तिरुवनंतपुरम निगम में फर्जी हस्ताक्षर विवाद गहराया, भाजपा मेयर और सीपीआई(एम) पार्षद के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज
तिरुवनंतपुरम, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)। तिरुवनंतपुरम नगर निगम में कथित फर्जी हस्ताक्षरों को लेकर चल रहा विवाद नया मोड़ ले चुका है। भाजपा के मेयर वी.वी. राजेश ने सीपीआई(एम) पार्षद एस.पी. दीपक पर हस्ताक्षर जालसाजी का आरोप लगाया है और शुक्रवार को पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की घोषणा की है। इस जवाबी आरोप के बाद हस्ताक्षर विवाद भाजपा-शासित नगर निगम परिषद और सीपीआई(एम) के नेतृत्व वाले विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप की लड़ाई में बदल गया है।
शुरुआत में यह मामला मेयर के खिलाफ लगाए गए आरोपों से शुरू हुआ था, लेकिन अब शिकायतकर्ता पर ही सवाल खड़े हो गए हैं। दोनों पक्ष अपनी-अपनी बात को सही साबित करने में जुटे हैं।
दीपक ने पहले राजेश और पार्षद आर. सुगाथन पर कॉर्पोरेशन के अटेंडेंस रिकॉर्ड में हेरफेर करने का आरोप लगाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि 26 फरवरी, 11 मार्च और 27 अप्रैल को हुई काउंसिल की बैठकों में सुगाथन की मौजूदगी दिखाने के लिए उनके जाली हस्ताक्षर किए गए थे, जबकि उस समय वे केरल एंटी-सोशल एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट (केएएपीए) के तहत मामला दर्ज होने के बाद फरार चल रहे थे।
इस शिकायत के बाद म्यूजियम पुलिस ने मामला दर्ज किया, जिसमें राजेश को पहला आरोपी, सुगाथन को दूसरा आरोपी और कॉर्पोरेशन के सेक्रेटरी को तीसरा आरोपी बनाया गया। हालांकि, राजेश ने इन आरोपों को खारिज कर दिया और दावा किया कि सुगाथन तीनों बैठकों में शामिल हुए थे।
उन्होंने कहा कि कॉर्पोरेशन के आधिकारिक फोटोग्राफर ने बैठक में सुगाथन की तस्वीरें ली थीं। उन्होंने बताया कि तारीख और समय की जानकारी वाली डिजिटल तस्वीरें भी पुलिस को सौंप दी गई थीं।
मेयर ने आगे बताया कि दीपक ने खुद सोशल मीडिया पर एक लाइव वीडियो और तस्वीरें शेयर की थीं, जिनमें 27 अप्रैल की बैठक में सुगाथन को देखा जा सकता है। उन्होंने सीपीआई (एम) पार्षद पर आरोप लगाया कि उन्होंने अपने ही सोशल मीडिया पोस्ट को देखे बिना पुलिस से संपर्क किया।
अब राजेश ने पासा पलटते हुए आरोप लगाया है कि दीपक ने कॉर्पोरेशन काउंसिल की विशेष बैठक बुलाने के लिए एलडीएफ पार्षदों की ओर से सौंपे गए पत्र में हस्ताक्षरों में हेरफेर की है। मेयर ने कहा कि हस्ताक्षरों में साफ तौर पर गड़बड़ियां थीं और उन्होंने घोषणा की कि वह म्यूजियम पुलिस में शिकायत दर्ज कराएंगे।
इस नए आरोप ने हस्ताक्षरों को लेकर चल रहे विवाद में एक नया मोर्चा खोल दिया है। अब पुलिस को धोखाधड़ी के आरोपों से जुड़े दोनों पक्षों के दावों की जांच करनी होगी, क्योंकि दोनों ही पक्ष एक-दूसरे पर गलत काम करने का आरोप लगा रहे हैं।
यह टकराव और भी अहम राजनीतिक मुद्दा बन गया है क्योंकि दिसंबर 2025 में भाजपा ने पहली बार कॉर्पोरेशन में सत्ता हासिल करके इतिहास रचा था और सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाले चार दशक से ज्यादा पुराने शासन को खत्म किया था।
कड़वी राजनीतिक लड़ाई से पहले से ही बंटी हुई इस काउंसिल के लिए अब सवाल यह है कि पुलिस की जांच में किसके हस्ताक्षर सही साबित होंगे और किसके आरोप गलत साबित होंगे।
--आईएएनएस
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