Samachar Nama
×

एल नीनो से बढ़ सकता है महंगाई का दबाव, खाद्यान्न भंडार मजबूत स्थिति में: आर्थिक समीक्षा

नई दिल्ली, 30 मई (आईएएनएस)। वित्त मंत्रालय की मई माह की 'मासिक आर्थिक समीक्षा' में शनिवार को कहा गया कि यदि जून में एल नीनो के विकसित होने के कारण बारिश सामान्य से कम रहती है, तो इसका असर खाद्य महंगाई, ग्रामीण मांग और समग्र आर्थिक वृद्धि पर तेजी से दिखाई दे सकता है। इससे पहले से ऊंची वैश्विक ऊर्जा कीमतों के कारण बने महंगाई के दबाव और बढ़ सकते हैं।
एल नीनो से बढ़ सकता है महंगाई का दबाव, खाद्यान्न भंडार मजबूत स्थिति में: आर्थिक समीक्षा

नई दिल्ली, 30 मई (आईएएनएस)। वित्त मंत्रालय की मई माह की 'मासिक आर्थिक समीक्षा' में शनिवार को कहा गया कि यदि जून में एल नीनो के विकसित होने के कारण बारिश सामान्य से कम रहती है, तो इसका असर खाद्य महंगाई, ग्रामीण मांग और समग्र आर्थिक वृद्धि पर तेजी से दिखाई दे सकता है। इससे पहले से ऊंची वैश्विक ऊर्जा कीमतों के कारण बने महंगाई के दबाव और बढ़ सकते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि आगामी खरीफ सीजन के लिए कृषि क्षेत्र की संभावनाएं निकट अवधि में राहत देने वाली हैं, लेकिन मध्यम अवधि में कुछ चिंताएं भी बनी हुई हैं।

समीक्षा के अनुसार, सकारात्मक पक्ष यह है कि खाद्यान्न का बफर स्टॉक मजबूत स्थिति में है। अप्रैल 2026 के अंत तक भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) और राज्य एजेंसियों के पास चावल और गेहूं का कुल भंडार 817.53 लाख टन था। वहीं, जलाशयों में जल भंडारण पिछले 10 वर्षों के औसत का 123.86 प्रतिशत रहा, जो मानसून से पहले एक मजबूत शुरुआती स्थिति प्रदान करता है।

गर्मी की फसलों की बुवाई का क्षेत्र भी बढ़ा है। इस वर्ष 83.08 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 80.01 लाख हेक्टेयर था।

इस संदर्भ में यह महत्वपूर्ण है कि भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने संकेत दिया है कि 2026 के मानसून सीजन के दौरान ईएनएसओ-न्यूट्रल स्थिति से एल नीनो की स्थिति विकसित हो सकती है। विभाग ने कुल वर्षा को दीर्घकालिक औसत (एलपीए) के लगभग 92 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। साथ ही, अन्य जलवायु कारकों के साथ एल नीनो की परस्पर क्रिया के आधार पर वर्षा में कमी की भी काफी संभावना बताई गई है।

समीक्षा में कहा गया है कि अतीत में एल नीनो और कम वर्षा वाले वर्षों के दौरान चावल का उत्पादन अपेक्षाकृत स्थिर रहा, क्योंकि प्रमुख उत्पादक राज्यों में सिंचाई की बेहतर व्यवस्था मौजूद है। हालांकि, दलहन और तिलहन फसलें मौसम के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं और मुख्य रूप से वर्षा-आधारित क्षेत्रों में उगाई जाती हैं। ऐसे में एल नीनो के दौरान इनके रकबे, उत्पादकता और कुल उत्पादन में गिरावट देखी गई है।

इसके अलावा, चारे की कमी, दूध उत्पादन में गिरावट और पशु आहार की बढ़ती लागत के कारण पशुपालन और डेयरी क्षेत्र पर भी दबाव बढ़ सकता है।

दूसरी ओर, मांग की स्थिति अभी भी मजबूत बनी हुई है। घरेलू ऑटोमोबाइल बिक्री में दोपहिया, तिपहिया, यात्री वाहन, वाणिज्यिक वाहन और ट्रैक्टर सहित सभी श्रेणियों में अच्छी वृद्धि दर्ज की गई है।

हालांकि, घरेलू हवाई यात्री यातायात में सालाना आधार पर 1.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो मांग में कुछ नरमी का संकेत देती है। वित्त मंत्रालय के दस्तावेज में कहा गया है कि यदि मानसून सामान्य से कमजोर रहता है और आर्थिक गतिविधियों में धीमापन आता है, तो आने वाले महीनों में कुल उपभोक्ता मांग पर दबाव बढ़ सकता है।

--आईएएनएस

डीबीपी

Share this story

Tags