Samachar Nama
×

फॉरेक्स घोटाले में गुजरात का आरोपी गिरफ्तार, साइबर नेटवर्क का खुलासा

फॉरेक्स घोटाले में गुजरात का आरोपी गिरफ्तार, साइबर नेटवर्क का खुलासा
फॉरेक्स घोटाले में गुजरात का आरोपी गिरफ्तार, साइबर नेटवर्क का खुलासा

गांधीनगर, 29 जून (आईएएनएस)। गुजरात पुलिस के साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने 'ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0' के तहत साइबर धोखाधड़ी करने वाले एक गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इन पर आरोप है कि उन्होंने 'रोबोफॉरेक्स' नाम के प्लेटफॉर्म के जरिए चलाई जा रही एक फर्जी फॉरेक्स ट्रेडिंग इन्वेस्टमेंट स्कीम के जरिए एक व्यक्ति से 2.30 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की।

अधिकारियों के अनुसार, धोखाधड़ी तब शुरू हुई जब पीड़ित से 'दिलसफर' ऐप पर 'जिज्ञासा कपूर' नाम के व्यक्ति ने संपर्क किया, जिसने पहले एक मैट्रिमोनियल वेबसाइट के जरिए बातचीत शुरू की थी। आरोप है कि पीड़ित को यह यकीन दिलाया गया कि धोखेबाजों द्वारा दिए गए फॉरेक्स ट्रेडिंग टिप्स का पालन करके भारी मुनाफा कमाया जा सकता है।

पुलिस ने बताया कि आरोपी ने शिकायतकर्ता को 'रोबोफॉरेक्स' वेबपेज पर एक अकाउंट खोलने और शुरुआत में 50,000 रुपए निवेश करने के लिए कहा। अधिकारियों ने कहा, "पीड़ित का भरोसा जीतने के लिए आरोपी ने पहले निवेश पर कमाए गए मुनाफे को निकालने की अनुमति दी।"

महिला का भरोसा कायम होने के बाद आरोपी ने टेलीग्राम के जरिए शिकायतकर्ता को अलग-अलग बैंक अकाउंट में पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहा। इसके बाद शिकायतकर्ता ने 1.47 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए।

आरोप है कि ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर निवेश के बदले भारी मुनाफा दिखाया गया, लेकिन फिर शिकायतकर्ता को एक मैसेज मिला, जिसमें कहा गया था कि रोबोफॉरेक्स अकाउंट लॉक कर दिया गया है। जांचकर्ताओं के अनुसार, आरोपी ने अकाउंट अनलॉक करने के लिए और 83 लाख रुपए की मांग की और बाद में पैसे निकालने के शुल्क के बहाने और भुगतान की मांग की।

पुलिस ने बताया कि अलग-अलग झूठे बहानों से शिकायतकर्ता ने कुल 2.30 करोड़ रुपए का निवेश किया, जो कभी वापस नहीं मिला। अधिकारियों ने कहा, "सभी आरोपियों ने शिकायतकर्ता को धोखा देने के लिए आपराधिक साजिश में मिलकर काम किया।"

जांच से पता चला कि गिरफ्तार आरोपियों में से एक राज पडसाला ने धोखाधड़ी में इस्तेमाल के लिए अपनी फर्म 'आरपी केमिकल्स' के नाम से एक बैंक अकाउंट खोला था। पुलिस का आरोप है कि उसने कमीशन के बदले बैंकिंग किट सह-आरोपी याज्ञनिक रमानी को सौंप दी थी।

अधिकारियों ने बताया, "रमानी ने बैंकिंग किट सह-आरोपी डॉ जयदीप कुमार अर्देशना (जिन्हें 'डॉक्टर उपलेटा' के नाम से भी जाना जाता है और जो उपलेटा में क्लिनिक चलाते हैं) को दी। उनके जरिए नेटवर्क ने लक्ष्मण वाघेला से संपर्क किया, जिन्होंने दिल्ली में राहुल नाम के व्यक्ति तक पहुंचने के लिए पंकज पासवान का इस्तेमाल किया।"

पुलिस का आरोप है कि सरफराज नाम के एक अन्य व्यक्ति के जरिए बैंकिंग किट को अंततः नेपाल भेजा गया, जहां इसका इस्तेमाल साइबर धोखाधड़ी से कमाए गए पैसे को इधर-उधर करने और ठिकाने लगाने के लिए किया गया।

आरोप है कि शिकायतकर्ता का पैसा दूसरी जगह भेजने से पहले उस अकाउंट में जमा किया गया था। पुलिस ने बताया कि नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीसीआरपी) पर आरपी केमिकल्स के बैंक अकाउंट की जांच करने पर पता चला कि यह पूरे भारत में दर्ज साइबर धोखाधड़ी की 31 शिकायतों से जुड़ा था। इन मामलों में शामिल कुल रकम 15.31 करोड़ रुपए से ज्यादा है।

ऑपरेशन के दौरान जांच करने वालों ने सात मोबाइल फोन और दो फर्जी पहचान दस्तावेज जब्त किए, जिनमें एक आधार कार्ड और एक पैन कार्ड शामिल है।

गिरफ्तार किए गए पांच आरोपियों की पहचान आनंद के राज पडसाला (पुलिस के अनुसार बैंक अकाउंट होल्डर), राजकोट के याज्ञनिक रमानी (बैंक अकाउंट सप्लायर), राजकोट के लक्ष्मण वाघेला (बैंक अकाउंट सप्लायर), राजकोट के डॉ जयदीप कुमार अर्देशना (बैंक अकाउंट सप्लायर) और राजकोट के सागर गोकानी (बैंक अकाउंट प्रोवाइडर) के रूप में हुई है। वहीं, पुलिस की ओर से इस मामले में आगे की जांच चल रही है।

--आईएएनएस

डीके/डीकेपी

Share this story

Tags