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तमिलनाडु : चेक डैम की मरम्मत की मांग तेज, किसानों ने कहा-दो झीलें सूखी, सिंचाई और भूजल पर पड़ा असर

तमिलनाडु : चेक डैम की मरम्मत की मांग तेज, किसानों ने कहा-दो झीलें सूखी, सिंचाई और भूजल पर पड़ा असर
तमिलनाडु : चेक डैम की मरम्मत की मांग तेज, किसानों ने कहा-दो झीलें सूखी, सिंचाई और भूजल पर पड़ा असर

सेलम, 26 जुलाई (आईएएनएस)। तमिलनाडु के सेलम जिले में किसानों ने जल संसाधन विभाग और सेलम सिटी म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन से थिरुमनिमुथारु नदी पर बने क्षतिग्रस्त चेक डैम की जल्द मरम्मत कराने की मांग की है। किसानों का कहना है कि चेक डैम खराब होने के कारण दो प्रमुख सिंचाई झीलों तक पानी पहुंचना लगभग बंद हो गया है। यही वजह है कि अच्छी बारिश होने के बावजूद ये झीलें सूखी पड़ी हैं और खेती पर इसका सीधा असर पड़ रहा है।

किसानों के अनुसार, कोंडलमपट्टी के पास नदी पर बना चेक डैम क्षतिग्रस्त होने से नेइक्कारपट्टी स्थित कोट्टानाथन झील और इसके बाद नीचे की ओर स्थित पूलावरी झील तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। वर्षों से ये दोनों झीलें आसपास के गांवों में सिंचाई और भूजल स्तर बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती रही हैं।

बताया गया कि थिरुमनिमुथारु नदी की शुरुआत शेवरॉय पहाड़ियों से होती है। यह नदी सेलम शहर से होकर गुजरती है और आगे चलकर कावेरी नदी में मिल जाती है। पहले कोंडलमपट्टी का चेक डैम पानी रोककर अतिरिक्त पानी को नेइक्कारपट्टी हेड स्लुइस के जरिए कोट्टानाथन झील तक पहुंचाता था। इसके बाद अतिरिक्त पानी पूलावरी झील में जाता था, जिससे खेती के लिए लगातार पानी मिलता था और भूजल भी रिचार्ज होता था।

किसानों का आरोप है कि सेलम सिटी म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन की थिरुमनिमुथारु रिवर ब्यूटीफिकेशन परियोजना के दौरान चेक डैम को आंशिक नुकसान पहुंचा। परियोजना के तहत नदी के किनारे रिटेनिंग वॉल बनाई गई और पानी के बहाव में रुकावटें हटाई गईं, लेकिन क्षतिग्रस्त चेक डैम की मरम्मत नहीं कराई गई। इससे नदी की पारंपरिक सिंचाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई।

हालांकि 2012 में पानी के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए नेइक्कारपट्टी हेड स्लुइस बनाया गया था, लेकिन किसानों का कहना है कि चेक डैम पानी रोकने में सक्षम नहीं है। इसलिए पानी सीधे नदी के रास्ते आगे निकल जाता है और दोनों झीलों तक पहुंचाने वाली आपूर्ति नहर में प्रवेश नहीं कर पाता।

किसानों ने यह भी बताया कि आपूर्ति नहर और नदी के कई हिस्सों में झाड़ियां और घनी वनस्पति उग आई हैं, जिससे पानी का प्रवाह और बाधित हो गया है। इसके अलावा, कई स्थानों पर नदी में ठहरा हुआ पानी और बिना शोधन वाला गंदा पानी छोड़े जाने से जल गुणवत्ता भी खराब हो रही है।

किसानों का कहना है कि यदि चेक डैम की मरम्मत कर दी जाए और आपूर्ति नहर की सफाई कराई जाए, तो सिंचाई व्यवस्था फिर से पटरी पर लौट सकती है, भूजल स्तर में सुधार होगा और बारिश का पानी बेकार बहने के बजाय खेती के काम आ सकेगा।

वहीं, सेलम के जल संसाधन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नेइक्कारपट्टी आपूर्ति नहर के जीर्णोद्धार का प्रस्ताव राज्य सरकार की बजट घोषणा के तहत पहले ही भेजा जा चुका है। परियोजना का विस्तृत अनुमान तैयार कर प्रशासनिक मंजूरी के लिए भेज दिया गया है। विभाग को उम्मीद है कि मंजूरी और आवश्यक धनराशि मिलते ही मरम्मत और नवीनीकरण का काम शुरू कर दिया जाएगा।

--आईएएनएस

वीकेयू/पीएम

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