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नौसेना के अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोत 'श्रुति' को जीआरएसई यार्ड में किया गया लॉन्च

नौसेना के अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोत 'श्रुति' को जीआरएसई यार्ड में किया गया लॉन्च
नौसेना के अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोत 'श्रुति' को जीआरएसई यार्ड में किया गया लॉन्च

कोलकाता, 11 अगस्त (आईएएनएस)। गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) लिमिटेड ने 2026-27 के अंत तक नौसेना को पांच युद्धपोत सौंपने की योजना बनाई है। यह घोषणा जीआरएसई के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक कमोडोर पीआर हरि, आईएन (सेवानिवृत्त) ने मंगलवार 11 अगस्त को कोलकाता में श्रुति नामक अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोत (एनजीओपीवी) के शुभारंभ के दौरान की।

श्रुति पोत जीआरएसई द्वारा निर्मित चार एनजीओपीवी में से दूसरी है, जिसे लॉन्च किया गया है। पहले पोत संघमित्रा को इस वर्ष 20 मई को लॉन्च किया गया था।

कमोडोर हरि ने कहा, "हम इन चार एनजीओपीवी सहित नौ युद्धपोतों का निर्माण कर रहे हैं। हम इस वित्तीय वर्ष के अंत तक इनमें से पांच युद्धपोत सौंप देंगे। इसके अलावा, हम शेष दो एनजीओपीवी को भी तब तक लॉन्च कर देंगे।"

जिन युद्धपोतों की डिलीवरी की जाएगी, उनमें उन्नत स्टील्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट विंध्यगिरि और चार पनडुब्बी रोधी उथले जल नौकाएं (एएसडब्ल्यूएसडब्ल्यूसी) शामिल हैं। श्रुति का शुभारंभ भारतीय नौसेना के युद्धपोत उत्पादन एवं अधिग्रहण नियंत्रक (सीडब्ल्यूपी एंड ए) वाइस एडमिरल संजय साधु की पत्नी मानिका साधु ने पारंपरिक अनुष्ठानों और श्लोकों के उच्चारण के बीच किया। इस अवसर पर वाइस एडमिरल संजय साधु मुख्य अतिथि थे।

एनजीओपीवी पहले निर्मित अपतटीय गश्ती पोतों की तुलना में कहीं अधिक बड़े युद्धपोत होंगे और इनकी सहनशक्ति भी अधिक होगी। इन जहाजों में उन्नत सेंसर और उपकरण भी लगे होंगे। ये पोत लगभग 113 मीटर लंबे और 14.6 मीटर चौड़े होंगे, जिनका विस्थापन 3,000 टन होगा।

एनजीओपीवी 23 समुद्री मील तक की गति प्राप्त कर सकते हैं। 14 समुद्री मील की गति पर इनकी सहनशक्ति 8,500 समुद्री मील होगी। एनजीओपीवी कई तरह की भूमिकाएं निभाएंगे। केवल 4 मीटर के ड्राफ्ट की आवश्यकता के साथ, वे तटीय जल में संचालन करने, अपतटीय संपत्तियों की रक्षा करने, समुद्री अवरोधन करने, विजिट, बोर्ड, सर्च एंड सीजर (वीबीएसएस) अभियानों को अंजाम देने में सक्षम होंगे।

ये युद्धपोत निगरानी और बारूदी सुरंगों से बचाव के अभियानों में भी भाग लेंगे। साथ ही, विशेष अभियानों में सहयोग करने की क्षमता भी रखेंगे। ये युद्धपोत 'क्षेत्र से बाहर' आकस्मिक अभियानों, गैर-लड़ाकू निकासी, काफिला अभियानों, समुद्री डाकुओं के खिलाफ अभियानों और घुसपैठ-विरोधी अभियानों में भी शामिल होंगे।

इनके अलावा, वे मानवीय सहायता और आपदा राहत के साथ-साथ खोज और बचाव अभियानों में भी भाग लेंगे। बेड़े के रखरखाव में सहायता प्रदान करने के अलावा वे अस्पताल और खुफिया जानकारी जुटाने वाले जहाजों के रूप में भी कार्य करने में सक्षम होंगे।

कमोडोर हरि ने नौसेना और तटरक्षक बल से नए ऑर्डर न मिलने पर थोड़ी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, "हमारा मुख्य व्यवसाय युद्धपोत निर्माण है। पांच युद्धपोतों की डिलीवरी के बाद नौसैनिक प्लेटफार्मों के लिए हमारे ऑर्डर काफी कम हो जाएंगे। यह चिंता का विषय है। हालांकि, मुझे विश्वास है कि अगली पीढ़ी के कोरवेट के ऑर्डर मिलने से स्थिति में सुधार होगा।"

--आईएएनएस

एसएचके/पीएम

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