पीआईबी का फैक्ट चेक: गृह मंत्रालय के अधिकारियों के राहुल-प्रियंका से संपर्क का दावा भ्रामक
नई दिल्ली, 6 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) ने मंगलवार को एक फैक्ट चेक जारी किया और सोशल मीडिया पर उन पोस्ट को गुमराह करने वाला बताया, जिनमें दावा किया गया था कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और सांसद प्रियंका गांधी से संपर्क किया था, ताकि निर्वाचन सदन के बाहर बने गतिरोध को खत्म किया जा सके।
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन सरकारी सूचना एजेंसी पीआईबी ने कहा, "भ्रामक दावों और अपुष्ट जानकारी के बहकावे में न आएं। केवल सत्यापित और विश्वसनीय स्रोतों से मिली जानकारी पर ही भरोसा करें।"
पीआईबी की तरफ से जारी फैक्ट चेक के साथ एक 'पत्रकार' और एक न्यूज चैनल की वेबसाइट के सोशल मीडिया पोस्ट के स्क्रीनशॉट भी दिखाए गए।
ये 'झूठे दावे' सोशल मीडिया पर विपक्ष के सांसदों के विरोध-प्रदर्शन और धरने को लेकर किए गए थे। ये विरोध भारत के चुनाव आयोग के दफ्तर के पास हुआ था। साथ ही, राहुल गांधी की अगुवाई में सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मिलने के लिए निर्वाचन सदन में घुसने की कोशिश की थी, जो नाकाम रही।
इससे पहले दिन में राहुल गांधी ने लोकसभा और राज्यसभा के 300 विपक्षी सांसदों (जिनमें बीजद के सांसद भी शामिल थे) के साथ संसद से निर्वाचन सदन तक मार्च किया। यह दूरी लगभग एक किलोमीटर थी।
आयोग के दफ्तर से करीब 50 गज की दूरी पर गांधी ने पत्रकारों से कहा, "हम सीईसी और चुनाव आयुक्तों से मिलना चाहते थे, लेकिन हमें रोक दिया गया और वहां जाने से मना कर दिया गया।"
सुरक्षाकर्मियों द्वारा निर्वाचन सदन की ओर मार्च करने से रोके जाने के बाद राहुल गांधी, वायनाड की सांसद प्रियंका गांधी और अन्य नेता ईसीआई दफ्तर के पास आकाशवाणी भवन के अंदर धरने पर बैठ गए।
हाई-सिक्योरिटी जोन में हुए इस विरोध-प्रदर्शन की आलोचना भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने की। उन्होंने पूछा कि क्या विपक्षी पार्टियां अराजकता फैलाने की कोशिश कर रही हैं।
आईएएनएस से बात करते हुए रविशंकर प्रसाद ने कहा, "दिल्ली में बैठकर उन्होंने यहां एक संवेदनशील इलाके को घेर लिया है और कह रहे हैं कि (सीईसी) ज्ञानेश कुमार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और (गृह मंत्री) अमित शाह के चंगुल में हैं। यह शर्मनाक है। मैं इसकी निंदा करता हूं।"
भाजपा सांसद ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की भी आलोचना की, जिन्होंने सभी चुनाव रद्द करने और बैलेट पेपर का इस्तेमाल करके दोबारा चुनाव कराने की मांग की। यही उनका मकसद है और वे यही चाहते हैं। वे निष्पक्ष चुनाव नहीं जीत सकते। अब वे बूथों पर कब्जा करना चाहते हैं। वे दबाव डालकर चुनाव जीतना चाहते हैं। वे दलितों और गरीबों को वोट देने से रोकना चाहते हैं।
--आईएएनएस
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