छत्तीसगढ़: कुख्यात माओवादी नेता प्रभाकर और उसकी पत्नी को 7 साल की जेल की सजा
कांकेर, 8 सितंबर (आईएएनएस)। छत्तीसगढ़ के कांकेर में एक अतिरिक्त जिला और सत्र अदालत ने 2015 में सुरक्षा बलों पर हुए हमले से जुड़े एक मामले में पांच माओवादियों को सजा सुनाई है। इनमें नॉर्थ बस्तर का कुख्यात नेता प्रभाकर और उसकी पत्नी राजे कांगे भी शामिल हैं।
यह पहली बार है जब इस इलाके को माओवादी प्रभाव से काफी हद तक मुक्त कराने के बाद किसी बड़े माओवादी कैडर को अदालत ने सजा सुनाई है।
प्रभाकर और उनकी पत्नी राजे कांगे, दोनों को सात-सात साल की जेल की सजा सुनाई गई। इस मामले में शामिल तीन अन्य माओवादियों को पांच-पांच साल की जेल की सजा दी गई।
यह मामला 2015 का है, जब माओवादियों के एक समूह ने सुरक्षा बलों की उस टीम पर हमला किया था जो कोरार इलाके में सर्च ऑपरेशन चला रही थी।
इस घटना के बाद, पुलिस ने प्रभाकर, राजे कांगे और उनके साथियों के खिलाफ मामला दर्ज किया।
कई सालों तक फरार रहने के बाद, प्रभाकर को 2024 में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इसके कुछ ही समय बाद उनकी पत्नी राजे कांगे को भी हिरासत में ले लिया गया।
इसके बाद उनसे लंबी पूछताछ की गई और फिर जांचकर्ताओं ने ठोस सबूतों के साथ अदालत में विस्तृत चार्जशीट दाखिल की।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि प्रभाकर और राजे कांगे पर कुल मिलाकर लगभग 60 आपराधिक मामले दर्ज हैं।
छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रभाकर पर 25 लाख रुपए और उनकी पत्नी पर 8 लाख रुपए का इनाम घोषित किया था।
कोरार मुठभेड़ में इन दोनों नेताओं की मौजूदगी और सक्रिय भूमिका को साबित करने वाले ठोस सबूत अदालत के सामने पेश किए गए।
इन सबूतों के आधार पर अदालत ने सभी आरोपियों को दोषी ठहराया और सजा सुनाई।
अधिकारियों ने अदालत के इस फैसले को अहम बताया। उन्होंने कहा कि इलाके में माओवादी गतिविधियों में भारी कमी आने के बाद यह पहली बार है जब इस क्षेत्र के किसी बड़े माओवादी कैडर को दोषी ठहराकर सजा सुनाई गई है।
इस फैसले से बचे हुए माओवादियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया और मजबूत होगी। साथ ही, इससे यह संदेश भी जाएगा कि सुरक्षा बलों पर हमले में शामिल लोगों को अदालत के जरिए सजा दिलाई जाएगी।
--आईएएनएस
डीकेएम/डीएससी

