बैंक धोखाधड़ी केस: ईडी ने इंदौर में 13 करोड़ रुपए से ज्यादा की 18 संपत्तियां अटैच कीं
इंदौर, 11 सितंबर (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के इंदौर सब-जोनल ऑफिस ने आलोक शारदा और अन्य लोगों से जुड़े बैंक धोखाधड़ी के मामले में,मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत 13 करोड़ रुपए की कीमत वाली 18 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त किया है।
गुरुवार को अस्थायी कुर्की का आदेश जारी किया गया। ईडी की जांच भोपाल की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (ईओडब्ल्यू) द्वारा दर्ज दो एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। ये एफआईआर आईडीबीआई बैंक और एक नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी, मेसर्स किसान धन एग्री फाइनेंशियल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोपों से संबंधित हैं।
ईडी के अनुसार, इंदौर जिले के मानपुर में स्थित मेसर्स शारदा वेयरहाउस के मालिक आलोक शारदा ने दूसरों के साथ मिलकर 'वेयरहाउस रिसिप्ट फाइनेंस स्कीम' का गलत इस्तेमाल किया। आरोपी ने कथित तौर पर किसानों के कृषि उत्पादों को वेयरहाउस में जमा दिखाया और वेयरहाउस रसीदें जारी कीं। इन रसीदों के आधार पर सोयाबीन और चने की कुल 62,965 बोरियों के बदले 42 किसानों को लोन मंजूर किए गए।
जांचकर्ताओं ने पाया कि गिरवी रखे गए सामान को 'बिना अनुमति के' हटा दिया गया और बेच दिया गया। लोन की सुविधा पाने और उसे जारी रखने के लिए नकली या फर्जी वेयरहाउस रसीदों, स्टॉक की उपलब्धता के बारे में गलत जानकारी देने और रिकॉर्ड को छिपाने या हटाने का इस्तेमाल किया गया।
ईडी ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि इसके परिणामस्वरूप आईडीबीआई बैंक को 14.04 करोड़ रुपए का गलत नुकसान हुआ और आरोपियों को उतना ही गलत फायदा हुआ।
एक संबंधित लेनदेन में मेसर्स किसान धन एग्री फाइनेंशियल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड ने उसी वेयरहाउस में जमा बताए गए कृषि उत्पादों के बदले आलोक शारदा को 12.04 करोड़ रुपए का वेयरहाउस रिसिप्ट फाइनेंस मंजूर किया था। बाद में जांच करने पर गिरवी रखे गए स्टॉक में भारी कमी पाई गई। कर्ज देने वाले से जरूरी रिलीज या नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लिए बिना ही सामान हटा दिया गया और बेच दिया गया।
कुल मिलाकर, आलोक शारदा और अन्य आरोपियों ने मिलीभगत करके आईडीबीआई बैंक और मेसर्स किसान धन एग्री फाइनेंशियल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को लगभग 26 करोड़ रुपए का गलत नुकसान पहुंचाया और खुद उतना ही गलत फायदा उठाया।
--आईएएनएस
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