भारतीय मूल के स्टोर मालिक को गिरफ्तार कर अमेरिका भेजा गया, छह लाख डॉलर से ज्यादा की धोखाधड़ी का आरोप
वाशिंगटन, 16 अक्टूबर (आईएएनएस)। एफबीआई की ‘मोस्ट वांटेड फ्रॉडस्टर्स’ सूची में शामिल भारतीय मूल के किराना कारोबारी मनजीत सिंह बेदी को भारत से अमेरिका प्रत्यर्पित किया गया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार उन पर अमेरिकी खाद्य सहायता कार्यक्रम में कम से कम 6 लाख डॉलर की धोखाधड़ी करने का आरोप है। अब उन्हें इन आरोपों का सामना करने के लिए अमेरिका में अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा।
एफबीआई निदेशक काश पटेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट में लिखा, "एफबीआई के मोस्ट वांटेड फ्रॉडस्टर्स में शामिल मंजीत सिंह बेदी, जिन्हें सितंबर में भारत में गिरफ्तार किया गया था। उन्हें वापस अमेरिका भेजा गया है।
64 वर्षीय मंजीत सिंह बेदी अमेरिका के वॉशिंगटन राज्य के केंट शहर के निवासी हैं। अमेरिकी न्याय विभाग के मुताबिक, उन्हें संघीय एजेंटों के हवाले किया गया और 14 अक्टूबर की रात उन्हें अमेरिका के वेस्टर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ वॉशिंगटन लाया गया। उनकी शुक्रवार को टैकोमा स्थित अमेरिकी जिला अदालत में पेशी होनी है।
काश पटेल ने कहा, "एफबीआई सिएटल और अमेरिका तथा भारत की हमारी कानून प्रवर्तन एजेंसियों का धन्यवाद, जिन्होंने बेदी को वापस लाने में मदद की।"
उन्होंने बताया कि विदेशी एजेंसियों के सहयोग से अमेरिका ने पिछले 20 महीनों में 260 से अधिक वांछित आरोपियों को वापस लाने में सफलता हासिल की है, पिछली इसी तरह की अवधि की तुलना में लगभग 70 प्रतिशत अधिक है। पटेल ने कहा कि तीन महीने पहले एफबीआई की नई 'मोस्ट वांटेड फ्रॉडस्टर्स' सूची जारी होने के बाद पकड़े गए छह प्रमुख आरोपियों में बेदी भी शामिल हैं।
एफबीआई के अनुसार, "अप्रैल में 'वायर फ्रॉड' के आरोप तय होने के बाद बेदी भारत भाग गए थे।"
न्याय विभाग ने बताया कि 22 अप्रैल को बेदी ने अदालत में खुद को निर्दोष बताया था, लेकिन एक सप्ताह के भीतर भारत चले गए। तीन सितंबर को उनका नाम एफबीआई की मोस्ट वांटेड फ्रॉडस्टर्स सूची में जोड़ा गया, जिसके बाद भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
कार्यवाहक अमेरिकी अटॉर्नी नील फ्लॉयड ने कहा, "मैं एफबीआई और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के काम की सराहना करता हूं, जिन्होंने बेदी को न्याय का सामना करने के लिए अमेरिका वापस लाना सुनिश्चित किया। हम अदालत से अनुरोध करेंगे कि मुकदमे तक उन्हें हिरासत में रखा जाए, क्योंकि उन्होंने पहले ही भागने की इच्छा और क्षमता दोनों दिखा दी हैं।"
अभियोग के अनुसार, बेदी द एशियन ग्रोसरी स्टोर नाम की दुकान के मालिक और संचालक थे। यह दुकान फरवरी 2024 में सप्लीमेंटल न्यूट्रिशन असिस्टेंस प्रोग्राम (एसएनएपी) के लाभ स्वीकार करने के लिए अधिकृत हुई थी।
अभियोजकों का आरोप है कि मार्च 2024 से बेदी ने एसएनएपी लाभ पाने वाले लोगों को उनके इलेक्ट्रॉनिक कार्ड पर मौजूद राशि के बदले नकद पैसे देने शुरू कर दिए। कथित तौर पर वे एक डॉलर के लाभ के बदले केवल 50 सेंट नकद देते थे और बाकी रकम खुद रख लेते थे।
जांच एजेंसियों का कहना है कि इस तरीके से उन्होंने ऐसे खाद्य उत्पादों के नाम पर कम से कम 6 लाख डॉलर हासिल कर लिए, जो वास्तव में कभी बेचे ही नहीं गए। जून 2025 में इस कथित धोखाधड़ी का खुलासा हुआ। यदि आरोप साबित होते हैं, तो वायर फ्रॉड और एसएनएपी लाभ धोखाधड़ी दोनों मामलों में अधिकतम 20 साल तक की जेल और 2.5 लाख डॉलर तक का जुर्माना हो सकता है।
--आईएएनएस
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