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चार साल बाद भी बलूचिस्तान के बाढ़ पीड़ितों को नहीं मिला वादा किया गया घर

चार साल बाद भी बलूचिस्तान के बाढ़ पीड़ितों को नहीं मिला वादा किया गया घर
चार साल बाद भी बलूचिस्तान के बाढ़ पीड़ितों को नहीं मिला वादा किया गया घर

माले, 3 अक्टूबर (आईएएनएस)। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में 2022 की विनाशकारी बाढ़ के चार साल बाद भी हजारों बाढ़ प्रभावित परिवार अपने स्थायी घर का इंतजार कर रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, सहायता के लिए 1.34 लाख से अधिक बाढ़ प्रभावित परिवारों का सत्यापन किया गया था, लेकिन विश्व बैंक द्वारा वित्त पोषित इंटीग्रेटेड फ्लड रेजिलिएंस एंड अडैप्टेशन प्रोजेक्ट (आईएफआरएपी) के तहत आवास निर्माण का दायरा करीब 69,000 घरों तक सीमित कर दिया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, विश्व बैंक से अतिरिक्त 180 मिलियन डॉलर की प्रस्तावित वित्तीय सहायता को भी अब हटा दिया गया है। इस राशि का इस्तेमाल आवास कवरेज बढ़ाने के लिए किया जा सकता था, लेकिन इसके बजाय धन को सड़क और सिंचाई जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की ओर मोड़ दिया गया है।

‘मालदीव्स इनसाइट’ की रिपोर्ट में कहा गया है कि इन आंकड़ों ने बाढ़ के बाद किए गए पुनर्वास संबंधी वादों पर सवाल खड़े किए हैं। खासतौर पर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के उस वादे को लेकर सवाल उठ रहे हैं, जिसमें उन्होंने बाढ़ में घर गंवाने वाले परिवारों के लिए आपदा-रोधी मकान उपलब्ध कराने की बात कही थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 की बाढ़ का पानी भले ही काफी पहले उतर चुका है, लेकिन हजारों परिवारों के लिए आपदा अभी खत्म नहीं हुई है। उनके घर या तो क्षतिग्रस्त हैं या पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं। पुनर्निर्माण की प्रक्रिया कई जगह ठप है या उसका स्वरूप बदल दिया गया है। वहीं, सरकारी वादों, फंडिंग और आधिकारिक आंकड़ों को लेकर मतभेदों के बीच अनियमितताओं के आरोप भी सामने आए हैं।

रिपोर्ट में कहा गया कि 2022 की बाढ़ ने पाकिस्तान के बड़े हिस्से को प्रभावित किया था, लेकिन भौगोलिक परिस्थितियों, कमजोर बुनियादी ढांचे और सामाजिक-आर्थिक कमजोरियों के कारण बलूचिस्तान पर इसका विशेष रूप से गंभीर असर पड़ा।

मई 2023 में विश्व बैंक ने इंटीग्रेटेड फ्लड रेजिलिएंस एंड अडैप्टेशन प्रोजेक्ट के लिए 213 मिलियन डॉलर की मंजूरी दी थी। रिपोर्ट के अनुसार, उस समय परियोजना के तहत करीब 35,100 मकान मालिकों को आपदा-रोधी घरों के पुनर्निर्माण के लिए सहायता देने की योजना बनाई गई थी।

रिपोर्ट में बताया गया कि जून 2026 में पाकिस्तान के योजना मंत्री अहसान इकबाल और बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती की अध्यक्षता वाली परियोजना संचालन समिति ने आवास कवरेज को करीब 69,000 घरों तक सीमित करने का फैसला किया। समिति ने अतिरिक्त 180 मिलियन डॉलर की वित्तीय सहायता लेने के प्रस्ताव को भी मंजूरी नहीं दी।

इसके बाद उपलब्ध संसाधनों को सड़क और सिंचाई समेत अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की ओर मोड़ दिया गया। इसका सीधा असर उन सत्यापित परिवारों पर पड़ा है, जिन्हें मूल योजना के तहत आवास सहायता मिलने की उम्मीद थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2023 में जिनेवा में आयोजित सम्मेलन में पाकिस्तान ने बाढ़ के बाद राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए 9 अरब डॉलर से अधिक की अंतरराष्ट्रीय सहायता प्रतिबद्धताएं हासिल की थीं। इसके बाद देश में ऐसी योजनाएं शुरू की गईं, जिनका उद्देश्य बेहतर और अधिक आपदा-रोधी तरीके से पुनर्निर्माण करना था। हालांकि, बलूचिस्तान में प्रशासनिक फैसलों और परियोजना के पुनर्गठन के साथ आपदा-रोधी आवास के पुनर्निर्माण का दायरा लगातार सीमित होता गया है। रिपोर्ट ने कहा कि 2022 की बाढ़ प्राकृतिक आपदा थी, लेकिन अधूरा पुनर्वास अब सरकार की जवाबदेही से जुड़ा सवाल बन गया है।

--आईएएनएस

डीएससी

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