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भारतीयों की कड़ी मेहनत को कमतर आंकती है राहुल गांधी की टिप्पणी : सीतारमण (आईएएनएस एक्सक्लूसिव)

भारतीयों की कड़ी मेहनत को कमतर आंकती है राहुल गांधी की टिप्पणी : सीतारमण (आईएएनएस एक्सक्लूसिव)
भारतीयों की कड़ी मेहनत को कमतर आंकती है राहुल गांधी की टिप्पणी : सीतारमण (आईएएनएस एक्सक्लूसिव)

एशविले, 1 सितंबर (आईएएनएस)। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राहुल गांधी द्वारा भारत को "मृत अर्थव्यवस्था" बताए जाने को लेकर उन पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता भारतीय नागरिकों के काम को कमतर आंक रहे हैं जबकि देश ने 7.8 प्रतिशत की विकास दर दर्ज की है।

एशविले में जी-20 वित्त मंत्रियों की बैठक के दौरान आईएएनएस के साथ एक खास इंटरव्यू में वित्त मंत्री सीतारमण ने इस बात पर निराशा जताई कि लगातार मजबूत आर्थिक आंकड़ों के बावजूद विपक्ष ने देश की गलत तस्वीर पेश की।

उन्होंने कहा, "लगातार ऐसे ग्रोथ आंकड़ों के बावजूद, यह बहुत अजीब बात है कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी भारतीय अर्थव्यवस्था को लगातार 'मृत अर्थव्यवस्था' कहते हैं।"

उन्होंने कहा, "यह दिखाता है कि वे भारतीय नागरिकों की कड़ी मेहनत को कितनी कम अहमियत देते हैं, जो अच्छी बात नहीं है।"

वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार से सवाल पूछना विपक्ष की जायज और जरूरी जिम्मेदारी है। हालांकि उन्होंने कहा कि सरकार की आलोचना करते समय देश की आर्थिक प्रगति में नागरिकों के योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, "विपक्षी पार्टी का सत्ताधारी पार्टी से लगातार सवाल पूछना एक बात है और यह सही भी है। लोकतंत्र में एक मजबूत विपक्षी पार्टी की जरूरत होती है, जो अपनी बात रखे।"

उन्होंने कहा, "लगातार ऐसे ग्रोथ आंकड़ों के बावजूद राहुल गांधी का भारतीय अर्थव्यवस्था को 'मृत' कहना बहुत अजीब बात है।"

वित्त मंत्री ने कहा कि किसी भी राजनीतिक पार्टी को उन लोगों का अपमान करने का हक नहीं है, जिनकी कोशिशों से आर्थिक विकास हो रहा है। उन्होंने कहा, "इसलिए मैं विपक्षी पार्टी से अपील करती हूं कि वे हमारे नागरिकों की कड़ी मेहनत का संज्ञान लें और उनके बारे में बुरा-भला न कहें।"

जब उनसे पूछा गया कि क्या राहुल गांधी की टिप्पणियां सरकार के प्रति आर्थिक समझ की कमी या राजनीतिक दुश्मनी को दर्शाती हैं, तो वित्त मंत्री सीतारमण ने कांग्रेस में मौजूद अर्थशास्त्रियों की ओर इशारा किया।

उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि कांग्रेस पार्टी में कई अर्थशास्त्री हैं, जो एक आर्थिक सलाहकार समूह बनाते हैं। मुझे यकीन है कि वे तथ्यों से इनकार नहीं कर सकते। हालांकि राजनीतिक कारणों से, अगर आप भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में बुरा बोलना चाहते हैं - ऐसे समय में जब लोग वास्तव में अच्छा कर रहे हैं तो हो सकता है कि कुछ अन्य क्षेत्रों में प्रदर्शन को बेहतर बनाया जा सके।"

उन्होंने कहा, "इससे उस समग्र अच्छी कहानी पर कोई असर नहीं पड़ता, जो आज आंकड़ों में दिखाई दे रही है। हर तिमाही में हम अच्छे आंकड़े पेश कर रहे हैं।"

वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा, "उस तथ्य से इनकार करना और उसके विपरीत बात करना, यह बहुत लंबे समय तक नहीं चल सकता।"

उन्होंने कहा कि वह विकास के नवीनतम आंकड़ों से "बेहद खुश" हैं क्योंकि वे लगातार बाहरी चुनौतियों के बीच भारतीय नागरिकों के काम को दर्शाते हैं।

उन्होंने कहा कि 2026-27 वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था में 7.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अनुमान है। मैन्युफैक्चरिंग में 9.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई जबकि फाइनेंशियल और प्रोफेशनल सर्विस सेक्टर में 12.1 प्रतिशत का विस्तार हुआ। विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 700 अरब डॉलर था।

उन्होंने कहा, "ये कोई मामूली आंकड़े नहीं हैं। यह पूरी तरह से उस तरीके की वजह से है जिससे लोगों ने अपनी व्यक्तिगत आकांक्षाओं को पूरा करने के साथ-साथ भारत को 'विकसित भारत 2047' की ओर आगे बढ़ाया है।"

सीतारमण ने कहा कि पहली तिमाही के प्रदर्शन से फाइनेंशियल ईयर के दौरान विकास को मजबूती मिलेगी और उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाली तिमाहियों में भी ऐसे ही आंकड़े बने रह सकते हैं।

उन्होंने मोदी सरकार द्वारा किए गए सुधारों और राज्य सरकारों के सहयोग का भी श्रेय दिया। उन्होंने कहा कि 1,000 से अधिक कानूनों को हटाया गया और लगभग 40,000 नियमों को सरल बनाया गया जबकि सरकार इंडस्ट्री, बिजनेस और व्यापार के साथ लगातार जुड़ी रही।

वित्त मंत्री जी- 20 वित्त मंत्रियों की बैठक के लिए एशविले में हैं। कनाडा और अमेरिका की अपनी यात्रा के दौरान वह भाग लेने वाले देशों के साथ द्विपक्षीय बातचीत और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के साथ बैठकें भी कर रही हैं।

--आईएएनएस

ओपी/पीएम

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