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फ्रांस और कनाडा ने बड़ी ताकतों के खतरे का मुकाबला करने के लिए एकजुटता की अपील की

न्यूयॉर्क, 21 जनवरी (आईएएनएस)। स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच 2026 का आयोजन किया जा रहा है। इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी शामिल हो रहे हैं। दूसरी तरफ, ट्रंप ने फ्रांस के पेरिस में जी7 की आपातकालीन बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया है।
फ्रांस और कनाडा ने बड़ी ताकतों के खतरे का मुकाबला करने के लिए एकजुटता की अपील की

न्यूयॉर्क, 21 जनवरी (आईएएनएस)। स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच 2026 का आयोजन किया जा रहा है। इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी शामिल हो रहे हैं। दूसरी तरफ, ट्रंप ने फ्रांस के पेरिस में जी7 की आपातकालीन बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया है।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने जी7 में शामिल होने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति को निमंत्रण दिया था, जिस पर ट्रंप ने कहा कि नहीं, मैं ऐसा नहीं करूंगा, क्योंकि इमैनुएल बहुत लंबे समय तक वहां नहीं रहने वाले हैं और वहां कोई स्थायित्व नहीं है। इससे पहले उन्होंने फ्रांसीसी राष्ट्रपति के साथ अपनी बातचीत का एक स्क्रीनशॉट ट्रूथ सोशल पर साझा किया था।

ट्रंप के ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के कदम और कनाडा पर कब्जा करने में उनकी नई दिलचस्पी को लेकर वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के नेताओं ने बड़ी ताकतों के दबाव का विरोध करने की अपील की।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि दुनिया के सामने जो अस्थिरता और असंतुलन है, उसका जवाब उभरते देशों, ब्रिक्स और जी20 के साथ पुल बनाना और ज्यादा सहयोग करना है।”

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा, “मिडिल पावर्स को मिलकर काम करना चाहिए क्योंकि अगर आप टेबल पर नहीं हैं, तो आप मेन्यू में हैं। बड़ी ताकतें अब अकेले चलने का जोखिम उठा सकती हैं।”

उन्होंने कहा, “वर्ल्ड ऑर्डर टूट रहा है, एक अच्छी कल्पना का अंत हो रहा है और एक क्रूर सच्चाई की शुरुआत हो रही है, जहां बड़ी ताकतों की भू-राजनीति पर कोई रोक नहीं है।"

ट्रंप या अमेरिका का नाम लिए बिना, उन्होंने कहा, “मैं सीधे कहता हूं, हम एक बदलाव के नहीं, बल्कि बिखरने के बीच में हैं।”

ग्रीनलैंड पर कब्जा का विरोध कर रहे देशों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने अगले महीने फ्रांस और डेनमार्क का समर्थन करने वाले सात दूसरे देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी है।

यूरोपियन यूनियन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने चेतावनी दी कि ट्रंप का एक्शन हमें खतरनाक रास्ते की ओर ले जाएगा, जो सिर्फ उन्हीं दुश्मनों की मदद करेगा, जिन्हें हम रणनीतिक माहौल से बाहर रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

अमेरिकी अधिकारियों ने दावोस में यूरोपियन लोगों को भरोसा दिलाने की कोशिश की। अमेरिकी वित्त विभाग के सचिव स्कॉट बेसेंट ने शांति बनाए रखने की अपील की और कहा कि लेटेस्ट टैरिफ खतरों की तुलना ट्रंप द्वारा अप्रैल में घोषित बड़े टैरिफ से की जा सकती है।

ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जैमीसन ग्रीर ने फोरम में अपने भाषण में कहा कि टैरिफ खतरा बातचीत की एक चाल थी। ट्रंप इस मोर्चे पर जो उम्मीद करते हैं, उसे लेकर बहुत साफ हैं।

वहीं, इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि अमेरिका खुले तौर पर टैरिफ के जरिए यूरोप को कमजोर और अपने अधीन करना चाहता है। इससे नियमों पर आधारित व्यवस्था खत्म हो रही है।

अमेरिका से इतर उन्होंने चीन से खतरे के बारे में भी बात की। मैक्रों ने माना कि चीन की बहुत ज्यादा क्षमता और गलत कामों से पूरे इंडस्ट्रियल और कमर्शियल सेक्टर पर असर पड़ने का खतरा है। उन्होंने यूक्रेन पर रूस के हमले का भी जिक्र किया।

ग्रीनलैंड को ट्रंप की धमकी के बारे में उन्होंने कहा, “फ्रांस और यूरोप राष्ट्रीय संप्रभुता और आजादी, संयुक्त राष्ट्र और उसके चार्टर से जुड़े हुए हैं।”

दूसरे विश्व युद्ध के अनुभवों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सहयोग की जरूरत है और हमने ग्रीनलैंड में आपसी अभ्यास में शामिल होने का फैसला किया है, बिना किसी को धमकी दिए, बल्कि सिर्फ एक साथी और दूसरे यूरोपीय देश, डेनमार्क का समर्थन करते हुए।

--आईएएनएस

केके/एबीएम

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