ग्रामीण डाक सेवक गवर्नेंस की पहली कड़ी, सरकारी सेवाओं को गांवों तक पहुंचाने में अहम भूमिका : चंद्र शेखर पेम्मासानी
चेन्नई, 15 मार्च (आईएएनएस)। ग्रामीण डाक सेवक गवर्नेंस की आखिरी नहीं, बल्कि पहली कड़ी है। सरकारी सेवाओं को गांवों तक पहुंचाने में इनकी अहम भूमिका है। यह बयान केंद्रीय संचार राज्य मंत्री चंद्र शेखर पेम्मासानी ने रविवार को दिया।
तमिलानाडु की राजधानी में ग्रामीण डाक सेवक सम्मेलन में पेम्मासानी ने कहा कि अगर ग्रामीण डाक सेवक नहीं होंगे तो सरकारी सेवाएं गांवों में नहीं पहुंच पाएंगी।
आगे उन्होंने ग्रामीण डाक सेवकों को 'ग्रामीण भारत की धड़कन' बताया।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, “आप शासन की अंतिम कड़ी नहीं हैं, आप पहली कड़ी हैं। आपके बिना सरकारी सेवाएं गांवों तक नहीं पहुंच सकतीं।”
पेम्मासानी ने कहा, “पत्र और पार्सल पहुंचाने से लेकर लोगों को बैंकिंग सेवाएं, आधार और पासपोर्ट संबंधी सेवाएं उपलब्ध कराने तक, डाक कर्मचारी हर गांव, गली और घर तक अपनी सेवाएं पहुंचाते हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि खराब मौसम के बावजूद, वे सरकार और नागरिकों के बीच विश्वास का सेतु बने रहते हैं।
लॉजिस्टिक्स क्षेत्र की वृद्धि पर पेम्मासानी ने कहा कि इंडिया पोस्ट के पास ई-कॉमर्स बाजार में अपनी उपस्थिति बढ़ाने का एक बड़ा अवसर है।
उन्होंने कहा, “इंडिया पोस्ट वर्तमान में पार्सल सेवाओं से 1,000 करोड़ रुपए से भी कम कमाती है, जबकि एक निजी कूरियर कंपनी लगभग 6,000 करोड़ रुपए कमाती है।”
मंत्री ने कहा कि कई दशकों से इंडिया पोस्ट कानूनी दस्तावेजों, मनी ऑर्डर, समाचार पत्रों और पुस्तकों की डिलीवरी करके देश में संचार की रीढ़ रही है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, “कई गांवों में डाकिये लोगों को पत्र लिखने-पढ़ने में भी मदद करते थे, जिससे ग्रामीण समुदायों और बाहरी दुनिया के बीच एक भरोसेमंद कड़ी का काम होता था।”
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आज भारत के पास दुनिया के सबसे बड़े डाक नेटवर्कों में से एक है। इस प्रणाली में लगभग चार लाख नियमित कर्मचारी और 2.5 लाख से अधिक ग्रामीण डाक सेवक 1.6 लाख से अधिक डाकघरों में कार्यरत हैं।
पेम्मासानी ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में सरकार डाक विभाग को एक आधुनिक, प्रौद्योगिकी-आधारित लॉजिस्टिक्स संगठन में बदलने के लिए काम कर रही है।
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