बेबुनियाद अफवाहें न फैलाएं, स्मार्ट मीटर कानूनी रूप से अनिवार्य हैं : मेघना साकोरे बोर्डीकर
मुंबई, 3 जुलाई (आईएएनएस)। महाराष्ट्र में स्मार्ट बिजली मीटर लगाने को लेकर चल रहे विवाद पर सफाई देते हुए बिजली राज्य मंत्री मेघना साकोरे बोर्डीकर ने शुक्रवार को राज्य विधानसभा को बताया कि इन मीटरों को लगाना केंद्रीय नियमों के तहत एक कानूनी अनिवार्यता है।
उन्होंने अपील की कि ज्यादा बिल आने को लेकर ग्राहकों के बीच बेवजह घबराहट या गलतफहमियां न फैलाएं।
यह मुद्दा भाजपा विधायक भीमराव तापकीर ने पुणे में बार-बार बिजली जाने और स्मार्ट मीटर से जुड़ी चिंताओं के बारे में 'ध्यान आकर्षण प्रस्ताव' के जरिए उठाया था।
इस चर्चा में विपक्ष और सत्ताधारी गठबंधन के विधायकों, जिनमें चेतन तुपे, नीलेश राणे और नाना पटोले शामिल थे, ने हिस्सा लिया और बिजली के बहुत ज्यादा बिलों को लेकर जनता में भारी नाराजगी का दावा करते हुए महायुति सरकार को जोरदार तरीके से घेरा।
बहस में हिस्सा लेते हुए नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के विधायक चेतन तुपे ने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली के बिल लगभग तीन गुना हो गए हैं।
उन्होंने सवाल किया कि लोगों में भारी गुस्सा है। क्या इन कंपनियों के बनाए मीटर सही हैं या नहीं, इसकी जांच के लिए कोई पारदर्शी व्यवस्था है? साथ ही, क्या ग्राहकों को यह चुनने का अधिकार होगा कि वे कौन-सा मीटर लगवाना चाहते हैं?
कांग्रेस विधायक नाना पटोले ने और तीखा हमला करते हुए बड़ी कंपनियों के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया।
उन्होंने सवाल किया कि इंस्टॉलेशन का काम एक बड़ी प्राइवेट कंपनी को सौंपा जा रहा है, जिसके कर्मचारी ही सारा सेटअप संभालते हैं, न कि राज्य बिजली बोर्ड के अधिकारी। जब ग्राहक शिकायत करते हैं, तो अधिकारी यह कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं कि मीटर उन्होंने नहीं लगाए थे। इन डिवाइस की वजह से बिल चार गुना बढ़ रहे हैं, जिससे घरों का बजट बिगड़ रहा है। आखिर किसके दबाव में यह सब किया जा रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि बिजली कानून कोई ईश्वरीय आदेश नहीं है और नागरिकों को आर्थिक शोषण से बचाने के लिए इसमें बदलाव किया जा सकता है।
शिवसेना विधायक नीलेश राणे ने ग्रामीण इलाकों में बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर चेतावनी दी।
उन्होंने आरोप लगाया कि लगभग हर विधायक के चुनाव क्षेत्र में स्मार्ट मीटर को लेकर विवाद बढ़ रहा है। जिलों में हालात इतने तनावपूर्ण हैं कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले अधिकारियों पर शारीरिक हमले का खतरा है। सरकार को योजना को लागू करने का काम रोक देना चाहिए। कम शिकायतों का दावा करने वाला डेटा बनावटी है। जमीनी स्तर के अधिकारी मंत्रालय से सच छिपा रहे हैं।
आंकड़ों के साथ विपक्ष के दावों को गलत बताते हुए, मंत्री ने कहा कि स्मार्ट मीटर लगाना 'सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003' और 'सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (मीटर लगाने और चलाने के नियम) 2006' के तहत जरूरी है।
उन्होंने आगे कहा कि सिर्फ पुणे में ही जून 2026 तक लगभग 9.74 लाख मीटर लगाए गए हैं। तेजी से चलने वाले मीटर या ज्यादा बिल आने के बारे में मिली 11,770 शिकायतों में से जांच में पाया गया कि सिर्फ चार शिकायतें ही सही थीं।
उन्होंने कहा कि यह बात पूरी तरह से गलत है कि स्मार्ट मीटर से बिजली का बिल अपने-आप बढ़ जाता है। इसके उलट, स्मार्ट मीटर से ग्राहकों को दिन के समय सस्ती बिजली दरों का फायदा मिल सकता है।
नाना पटोले ने याद दिलाया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पहले सदन को भरोसा दिलाया था कि स्मार्ट मीटर लगवाना वैकल्पिक होगा। इस पर मंत्री ने एक तकनीकी अंतर स्पष्ट किया।
मंत्री ने कहा कि अपनी मर्जी से चुनने का मुख्यमंत्री का आश्वासन खास तौर पर प्रीपेड स्मार्ट मीटर के लिए था। अभी पूरे राज्य में जो मीटर लगाए जा रहे हैं, वे रेगुलर पोस्ट-पेड स्मार्ट मीटर हैं, जिन्हें सभी बिजली वितरण कंपनियों के लिए लगाना कानूनी रूप से अनिवार्य है। साथ ही, उन्होंने भरोसा दिलाया कि ग्राहकों की किसी भी जायज शिकायत का तुरंत समाधान किया जाता रहेगा।
--आईएएनएस
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