गोदावरी-कावेरी को जोड़ने से दक्षिणी राज्य सूखे से मुक्त हो सकते हैं : सीएम चंद्रबाबू नायडू
अमरावती, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने सोमवार को कहा कि गोदावरी और कावेरी नदियों को आपस में जोड़ने से दक्षिणी राज्यों को सूखे की समस्या से मुक्ति मिल सकती है।
उन्होंने अफसोस जताया कि सूखे के हालात में भी 2,000 टीएमसी (हजार मिलियन क्यूबिक फीट) पानी बहकर समुद्र में चला जाता है।
उन्होंने कडपा जिले के प्रोद्दतूर में 'जल जीवन मिशन 2.0-अमरजीवी जलधारा' कार्यक्रमों की शुरुआत करते हुए कहा कि अगर गोदावरी के बाढ़ के पानी का कम से कम 200 टीएमसी हिस्सा भी इस्तेमाल किया जाए, तो रायलसीमा इलाका हरियाली और फसलों से समृद्ध हो जाएगा।
चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि उनकी सरकार ने ही गोदावरी और कृष्णा नदियों को आपस में जोड़ा था।
उन्होंने गोदावरी पुष्करम से पहले पोलावरम प्रोजेक्ट को पूरा करने का वादा किया और कहा कि इस प्रोजेक्ट को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को समर्पित करेंगे।
यह दोहराते हुए कि अगले तीन सालों में 35,000 करोड़ रुपए की लागत वाले 36 सिंचाई प्रोजेक्ट शुरू किए जाएंगे, उन्होंने कहा कि सरकार ने इन प्रोजेक्ट्स को पूरा करने का शेड्यूल पहले ही जारी कर दिया है।
मुख्यमंत्री ने डिप्टी सीएम पवन कल्याण और राज्य भाजपा अध्यक्ष पीवीएन माधव के साथ मिलकर 30,136 करोड़ रुपए की लागत वाले 'जल जीवन मिशन' और 'अमरजीवी जलधारा' प्रोग्राम की नींव रखी, जिनका मकसद हर घर में नल से पानी का कनेक्शन पहुंचाना है।
चंद्रबाबू नायडू ने कहा, "हम 90 लाख घरों, 48,000 ग्रामीण इलाकों और 3.30 करोड़ लोगों तक पानी पहुंचाने के लिए कदम उठा रहे हैं।"
मुख्यमंत्री ने जल जीवन मिशन को कमजोर करने के लिए वाईएसआर कांग्रेस पार्टी की आलोचना की। उन्होंने कहा कि जहां उत्तर प्रदेश (1 लाख करोड़ रुपए), मध्य प्रदेश (83,000 करोड़ रुपए) और केरल (85,000 करोड़ रुपए) जैसे राज्यों को जल जीवन मिशन के तहत केंद्र से भारी फंड मिला, वहीं पिछली सरकार ने सिर्फ 2,600 करोड़ रुपए हासिल करके आंध्र प्रदेश का नुकसान किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार की लापरवाही और नाकामी के कारण गांवों को नुकसान उठाना पड़ा, क्योंकि वहां न तो सड़कें थीं, न स्ट्रीट लाइटें और न ही पानी की सुविधा।
चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि पक्के इरादे और केंद्र के सहयोग से गठबंधन सरकार ने पिछले 28 महीनों में राज्य के पुनर्निर्माण के लिए मजबूत नींव रखी है। उन्होंने बताया कि सरकार ने पिछले सात दिनों में ही राज्य भर के गांवों और कस्बों के विकास के लिए नौ कार्यक्रम शुरू किए हैं। 'पल्ले पांडुगा' पहल के जरिए, हमने गांवों में सड़कें, नालियां और स्ट्रीटलाइट जैसी बुनियादी सुविधाएं देने के लिए 11,085 करोड़ रुपए के काम किए हैं।
उन्होंने कहा, "हमने विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम और मंगलगिरि समेत पूरे राज्य में 52,000 करोड़ रुपए की कीमत वाली रिहायशी जमीनों के लिए हाउसिंग पट्टे (मालिकाना हक के कागजात) बांटे हैं। हमने रायलसीमा क्षेत्र का भविष्य और दिशा बदलने के मकसद से 1 लाख करोड़ रुपए का 'ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब' प्रोजेक्ट शुरू किया है। हम 2029 तक हर परिवार को घर देने के लक्ष्य पर काम कर रहे हैं। इस पहल के तहत, हम 19 लाख घर बनाएंगे।"
--आईएएनएस
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