सीएसएएम और व्हाट्सएप यूजरनेम फीचर पर मेटा से जवाब मांगेगी सरकार, 5 अगस्त को हो सकती है अहम बैठक
नई दिल्ली, 4 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्र सरकार सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ती सुरक्षा और कंटेंट मॉडरेशन संबंधी चिंताओं को लेकर मेटा के वरिष्ठ अधिकारियों से जवाब मांगने की तैयारी में है। सरकार 5 अगस्त को मेटा के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक कर सकती है, जिसमें बाल यौन शोषण सामग्री (सीएसएएम), व्हाट्सएप के यूजरनेम फीचर, और वेरिफाइड व हाई-प्रोफाइल अकाउंट्स से जुड़े कंटेंट हटाने की प्रक्रिया सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के सचिव एस. कृष्णन ने मंगलवार को बताया कि सरकार पिछले कुछ समय से उठ रही विभिन्न चिंताओं पर कंपनी से स्पष्टीकरण चाहती है। उन्होंने यह जानकारी वॉयस ऑफ इंडिया नामक स्वतंत्र मल्टीमॉडल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मूल्यांकन प्लेटफॉर्म के लॉन्च के दौरान दी, जिसे एआई4भारत और जोश टॉक्स एआई ने संयुक्त रूप से विकसित किया है।
बैठक में सबसे प्रमुख मुद्दों में से एक मेटा के प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण सामग्री (सीएसएएम) से निपटने के लिए उठाए गए कदम होंगे। सरकार यह जानना चाहती है कि कंपनी ने इस प्रकार की आपत्तिजनक सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए क्या उपाय किए हैं और वे कितने प्रभावी साबित हो रहे हैं।
एस. कृष्णन ने कहा कि इस विषय को पहले भी कंपनी के सामने उठाया गया था और अब सरकार यह समझना चाहती है कि मेटा ने इस दिशा में क्या प्रगति की है।
सरकार व्हाट्सएप के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर को लेकर भी अपनी चिंताएं दोहरा सकती है। मंत्रालय पहले ही व्हाट्सएप से कह चुका है कि वह इस फीचर को तब तक लागू न करे, जब तक पहचान की चोरी, ऑनलाइन धोखाधड़ी और साइबर अपराध से जुड़े जोखिमों का संतोषजनक समाधान नहीं किया जाता।
सरकार का मानना है कि यदि उचित सुरक्षा उपाय नहीं किए गए, तो यह फीचर लोगों के नाम पर फर्जी अकाउंट बनाकर ठगी करने वालों के लिए नया माध्यम बन सकता है।
बैठक में मेटा की कंटेंट मॉडरेशन नीति और विशेष रूप से वेरिफाइड एवं प्रमुख व्यक्तियों के अकाउंट्स से जुड़े पोस्ट हटाने की प्रक्रिया पर भी चर्चा होने की संभावना है। सरकार का कहना है कि किसी वेरिफाइड यूजर का कंटेंट हटाने से पहले पर्याप्त जांच और सुरक्षा व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि गलती से महत्वपूर्ण सामग्री न हटे।
अधिकारियों के अनुसार, मेटा से यह भी पूछा जा सकता है कि इन मामलों में उसकी आंतरिक प्रक्रियाएं क्या हैं, मौजूदा व्यवस्था कहां कमजोर पड़ रही है और कंपनी को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब हाल ही में मेटा को अपनी कंटेंट मॉडरेशन नीति को लेकर सरकार की नाराजगी का सामना करना पड़ा है। कुछ दिन पहले सरकार ने मेटा के ग्लोबल अफेयर्स प्रमुख जोएल कपलान को तलब कर कंपनी की नीतियों पर स्पष्टीकरण मांगा था।
विवाद तब शुरू हुआ जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक सोशल मीडिया पोस्ट हटा दी गई थी। उस पोस्ट में उन्होंने परीक्षा प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं से निपटने के लिए सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों को संबोधित किया था।
बाद में मेटा ने स्पष्ट किया कि पोस्ट को उसकी स्वचालित मॉडरेशन प्रणाली की तकनीकी त्रुटि के कारण हटाया गया था। कंपनी ने इस गलती के लिए खेद भी जताया था और कहा था कि पोस्ट को अनजाने में हटाया गया था।
पिछले कुछ हफ्तों में मेटा विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार की जांच के दायरे में रहा है। सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही बढ़ाने, साइबर अपराधों पर नियंत्रण और ऑनलाइन सुरक्षा को मजबूत बनाने पर जोर दे रही है। ऐसे में 5 अगस्त को प्रस्तावित बैठक मेटा और सरकार के बीच डिजिटल सुरक्षा तथा कंटेंट मॉडरेशन से जुड़े मुद्दों पर महत्वपूर्ण चर्चा का मंच बन सकती है।
--आईएएनएस
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