अथिकडवु-अविनाशी परियोजना के लिए जल आपूर्ति का स्थायी और पारदर्शी ढांचा बनाने की मांग
ईरोड, 21 जून (आईएएनएस)। लोअर भवानी परियोजना (एलबीपी) पर निर्भर किसानों ने जिला प्रशासन से अथिकडवु-अविनाशी परियोजना के लिए जल आपूर्ति का पारदर्शी और स्थायी तंत्र स्थापित करने की मांग की है। किसानों ने चिंता जताई है कि वर्तमान में परियोजना के लिए पानी किस प्रकार मोड़ा जा रहा है, इस बारे में स्पष्टता नहीं है।
तमिलनाडु सरकार की महत्वाकांक्षी अथिकडवु-अविनाशी परियोजना का उद्देश्य ईरोड, तिरुप्पुर और कोयंबटूर जिलों में जलाशयों को पुनर्जीवित करना और भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देना है। इस योजना के तहत 1,045 तालाबों, झीलों और जलाशयों को पाइपलाइन नेटवर्क के माध्यम से जोड़ा गया है, ताकि अतिरिक्त जल को सूखा प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाया जा सके।
परियोजना के तहत कई जलाशयों में पानी पहुंचाए जाने के बीच एलबीपी किसानों ने मांग की है कि भवानीसागर बांध पर निर्भर अन्य सिंचाई प्रणालियों की तरह इस योजना के लिए भी जल आवंटन की स्पष्ट व्यवस्था बनाई जाए।
लोअर भवानी आयाकट भूमि स्वामी संघ के अध्यक्ष एस. पेरियासामी ने कहा कि किसान परियोजना के विरोधी नहीं हैं, लेकिन पारंपरिक सिंचाई प्रणालियों के हितों की सुरक्षा जरूरी है।
उन्होंने कहा, “हम अथिकडवु-अविनाशी परियोजना का समर्थन करते हैं और इसके लिए पानी दिए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन पानी तभी दिया जाना चाहिए जब मौजूदा सिंचाई प्रणालियों की जरूरतें पूरी होने के बाद अतिरिक्त जल उपलब्ध हो। वर्तमान में भवानीसागर बांध का जलस्तर कम है, इसलिए किसानों के मन में यह सवाल है कि परियोजना को पानी कहां से दिया जा रहा है।”
पेरियासामी ने बताया कि लोअर भवानी परियोजना, कलिंगरायन नहर, थडापल्ली नहर और अरक्कनकोट्टई नहर के लिए पहले से ही जल वितरण की स्पष्ट व्यवस्था मौजूद है। उन्होंने मांग की कि अथिकडवु-अविनाशी योजना के लिए भी इसी तरह का ढांचा बनाया जाए और जल निकासी स्वीकृत 1.5 टीएमसी की सीमा के भीतर ही रखी जाए।
किसानों ने अपनी चिंताएं जिला प्रशासन के समक्ष रखी हैं और परियोजना के लिए जल मोड़ने संबंधी दिशा-निर्देशों पर स्पष्ट जानकारी मांगी है।
हालांकि, जल संसाधन विभाग (डब्ल्यूआरडी) के अधिकारियों ने किसानों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वर्तमान में अथिकडवु-अविनाशी परियोजना के लिए भवानीसागर बांध से पानी नहीं लिया जा रहा है।
परियोजना से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हाल की बारिश के कारण स्थानीय जलग्रहण क्षेत्रों से भवानी नदी में अतिरिक्त जल प्रवाह हुआ है। वर्तमान में परियोजना में केवल इसी अतिरिक्त पानी का उपयोग किया जा रहा है, जो अन्यथा कावेरी नदी में बह जाता।
अधिकारी ने कहा, “लोअर भवानी परियोजना, कलिंगरायन, थडापल्ली और अरक्कनकोट्टई सिंचाई प्रणालियों की जरूरतें पूरी होने के बाद अधिकतम 1.5 टीएमसी अतिरिक्त पानी अथिकडवु परियोजना को दिया जा सकता है। फिलहाल हम केवल नदी के अतिरिक्त प्रवाह का उपयोग कर रहे हैं, बांध के पानी का नहीं।”
डब्ल्यूआरडी के अनुसार, हाल ही में भवानी नदी में 298 क्यूसेक अतिरिक्त जल प्रवाह दर्ज किया गया, जिसमें से 180 क्यूसेक पानी अथिकडवु-अविनाशी परियोजना की ओर मोड़ा गया। विभाग ने स्पष्ट किया कि यह योजना स्वीकृत नियमों के तहत संचालित हो रही है और इससे मौजूदा सिंचाई प्रणालियों के अधिकारों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है।
--आईएएनएस
एसएके/पीएम

