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बंगाल: ईडी ने 'कॉनकास्ट स्टील एंड पावर' मामले में 31.30 करोड़ रुपए की संपत्तियां जब्त कीं

बंगाल: ईडी ने 'कॉनकास्ट स्टील एंड पावर' मामले में 31.30 करोड़ रुपए की संपत्तियां जब्त कीं
बंगाल: ईडी ने 'कॉनकास्ट स्टील एंड पावर' मामले में 31.30 करोड़ रुपए की संपत्तियां जब्त कीं

कोलकाता, 2 जुलाई (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के कोलकाता क्षेत्रीय कार्यालय ने कॉनकास्ट स्टील एंड पावर लिमिटेड और अन्य के खिलाफ मामले में मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने इस मामले में 31.30 करोड़ रुपए के कुल बाजार मूल्य वाली 20 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है।

केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा गुरुवार को जारी एक बयान में कहा गया है कि जब्त की गई संपत्तियों में पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली में स्थित आवासीय संपत्तियां, व्यावसायिक इकाइयां, फ्लैट और जमीन के टुकड़े शामिल हैं।

ये संपत्तियां संजय कुमार सुरेका के स्वामित्व और नियंत्रण में थीं और अपराध की आय को छिपाने के उद्देश्य से या तो उनके स्वयं के नाम पर या उनके रिश्तेदारों, कर्मचारियों, सहयोगियों और फर्जी कंपनियों के नाम पर रखी गई थीं।

इस मामले में अब तक कुल जब्त की गई संपत्तियों का बाजार मूल्य लगभग 777.1 करोड़ रुपए है।

इसके अलावा, ईडी ने कॉनकास्ट स्टील एंड पावर लिमिटेड (सीएसपीएल) और अन्य के खिलाफ पीएमएलए, 2002 के तहत चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच के संबंध में कोलकाता की विशेष अदालत (पीएमएलए) में 63 नए आरोपियों के खिलाफ दूसरी पूरक अभियोग शिकायत दायर की है।

बयान में कहा गया कि इस पूरक अभियोग शिकायत में, 63 अतिरिक्त आरोपी व्यक्तियों/संस्थाओं को आरोपी बनाया गया है। इनमें व्यक्ति, कंपनियां, एलएलपी, साझेदारी फर्म और प्रोप्राइटरी फर्म शामिल हैं, जो अपराध की आय की लॉन्ड्रिंग में जानबूझकर शामिल पाए गए हैं।

इसमें आगे कहा गया कि संजय कुमार सुरेका और अन्य के खिलाफ सीबीआई, बीएसएफबी, कोलकाता द्वारा आईपीसी, 1860 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर ईडी ने जांच शुरू की।

एफआईआर में आरोप है कि मेसर्स कॉनकास्ट स्टील एंड पावर लिमिटेड (सीएसपीएल) ने अपने प्रवर्तकों और निदेशकों के साथ मिलकर, बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए स्टॉक विवरण, हेरफेर किए गए वित्तीय विवरण और मनगढ़ंत रिकॉर्ड प्रस्तुत करके बैंकों के एक संघ से धोखाधड़ी से ऋण प्राप्त किया और उसके बाद ऋण राशि का गबन किया, जिससे बैंकों और वित्तीय संस्थानों को लगभग 6,210.72 करोड़ रुपये (ब्याज को छोड़कर) का गलत नुकसान हुआ।

--आईएएनएस

एमएस/

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