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राजस्थान: डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डॉक्टर दंपति से 76 लाख की ठगी, आरोपी ठाणे से गिरफ्तार

राजस्थान: डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डॉक्टर दंपति से 76 लाख की ठगी, आरोपी ठाणे से गिरफ्तार
राजस्थान: डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डॉक्टर दंपति से 76 लाख की ठगी, आरोपी ठाणे से गिरफ्तार

जयपुर, 30 अक्टूबर (आईएएनएस)। राजस्थान के केंद्रीय साइबर पुलिस थाने ने डिजिटल अरेस्ट ठगी मामले में महाराष्ट्र के पुणे निवासी किरण लक्ष्मण ताम्हाणे को गिरफ्तार किया है। इस मामले में जयपुर के एक बुजुर्ग डॉक्टर दंपति से 76 लाख रुपए की कथित ठगी की गई थी। आरोपी को ठाणे से गिरफ्तार कर ट्रांजिट वारंट पर जयपुर लाया गया। मामले में अब तक चार लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

पुलिस के अनुसार, ठगों ने पुलिस, एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (एटीएस) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के अधिकारी बनकर डॉक्टर दंपति को आतंकवादी गतिविधियों और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े होने का डर दिखाया था। उन्हें गिरफ्तारी की धमकी देकर लाखों रुपए ठग लिए गए।

जांच के दौरान पता चला कि ठगी गई रकम में से करीब 50 लाख रुपए ताम्हाणे की कंपनी के आईसीआईसीआई बैंक खाते में पहुंचे थे।

यह कार्रवाई पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर चलाए जा रहे साइबर अपराध और डिजिटल अरेस्ट धोखाधड़ी विरोधी अभियान के तहत की गई। मामले की जानकारी अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (साइबर क्राइम) विजय कुमार सिंह ने दी।

पुलिस के अनुसार, जयपुर निवासी शिकायतकर्ता और उनकी पत्नी को व्हाट्सएप कॉल के जरिए संपर्क किया गया। अलग-अलग मोबाइल नंबरों से बात करने वाले आरोपियों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर कहा कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों और बड़े वित्तीय अपराधों में किया गया है।

ठगों ने दंपति को गिरफ्तार करने की धमकी दी और कहा कि उनके परिवार के अन्य सदस्यों को भी गंभीर कानूनी परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

इसके बाद आरोपियों ने व्हाट्सएप के माध्यम से एनआईए का फर्जी नोटिस भेजा और भरोसा दिलाया कि कुछ दिनों बाद उन्हें एनओसी या सुरक्षा मंजूरी प्रमाणपत्र जारी कर दिया जाएगा। ठग लगातार व्हाट्सएप वॉयस और वीडियो कॉल के जरिए दंपति पर मानसिक दबाव बनाते रहे और उनकी गतिविधियों पर नजर रखते रहे।

आरोपियों ने डॉक्टर दंपति से उनकी फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) की जानकारी और आधिकारिक दस्तावेजों की तस्वीरें भी मंगवाईं। लगातार दबाव में आकर दंपति ने अपनी जमा पूंजी निकाल ली और आरोपियों के निर्देश पर कुल 76 लाख रुपए विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए।

जांच के दौरान साइबर पुलिस ने आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए व्हाट्सएप नंबर, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), कस्टमर एप्लीकेशन फॉर्म (सीएएफ), आईपी डिटेल रिकॉर्ड (आईपीडीआर) और संदिग्ध बैंक खातों का विश्लेषण किया।

जांच में सामने आया कि एक खाते में जमा हुई राशि उसी दिन आरटीजीएस के जरिए दूसरे खाते में भेजी गई और अगले दिन तीसरे खाते में ट्रांसफर कर दी गई। इससे ठगी की रकम को कई खातों के माध्यम से घुमाने की पूरी श्रृंखला सामने आई।

बैंक रिकॉर्ड, लेनदेन के विवरण और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने पहले दिल्ली और उत्तर प्रदेश से तीन लोगों को गिरफ्तार किया था।

आगे की जांच में किरण लक्ष्मण ताम्हाणे का नाम सामने आया, जिसे ठगी की रकम का पहला लाभार्थी माना जा रहा है।

पूछताछ में ताम्हाणे ने बताया कि उसकी कंपनी के.टी. मल्टी सर्विस प्राइवेट लिमिटेड का आईसीआईसीआई बैंक खाता साइबर ठगी में इस्तेमाल किया गया। इस खाते में करीब 50 लाख रुपए जमा किए गए थे, जिन्हें बाद में अन्य खातों में स्थानांतरित कर दिया गया।

पुलिस के मुताबिक, ताम्हाणे ने कथित तौर पर जिग्ना प्रथामेश सावंत (राठौड़) और अनुराग महेश्वरी के साथ मिलकर कंपनी के बैंक खाते की जानकारी, नेट बैंकिंग क्रेडेंशियल, यूजर आईडी, पासवर्ड, चेकबुक और मोबाइल सिम उपलब्ध कराए थे।

ताम्हाणे ने दावा किया कि उसे रियल एस्टेट निवेश का प्रस्ताव और मुनाफे में कमीशन देने का लालच दिया गया था, जिसके बाद उसने बैंकिंग संबंधी जानकारी साझा की।

जांच एजेंसियों का मानना है कि कंपनी के बैंक खाते और उससे जुड़े बैंकिंग साधनों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम प्राप्त करने और आगे भेजने के लिए किया गया।

साइबर पुलिस अब व्हाट्सएप रिकॉर्ड, सीडीआर, सीएएफ, आईपीडीआर और बैंकिंग लेनदेन की तकनीकी जांच कर पूरी मनी ट्रेल खंगाल रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि ठगी की रकम आगे किन खातों में भेजी गई और इस गिरोह से जुड़े अन्य लोग कौन हैं।

यह कार्रवाई साइबर क्राइम के पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) शांतनु कुमार सिंह के मार्गदर्शन और थाना प्रभारी एवं उप पुलिस अधीक्षक गजेंद्र शर्मा के नेतृत्व में की गई। अभियान में इंस्पेक्टर अजय कुमार तथा आरक्षक भीवराम और सच्चिदानंद भी शामिल रहे।

--आईएएनएस

एएमटी/डीकेपी

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