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कोलकाता पुलिस कार्यालय से 51 लाख के गबन के आरोप में सरकारी कर्मचारी गिरफ्तार

कोलकाता पुलिस कार्यालय से 51 लाख के गबन के आरोप में सरकारी कर्मचारी गिरफ्तार
कोलकाता पुलिस कार्यालय से 51 लाख के गबन के आरोप में सरकारी कर्मचारी गिरफ्तार

कोलकाता, 6 जुलाई (आईएएनएस)। कोलकाता पुलिस के पूर्वी डिवीजन के उपायुक्त (डीसी) कार्यालय से फर्जी बिलों के जरिए चार वर्षों में 51 लाख रुपये से अधिक के कथित गबन के आरोप में एक सरकारी कर्मचारी को गिरफ्तार किया गया है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।

आरोपी की पहचान पुलकेंदु घोष के रूप में हुई है, जो उपायुक्त (पूर्वी डिवीजन) कार्यालय में अपर डिवीजन सहायक (यूडीए) के पद पर तैनात था। कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच के बाद उसे रविवार को गिरफ्तार किया गया।

कोलकाता पुलिस के अनुसार, घोष ने वर्ष 2022 से 2026 के बीच 112 फर्जी बिल तैयार कर 51 लाख रुपये का गबन किया। जांचकर्ताओं का आरोप है कि वैध ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं को भुगतान करने के बजाय उसने यह राशि अपने और अपनी मां के बैंक खातों में स्थानांतरित कर दी।

आरोप है कि सरकारी खाते के बजाय फर्जी बिलों का इस्तेमाल कर उसने यह बड़ी रकम अपने दोनों खातों में ट्रांसफर कराई। प्रारंभिक जांच के बाद लालबाजार (कोलकाता पुलिस मुख्यालय) ने पूर्वी कोलकाता के आनंदपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने पुलकेंदु घोष को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस ने बताया कि सरकार बदलने के बाद लालबाजार को इस कथित गबन की शिकायत मिली थी। पिछले महीने संयुक्त पुलिस आयुक्त (मुख्यालय) ने मामले की जांच के आदेश दिए। उपायुक्त (पूर्वी डिवीजन) के निर्देश पर 15 जून से 30 जून तक पुलिस की एक टीम ने मामले की जांच की।

जांच में आरोप है कि पुलकेंदु घोष ने 2022 से 2026 के बीच कुल 112 फर्जी बिल तैयार किए। इनमें से 88 फर्जी बिलों के जरिए उसने 40 लाख रुपये से अधिक की राशि अपने बैंक खाते में जमा कराई। शेष 24 फर्जी बिलों के माध्यम से 10 लाख रुपये से अधिक की राशि अपनी मां के नाम वाले बैंक खाते में स्थानांतरित कराई।

पुलिस के अनुसार, पुलकेंदु घोष ठेकेदारों और विभिन्न आपूर्तिकर्ताओं के बिल तैयार करने का जिम्मेदार था। इसी जिम्मेदारी का फायदा उठाते हुए उसने चार वर्षों में 51 लाख रुपये के फर्जी बिल तैयार किए और उन्हें पारित भी करा लिया।

जांच के दौरान डेटाबेस में भी कई अनियमितताएं सामने आईं। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने एचआरएमएस प्रणाली से मूल ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं का डेटाबेस, जिसमें उनके बैंक खातों का विवरण दर्ज था, कथित तौर पर हटा दिया। इसके कारण उनके रिकॉर्ड अब सिस्टम में उपलब्ध नहीं हैं।

पुलिस का आरोप है कि आरोपी ने मूल आपूर्तिकर्ताओं के बैंक विवरण हटाकर उनकी जगह अपने और अपनी मां के बैंक खातों की जानकारी दर्ज कर दी। इस कथित धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए फर्जी दस्तावेजों और जाली मुहरों का भी इस्तेमाल किया गया।

पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान कई फर्जी बिल बरामद किए गए हैं।

पूछताछ के दौरान चार ठेका कंपनियों के प्रतिनिधियों ने जांचकर्ताओं को बताया कि उन्हें देय भुगतान कभी प्राप्त ही नहीं हुआ। बाद में सत्यापन में कथित तौर पर पता चला कि यह राशि पुलकेंदु घोष और उसकी मां से जुड़े बैंक खातों में जमा कर दी गई थी।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, कार्यालय में वरिष्ठ पद पर होने के कारण सहकर्मी शायद ही कभी पुलकेंदु घोष पर सवाल उठाते थे। पूछताछ के दौरान उसने कथित तौर पर अपना अपराध स्वीकार कर लिया।

--आईएएनएस

पीएम

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