिस ने बताया कि खंभात का यह मामला उन 42 घटनाओं में से एक था, जिनमें साइबर टूल्स, सीसीटीवी एनालिटिक्स और दूसरी तकनीकी मदद से 28 दिनों के दौरान लापता बच्चों का पता लगाकर उन्हें उनके परिवारों से मिलाया गया।
साइबर सुरक्षा को मजबूत करने और डिजिटल दुनिया में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा बढ़ाने के मकसद से डिप्टी सीएम हर्ष संघवी की अगुवाई में 'ऑपरेशन सुरक्षित साइबर स्पेस' शुरू किया गया।
पुलिस के मुताबिक, यह अभियान डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (डीजीपी) ज्ञानेंद्र सिंह मलिक की देखरेख में शुरू किया गया था। इसका मकसद साइबर जागरूकता बढ़ाना, साइबर अपराध की जांच की गुणवत्ता में सुधार करना, साइबर अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करना और साइबर स्पेस में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर अधिक जोर देना था।
एडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस, सीआईडी क्राइम (महिला सेल), अजय चौधरी ने कहा, "डीजीपी के मार्गदर्शन में गुजरात पुलिस ने साइबर जागरूकता बढ़ाने, बचाव के उपायों को मजबूत करने, साइबर अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और साइबर स्पेस में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर खास ध्यान देते हुए साइबर अपराध की जांच की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए पूरे राज्य में 'ऑपरेशन सुरक्षित साइबर स्पेस' शुरू किया। इस अभियान के दौरान, साइबर टूल्स और अलग-अलग तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल करके 42 लापता बच्चों का सफलतापूर्वक पता लगाया गया।"
चौधरी ने बताया कि यह अभियान सीआईडी क्राइम और रेलवे द्वारा चलाया गया, जिसमें गुजरात भर के पुलिस स्टेशनों ने सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। इस अभियान में लापता बच्चों का पता लगाने और साइबर जांच को मजबूत करने के साथ-साथ कई अन्य गतिविधियां भी शामिल थीं। इनमें लोगों को ऑनलाइन धोखाधड़ी, डिजिटल सुरक्षा के तरीकों, साइबर हाइजीन और इंटरनेट के जिम्मेदार इस्तेमाल के बारे में जागरूक करने के लिए जन-जागरूकता कार्यक्रम, आउटरीच सेशन और सोशल मीडिया अभियान शामिल थे।
चौधरी ने कहा, "यह पहल दिखाती है कि गुजरात पुलिस बच्चों को खोजने और राज्य भर में आम लोगों की सुरक्षा के उपायों के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किस तरह बढ़ा रही है।"
--आईएएनएस
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