सोने और चांदी के लिए लंबी अवधि का आउटलुक सकारात्मक, गिरावट खरीदारी का मौका : रिपोर्ट
नई दिल्ली, 5 नवंबर (आईएएनएस)। कैलेंडर वर्ष 2026 में काफी उतार-चढ़ाव रहने के बावजूद, मध्यम से लंबी अवधि में सोने और चांदी का आउटलुक सकारात्मक है। साथ ही, कोई भी गिरावट निवेशकों के लिए खरीदारी के मौका है। यह जानकारी गुरुवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की रिपोर्ट में कहा गया है, "2025 में देखी गई काफी हद तक एकतरफा तेजी के विपरीत, 2026 में कीमती धातुओं में कहीं अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं। इसकी वजह अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदें, लगातार बनी हुई महंगाई, बॉन्ड यील्ड का ऊंचे स्तर पर रहना और भू-राजनीतिक घटनाक्रम हैं।"
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज में कमोडिटीज रिसर्च के प्रमुख नवनीत दमानी ने कहा कि सोने की निकट अवधि की चाल अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति, महंगाई के रुझान, अमेरिकी डॉलर में उतार-चढ़ाव और वास्तविक बॉन्ड यील्ड पर निर्भर करेगी।
दमानी ने आगे कहा कि केंद्रीय बैंकों द्वारा अपने निवेश में विविधता लाने, लगातार बनी हुई निवेश मांग और वित्तीय अनिश्चितताओं के कारण सोने को एक मजबूत आधार मिल रहा है।
रिपोर्ट में सोने के लिए 'गिरावट पर खरीदारी' की रणनीति अपनाने का सुझाव दिया गया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, 3,800-3,900 डॉलर प्रति औंस के दायरे को खरीदारी के लिए एक अच्छा स्तर माना गया है, जिसमें अल्पकालिक लक्ष्य 4,200 डॉलर और मध्यम अवधि का लक्ष्य 4,500-4,700 डॉलर तय किया गया है। भारत में 1,35,000 रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर को खरीदारी के लिए उपयुक्त माना गया है। इसके लिए अल्पकालिक लक्ष्य 1,48,000 रुपए और मध्यम अवधि का लक्ष्य 1,60,000-1,68,000 रुपए निर्धारित किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, ऊंची कीमतों के बावजूद सोने में निवेश की मांग मजबूत बनी हुई है। अगस्त और सितंबर 2026 के दौरान वैश्विक गोल्ड ईटीएफ होल्डिंग्स में लगभग 187 टन की वृद्धि हुई, जिससे यह 4,256 टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। वहीं, तीसरी तिमाही में इसमें 31 अरब डॉलर का रिकॉर्ड निवेश (इनफ्लो) आया। भारत में, सितंबर महीने में गोल्ड ईटीएफ में निवेश 71 प्रतिशत बढ़कर 44.5 अरब रुपए हो गया, जबकि सिल्वर ईटीएफ में 19.7 अरब रुपए का निवेश आया।
जनवरी 2026 में सोने की कीमत लगभग 5,600 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी, जिसके बाद इसमें गिरावट आई और कीमत 4,000 डॉलर से नीचे चली गई, हालांकि बाद में इसमें फिर से सुधार देखने को मिला। चांदी की कीमत भी 100 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच गई थी, जिसके बाद इसमें और भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
रिपोर्ट में बताया गया कि भारत में दीपावली और धनतेरस कीमती धातुओं की खरीदारी के लिए सबसे महत्वपूर्ण अवसरों में से हैं। इस दौरान पारंपरिक खरीदारी के तरीकों, शादी-विवाह के सीजन और सोने-चांदी के सांस्कृतिक महत्व के कारण इनकी मांग काफी बढ़ जाती है। ऐतिहासिक प्रदर्शन से भी पता चलता है कि दीपावली से पहले के 30 दिनों में, दीपावली के बाद के 30 दिनों की तुलना में, सोने ने आमतौर पर बेहतर रिटर्न दिया है।
--आईएएनएस
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