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ईडी ने एलआईसी चेक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी को साढ़े तीन साल की सजा दिलाई

ईडी ने एलआईसी चेक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी को साढ़े तीन साल की सजा दिलाई
ईडी ने एलआईसी चेक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी को साढ़े तीन साल की सजा दिलाई

नई दिल्ली, 16 सितंबर (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के लखनऊ जोनल ऑफिस ने एलआईसी चेक को धोखाधड़ी से तैयार करने और भुनाने से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दूसरे आरोपी समीर जोशी को दोषी ठहराए जाने में सफलता हासिल की है।

लखनऊ की पीएमएलए स्पेशल कोर्ट ने 15 सितंबर को अपने फैसले में जोशी को 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (पीएमएलए), 2002 की धारा 3 और धारा 4 के तहत दोषी ठहराया।

कोर्ट ने उन्हें तीन साल और छह महीने की सख्त कैद की सजा सुनाई और 20,000 रुपए का जुर्माना लगाया। जुर्माना न भरने पर उन्हें अतिरिक्त छह महीने की जेल काटनी होगी।

ईडी की जांच सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। यह एफआईआर लगभग 54.23 लाख रुपए के 29 फर्जी एलआईसी चेक बनाने और कैश कराने से जुड़ी धोखाधड़ी के मामले में दर्ज की गई थी।

पीएमएलए के तहत हुई जांच से पता चला कि जोशी को अलग-अलग बैंक खातों के जरिए यह रकम मिली थी और बाद में उन्होंने इस पैसे को कारोबार समेत कई कामों में खर्च कर दिया या इस्तेमाल कर लिया।

जांच के दौरान, ईडी ने 14,000 रुपए की रकम की पहचान की, जो अपराध से हासिल हुई थी और जोशी से जुड़ी थी। इसके बाद, 17 मार्च 2018 के 'प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर नंबर 03/2018' के जरिए उनकी पैतृक संपत्ति के मूल्य के बराबर यह रकम जब्त (अटैच) कर ली गई।

बाद में, पीएमएलए की 'एडजूडिकेटिंग अथॉरिटी' ने 6 सितंबर 2018 के आदेश के जरिए 'ओरिजिनल कंप्लेंट नंबर 924/2018' में इस अटैचमेंट की पुष्टि की।

खास बात यह है कि जोशी को दोषी ठहराते हुए स्पेशल कोर्ट ने पीएमएलए, 2002 की धारा 8(5) के तहत अपराध से हासिल 14,000 रुपए के बदले अटैच की गई संपत्ति को केंद्र सरकार के पक्ष में जब्त करने का भी निर्देश दिया।

इस बीच, सीबीआई कोर्ट ने इस मामले में मूल अपराध के लिए समीर जोशी को पहले ही दोषी ठहरा दिया है। 7 अगस्त को सुनाए गए फैसले में सीबीआई कोर्ट ने उन्हें एक साल और नौ महीने की जेल और जुर्माने की सजा सुनाई थी।

--आईएएनएस

एससीएच/एबीएम

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