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सरकार ने चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की समय सीमा 31 दिसंबर तक बढ़ाई

सरकार ने चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की समय सीमा 31 दिसंबर तक बढ़ाई
सरकार ने चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की समय सीमा 31 दिसंबर तक बढ़ाई

नई दिल्ली, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। सरकार ने त्योहारी सीजन में उचित कीमतों पर पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए टैरिफ रेट कोटा (टीआरक्यू) के तहत 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की समय सीमा दो महीने बढ़ाकर 31 दिसंबर तक कर दी है।

वित्त मंत्रालय ने 20 अगस्त को 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति 31 अक्टूबर तक दी थी। अब मंत्रालय ने शुल्क-मुक्त आयात की अंतिम तिथि को 31 दिसंबर, 2026 तक बढ़ाने के लिए एक नई अधिसूचना जारी की है।

अब तक लगभग 26 लाख टन कच्ची चीनी का आयात हो चुका है। आयात कम रहा है क्योंकि सरकार द्वारा अधिक आयात की अनुमति देने की घोषणा के बाद घरेलू बाजार में चीनी की कीमतें भी कम हो गई हैं। इस विस्तार का उद्देश्य घरेलू कीमतों में वृद्धि होने पर आपूर्ति सुनिश्चित करना है ताकि आयात कीमतों को कम करने में मदद कर सके।

आयात की अनुमति देने के अलावा, सरकार ने घरेलू आपूर्ति को पर्याप्त बनाए रखने और कीमतों में बेतहाशा वृद्धि को रोकने के लिए व्यापारियों पर स्टॉक रखने की सीमा लगाने जैसे कई उपाय किए हैं।

2025-26 विपणन वर्ष (अक्टूबर-सितंबर) के लिए चीनी उत्पादन का अनुमान अब 306 लाख टन लगाया गया है, जो पहले के 343 लाख टन के पूर्वानुमान से कम है। वार्षिक घरेलू मांग लगभग 280-285 लाख टन रहने का अनुमान है।

इस बीच, इस महीने की शुरुआत में, सरकार ने गन्ना किसानों द्वारा उठाए गए मुद्दों की जांच करने और उनकी चिंताओं को दूर करने के लिए उचित उपायों की सिफारिश करने हेतु एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया।

समिति गन्ना किसानों को लाभकारी प्रतिफल में वृद्धि की मांग की जांच करेगी, जिसमें खेती की लागत और अन्य प्रासंगिक कारकों को ध्यान में रखा जाएगा। यह चीनी उत्पादन लागत, बाजार मूल्य और चीनी मिलों की वित्तीय व्यवहार्यता के संदर्भ में चीनी के एक्स-मिल न्यूनतम विक्रय मूल्य (एमएसपी) में संशोधन की मांग की भी जांच करेगी।

समिति द्वारा जांचे जाने वाले अन्य प्रमुख क्षेत्रों में चीनी रिकवरी के परीक्षण और रिपोर्टिंग के लिए मौजूदा तंत्र, रिकवरी के पारदर्शी सत्यापन को सुनिश्चित करने के उपाय और चीनी मिलों में प्रचलित गन्ना तौलने की प्रथाएं शामिल हैं, जिनमें अंशांकन, निरीक्षण और सत्यापन तंत्र की पर्याप्तता भी शामिल है।

--आईएएनएस

एमएस/

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