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श्रीलंका में भारत की मदद से बनने वाले 13 पुलों में से पहले पुल की रखी गई आधारशिला

श्रीलंका में भारत की मदद से बनने वाले 13 पुलों में से पहले पुल की रखी गई आधारशिला
श्रीलंका में भारत की मदद से बनने वाले 13 पुलों में से पहले पुल की रखी गई आधारशिला

कोलंबो, 20 सितंबर (आईएएनएस)। श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त संतोष झा ने रविवार को परिवहन, राजमार्ग और शहरी विकास मंत्री बिमल रत्नायके के साथ मिलकर मटाले में मोरागाहाकांडा पुल की आधारशिला रखी। यह भारत की अनुदान सहायता से पूरे श्रीलंका में बनाए जाने वाले 13 स्थायी पुलों में से पहला पुल है।

उच्चायुक्त ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, ''भारत और श्रीलंका मिलकर संपर्क व्यवस्था को और मजबूत तथा टिकाऊ बना रहे हैं! परिवहन, राजमार्ग और शहरी विकास मंत्री बिमल रत्नायके के साथ मटाले में मोरागाहाकांडा पुल की आधारशिला रखकर खुशी हुई। यह भारत की अनुदान सहायता से पूरे श्रीलंका में बनाए जाने वाले 13 स्थायी पुलों में से पहला है।''

उन्होंने आगे कहा, ''यह परियोजना चक्रवात दित्वाह के बाद भारत की 450 मिलियन अमेरिकी डॉलर की पुनर्निर्माण और पुनर्वास सहायता का हिस्सा है। यह आपात स्थिति में किए गए मरम्मत कार्यों से आगे बढ़कर स्थायी और मजबूत बुनियादी ढांचे के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।''

पिछले सप्ताह श्रीलंका के मन्नार स्थित जिला सामान्य अस्पताल में एक नई दो मंजिला दुर्घटना एवं आपातकालीन इकाई के निर्माण का काम भी शुरू हुआ था। इसके लिए भारत सरकार से वित्तीय सहायता मिली है।

इस इकाई की आधारशिला रखने के समारोह में श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके, स्वास्थ्य और जनसंचार मंत्री नलिंदा जयतिस्सा तथा भारत के उच्चायुक्त संतोष झा मौजूद थे। भारतीय उच्चायोग के अनुसार, इस परियोजना के लिए भारत की ओर से 60 करोड़ श्रीलंकाई रुपए का अनुदान दिया जाएगा।

उच्चायुक्त ने एक्स पर लिखा, ''स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना, लोगों की जान बचाना! राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके और स्वास्थ्य एवं जनसंचार मंत्री नलिंदा जयतिस्सा के साथ मन्नार के जिला सामान्य अस्पताल में नई दो मंजिला दुर्घटना एवं आपातकालीन इकाई की आधारशिला रखने के समारोह में शामिल होकर खुशी हुई।''

उन्होंने आगे कहा, ''भारत के 60 करोड़ श्रीलंकाई रुपए के अनुदान से तैयार होने वाली इस परियोजना के तहत इकाई को जरूरी चिकित्सा उपकरण भी उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे आपात स्थिति में महत्वपूर्ण ‘गोल्डन आवर’ के दौरान मरीजों को समय पर इलाज मिल सकेगा।''

उच्चायुक्त ने इस परियोजना को भारत और श्रीलंका के बीच लंबे समय से चली आ रही साझेदारी और दोनों देशों की जन-केंद्रित विकास के प्रति साझा प्रतिबद्धता का सच्चा प्रमाण बताया।

--आईएएनएस

एएमटी

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