Samachar Nama
×

बुजुर्ग आबादी का संकट: चीन के फर्जी अस्पतालों में इंश्योरेंस फ्रॉड उजागर

नई दिल्ली/बीजिंग, 7 फरवरी (आईएएनएस)। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, चीन में फर्जी मानसिक अस्पताल और इंश्योरेंस फ्रॉड में बढ़ोतरी से यह पता चलता है कि देश बुजुर्ग आबादी से निपटने में काफी संघर्ष कर रहा है।
बुजुर्ग आबादी का संकट: चीन के फर्जी अस्पतालों में इंश्योरेंस फ्रॉड उजागर

नई दिल्ली/बीजिंग, 7 फरवरी (आईएएनएस)। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, चीन में फर्जी मानसिक अस्पताल और इंश्योरेंस फ्रॉड में बढ़ोतरी से यह पता चलता है कि देश बुजुर्ग आबादी से निपटने में काफी संघर्ष कर रहा है।

द डिप्लोमैट ने हाल ही में एक घोटाले का फाश किया, जिसमें निजी मनोरोग अस्पताल सरकार से बड़ी मात्रा में मेडिकल फंड हड़पने के लिए गलत बयानी कर मरीजों को भर्ती कर रहे थे।

बीजिंग न्यूज का हवाला देते हुए, रिपोर्ट में शियांगयांग और यिचांग शहरों में दर्जनों साइकियाट्रिक अस्पतालों का जिक्र किया गया है, जो या तो कम फीस पर या मुफ्त में इनपेशेंट भर्ती की सुविधा देते हैं।

यह ऐसे समय में हुआ है जब चीन में इलाज आमतौर पर मेडिकल इंश्योरेंस प्रोग्राम के तहत कवर होता है, जहां मरीजों से आमतौर पर उनके इलाज की लागत का एक निश्चित प्रतिशत भुगतान करने की उम्मीद की जाती है।

हालांकि, एक अंडरकवर रिपोर्टर ने प्रति दिन प्रति मरीज लगभग 140 युआन के इलाज को रिकॉर्ड किया और उसमें से अधिकतर का सरकारी मेडिकल इंश्योरेंस से पुर्नभुगतान क्लेम किया।

जबकि इनमें से कुछ में मरीजों की संख्या नाममात्र की थी। कुछ में 100 से ज्यादा थे। मरीज मुख्य रूप से शराबी और बुजुर्ग थे जो मुफ्त खाने और रहने की उम्मीद में आए थे।

इसके अलावा, रिपोर्टर ने अस्पतालों के हालात बेहद खराब पाए, जहां शारीरिक और मौखिक दुर्व्यवहार आम था। मरीजों को अस्पताल की सफाई करने, दूसरे मरीजों को नहलाने और दूसरे छोटे-मोटे काम करने के लिए भी मजबूर किया जाता था।

खास बात यह है कि कुछ अस्पतालों ने मरीजों के भर्ती होने के बाद उन्हें छोड़ना मुश्किल कर दिया था, और यह कई साल तक चलता।

रिपोर्ट में कहा गया है, "यह चीन की मौजूदा बुजुर्गों की देखभाल प्रणाली की सीमाओं को उजागर करता है, जो यह मानती है कि ज्यादातर बुजुर्गों की देखभाल उनके परिवार वाले घर पर करेंगे।"

रिपोर्ट में कहा गया है, "घोटाले के लिए भर्ती किए गए कई बुजुर्ग ग्रामीण इलाकों से आए थे, जहां पेंशन बहुत कम है और सरकारी सेवाएं कमजोर हैं। इसके अलावा, अनगिनत गांव खाली हो गए हैं क्योंकि काम करने की उम्र के लोग दूसरी जगहों पर काम ढूंढ रहे हैं, जिससे कई बुजुर्ग अपने परिवारों से अलग-थलग पड़ गए हैं।"

--आईएएनएस

केआर/

Share this story

Tags