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सरकार ने ऑटोमैटिक रूट के तहत बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत एफडीआई को अधिसूचित किया

नई दिल्ली, 2 मई (आईएएनएस)। शनिवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार ने बीमा क्षेत्र में 'ऑटोमैटिक रूट' के तहत 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को अधिसूचित कर दिया है, जिससे विदेशी निवेशकों की अधिक भागीदारी का रास्ता खुल गया है।
सरकार ने ऑटोमैटिक रूट के तहत बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत एफडीआई को अधिसूचित किया

नई दिल्ली, 2 मई (आईएएनएस)। शनिवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार ने बीमा क्षेत्र में 'ऑटोमैटिक रूट' के तहत 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को अधिसूचित कर दिया है, जिससे विदेशी निवेशकों की अधिक भागीदारी का रास्ता खुल गया है।

बीमा कंपनियों में विदेशी निवेश, बीमा अधिनियम, 1938 के प्रावधानों के पालन और बीमा और संबंधित गतिविधियां करने के लिए भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) से अनिवार्य मंजूरी के अधीन होगा।

रिपोर्ट में कहा गया, "हालांकि, भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) एक अलग ढांचे के तहत काम करना जारी रखेगा, जिसमें विदेशी निवेश 'ऑटोमैटिक रूट' के तहत 20 प्रतिशत तक सीमित होगा।" यह भी कहा गया है कि एलआईसी में निवेश, बीमा अधिनियम के लागू प्रावधानों के साथ-साथ जीवन बीमा निगम अधिनियम, 1956 द्वारा ही नियंत्रित होता रहेगा।

अधिसूचना में यह शर्त रखी गई है कि जिन बीमा कंपनियों में विदेशी निवेश है, उनमें बोर्ड के अध्यक्ष, प्रबंध निदेशक या मुख्य कार्यकारी अधिकारी में से कम से कम एक व्यक्ति भारतीय नागरिक और निवासी होना चाहिए।

इसके अलावा, बीमा मध्यस्थों, जिनमें ब्रोकर, पुनर्बीमा ब्रोकर, बीमा सलाहकार, कॉर्पोरेट एजेंट, थर्ड-पार्टी प्रशासक, सर्वेक्षक और नुकसान का आकलन करने वाले, प्रबंध महा एजेंट और बीमा रिपॉजिटरी शामिल हैं, के लिए 'ऑटोमैटिक रूट' के तहत 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति दी गई है; जैसा कि आईआरडीएआई द्वारा समय-समय पर अधिसूचित किया जाता है।

यह कदम, केंद्र सरकार द्वारा इस क्षेत्र को उदार बनाने के लिए पहले उठाए गए कदमों के बाद आया है।

फरवरी में, उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग ने बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति देने की अधिसूचना जारी की थी, जो दिसंबर 2025 में संसद द्वारा अनुमोदित विधायी परिवर्तनों के अनुरूप थी।

'सबका बीमा सबकी रक्षा (बीमा कानूनों में संशोधन) अधिनियम' के माध्यम से पेश किए गए इन संशोधनों ने बीमा अधिनियम, 1938, जीवन बीमा निगम अधिनियम, 1956, और भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 के प्रमुख प्रावधानों को संशोधित किया; जिनका उद्देश्य देश में पूंजी प्रवाह को बढ़ाना और बीमा की पहुंच का विस्तार करना था।

नवीनतम अधिसूचना ने इस ढांचे को औपचारिक रूप दिया है, जो बीमा क्षेत्र को खोलने की दिशा में एक कदम है, साथ ही घरेलू निगरानी और विनियमन के लिए सुरक्षा उपायों को भी बनाए रखता है।

--आईएएनएस

एससीएच

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