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मेगा डीएससी से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही सरकार: वाईएसआरसीपी नेता

मेगा डीएससी से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही सरकार: वाईएसआरसीपी नेता
मेगा डीएससी से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही सरकार: वाईएसआरसीपी नेता

विशाखापत्तनम, 23 अगस्त (आईएएनएस)। वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के क्षेत्रीय समन्वयक और आंध्र प्रदेश के पूर्व मंत्री गुडिवाडा अमरनाथ ने राज्य की चंद्रबाबू नायडू सरकार पर मेगा डीएससी विवाद से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सरकार जनता के सामने उठाए गए सवालों का जवाब देने के बजाय मुद्दे को भटकाने की कोशिश कर रही है।

अमरनाथ ने वाईएसआरसीपी अध्यक्ष वाईएस जगन मोहन रेड्डी की उस मांग को दोहराया, जिसमें मेगा डीएससी-2025 और एपीपीएससी भर्ती प्रक्रियाओं की सीबीआई जांच कराने की चुनौती दी गई थी। उन्होंने कहा कि यदि सरकार को दोनों भर्ती प्रक्रियाओं पर पूरा भरोसा है तो जांच से घबराने की कोई जरूरत नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि नियमित डीएससी परीक्षा के बिना खेल कोटा के तहत की गई 372 नियुक्तियों, संदिग्ध खेल प्रमाणपत्रों, नौकरी के बदले पैसे लेने से जुड़े कथित ऑडियो-वीडियो और एक आउटसोर्स कर्मचारी के रैंक-1 विवाद जैसे कई गंभीर सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। अमरनाथ ने कहा कि सरकार विधानसभा में डीएससी का बचाव नहीं कर पाई और अब विधान परिषद में भी विस्तृत जांच से बच रही है।

वाईएसआरसीपी नेता ने मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की अनकापल्ली यात्रा की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि जब किसान सूखे, फसल संकट और बकाया भुगतान जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं, तब सरकार केवल कार्यक्रम प्रबंधन में लगी हुई है। उन्होंने बताया कि अनकापल्ली जिले में 56,000 हेक्टेयर धान क्षेत्र में से केवल लगभग 5,000 हेक्टेयर में ही खेती हो रही है। ऐसे में उन्होंने तत्काल सूखा घोषित कर राहत देने की मांग की।

अमरनाथ ने मंत्री लोकेश के उस दावे पर भी सवाल उठाया, जिसमें कहा गया था कि डेटा सेंटर परियोजनाओं से 1.80 लाख रोजगार पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि सरकार बड़े पैमाने पर भूमि और प्रोत्साहन दे रही है, लेकिन रोजगार की वास्तविक संभावनाओं, पानी की जरूरत, बिजली की मांग और पर्यावरणीय प्रभावों के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि करीब 10 गीगावाट क्षमता वाले डेटा सेंटर प्रस्तावित हैं, जबकि विशाखापत्तनम खुद गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पोलावरम परियोजना का जलस्तर कम किया गया तो इससे विशाखापत्तनम और उत्तर आंध्र की जल सुरक्षा पर खतरा पैदा हो सकता है।

इस बीच वाईएसआरसीपी के गुंटूर जिला अध्यक्ष और पूर्व मंत्री अंबाती रामबाबू ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने मार्गदर्शी अवैध जमा मामले में रामोजी राव को क्लीन चिट नहीं दी थी। उन्होंने कहा कि उनके निधन के कारण ही आपराधिक कार्यवाही समाप्त हुई।

ताडेपल्ली स्थित वाईएसआरसीपी केंद्रीय कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए रामबाबू ने कहा कि उंदावल्ली अरुण कुमार की याचिका खारिज होने का यह मतलब नहीं है कि मार्गदर्शी द्वारा जमा राशि जुटाने की प्रक्रिया को वैध करार दिया गया है।

रामबाबू ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने उंदावल्ली की शिकायत से पहले ही मार्गदर्शी की जमा राशि जुटाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। आरबीआई ने स्पष्ट किया था कि हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ) आरबीआई अधिनियम की धारा 45एस का उल्लंघन करते हुए आम जनता से जमा राशि नहीं जुटा सकता।

उन्होंने कहा कि मार्गदर्शी ने जमाकर्ताओं से लगभग 2,600 करोड़ रुपए जुटाए थे और बाद में रामोजी राव ने जमाकर्ताओं का पैसा लौटाने के लिए मीडिया परिसंपत्तियां बेचकर धन जुटाया था। रामबाबू ने कहा, "किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद आपराधिक मामला समाप्त हो सकता है, लेकिन वित्तीय देनदारियां समाप्त नहीं होतीं।"

उन्होंने कहा कि धारा 45एस के तहत कड़ी कार्रवाई और भारी जुर्माने का प्रावधान है, जिसमें अवैध रूप से जुटाई गई राशि के आधार पर दंड निर्धारित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि नागरिक और वित्तीय दायित्वों को अब भी आगे बढ़ाया जा सकता है।

रामबाबू ने वाईएसआरसीपी संसदीय दल के नेता वाई.वी. सुब्बा रेड्डी को हाल ही में संसद में दिए गए केंद्र सरकार के जवाब का हवाला देते हुए कहा कि केंद्र ने भी स्पष्ट किया है कि एचयूएफ सार्वजनिक जमा राशि नहीं जुटा सकता और नियमों के उल्लंघन पर नियामकीय कार्रवाई की जा सकती है।

--आईएएनएस

एएमटी/डीकेपी

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