Samachar Nama
×

सूरत में फर्जी डॉक्टरों पर बड़ी कार्रवाई, 8 क्लीनिकों पर छापा, आठ आरोपी गिरफ्तार

सूरत में फर्जी डॉक्टरों पर बड़ी कार्रवाई, 8 क्लीनिकों पर छापा, आठ आरोपी गिरफ्तार
सूरत में फर्जी डॉक्टरों पर बड़ी कार्रवाई, 8 क्लीनिकों पर छापा, आठ आरोपी गिरफ्तार

सूरत, 17 सितंबर (आईएएनएस)। गुजरात के सूरत शहर में बिना मान्यता प्राप्त मेडिकल डिग्री के क्लीनिक चलाने वाले आठ कथित फर्जी डॉक्टरों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। सूरत पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) और जिला स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने पांडेसरा क्षेत्र में आठ क्लीनिकों पर छापेमारी की कार्रवाई की।

पुलिस के अनुसार, यह अभियान 16 सितंबर को सूरत के पुलिस आयुक्त के निर्देश पर चलाया गया। उद्देश्य ऐसे लोगों की पहचान करना था, जो बिना मेडिकल डिग्री या कथित फर्जी योग्यता के आधार पर क्लीनिक चला रहे थे। पूरी कार्रवाई पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) राजदीपसिंह नकुम की निगरानी में की गई।

एसओजी को सूचना मिली थी कि पांडेसरा इलाके में कई लोग डॉक्टर बनकर मरीजों का इलाज कर रहे हैं। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने डमी मरीजों के जरिए आठ अलग-अलग स्थानों पर जांच की, जिसमें सूचना सही पाई गई।

इसके बाद स्वास्थ्य विभाग और पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाया। जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल पटेल ने स्वास्थ्य विभाग की तीन टीमें गठित कीं, जबकि एसओजी ने भी तीन अलग-अलग टीमें बनाकर एक साथ सभी स्थानों पर छापेमारी की।

पार्थ देबनाथ (40) रांचोड़नगर सोसायटी स्थित प्रिंस क्लीनिक चला रहा था। वह 12वीं पास है और पिछले दो वर्षों से क्लीनिक चला रहा था। उसने दावा किया कि उसके पिता बीएचएमएस डॉक्टर थे, इसलिए उसे अनुभव था।

सिद्धार्थ देबनाथ (38) ईश्वरनगर में एसके क्लीनिक चला रहा था। वह भी 12वीं पास है और चार वर्षों से क्लीनिक संचालित कर रहा था।

विनोदकुमार साहनी (36) बमरोली रोड स्थित एंजेल क्लीनिक में मरीज देख रहा था। वह पहले विभिन्न अस्पतालों में ऑपरेशन थिएटर सहायक के रूप में काम कर चुका था।

मनोरंजन बिस्वाल (54) प्रगति क्लीनिक चला रहा था। पुलिस के अनुसार उसने बीएससी और बीएएमएस की पढ़ाई की है।

सजल बिस्वास (21) साई बाबा क्लीनिक संचालित कर रहा था। वह 12वीं पास है और पहले अस्पताल में कंपाउंडर के रूप में काम कर चुका है।

विजय यादव (55) राधेश्याम नगर में एक क्लीनिक चला रहा था। वह भी 12वीं पास है और 15 साल तक कंपाउंडर के रूप में काम कर चुका था।

संदीप सोनावणे (49) कर्मयोगी सोसायटी में 'दवाखाना' नाम से क्लीनिक चला रहा था। वह 12वीं पास है और महाराष्ट्र के जलगांव जिले के एक अस्पताल में कंपाउंडर रह चुका है।

श्यामनारायण गुप्ता (53) श्याम क्लीनिक चला रहा था। उसने बीएससी की पढ़ाई की है और पहले वाराणसी के एक क्लीनिक में काम कर चुका है।

छापेमारी के दौरान टीमों ने विभिन्न प्रकार की दवाइयां, इंजेक्शन और सिरप जब्त किए। जब्त सामग्री की कुल कीमत 98,825 रुपए बताई गई है। सभी आठ आरोपियों के खिलाफ पांडेसरा पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी पार्थ देबनाथ का नाम एक अन्य मामले में भी सामने आया है। अधिकारियों के अनुसार, उसने पहले स्वास्तिक क्लीनिक नाम से एक डिस्पेंसरी चलाई थी और करीब एक महीने पहले पांडेसरा निवासी 14 वर्षीय अभिषेक सिंह का इलाज किया था।

बाद में किशोर की मौत हो गई थी, जिसके बाद परिजनों ने डॉक्टर पर आरोप लगाए थे। इस संबंध में पांडेसरा पुलिस थाने में आकस्मिक मृत्यु (एडी) का मामला दर्ज किया गया था।

--आईएएनएस

एएमटी/एबीएम

Share this story

Tags