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सच की आवाज कभी खत्म नहीं होती, पीपी दिव्या ने बुद्ध की कहानी के जरिए दिया जीवन और संघर्ष का संदेश

सच की आवाज कभी खत्म नहीं होती, पीपी दिव्या ने बुद्ध की कहानी के जरिए दिया जीवन और संघर्ष का संदेश
सच की आवाज कभी खत्म नहीं होती, पीपी दिव्या ने बुद्ध की कहानी के जरिए दिया जीवन और संघर्ष का संदेश

कन्नूर, 22 अक्टूबर (आईएएनएस)। केरल में कन्नूर जिला पंचायत की पूर्व अध्यक्ष पीपी दिव्या की एक फेसबुक पोस्ट इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। यह पोस्ट सच, न्याय और जीवन के कठिन अनुभवों को पीछे छोड़कर आगे बढ़ने की बात करता है। यह पोस्ट ऐसे समय आया है, जब सीपीआई (एम) की कन्नूर जिला समिति की दो दिवसीय विस्तारित बैठक समाप्त हो गई, लेकिन उन्हें जिला समिति में दोबारा शामिल नहीं किया गया।

सभी 14 विस्तारित जिला समिति बैठकों के समाप्त होने के बाद पार्टी की राज्य समिति की बैठक गुरुवार और शुक्रवार को तिरुवनंतपुरम में हो रही है। ऐसे में दिव्या की यह पोस्ट और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

नवंबर 2024 में अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट के नवीन बाबू की मौत से जुड़े विवाद के बाद दिव्या को सीपीआई (एम) की कन्नूर जिला समिति से हटाकर इरिनावे डैम शाखा समिति में भेज दिया गया था। विस्तारित जिला समिति की बैठक से पहले उनके राजनीतिक पुनर्वास को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन बैठक के बाद उनकी दोबारा वापसी नहीं हुई।

अपने नए पोस्ट में दिव्या ने सीधे तौर पर नवीन बाबू या उस मामले का कोई जिक्र नहीं किया है। इसके बजाय उन्होंने मानवीय रिश्तों, दर्दभरी यादों और उन चीजों को छोड़ने की समझदारी पर विचार साझा किए हैं, जो कभी मददगार थीं लेकिन बाद में बोझ बन गईं।

उन्होंने भगवान बुद्ध से जुड़ी एक कहानी साझा की। कहानी में एक व्यक्ति अस्थायी बेड़े (राफ्ट) की मदद से एक गहरी नदी पार करता है। सुरक्षित रूप से दूसरी तरफ पहुंचने के बाद वह आभार व्यक्त करते हुए उस बेड़े को अपने सिर पर रखकर आगे की यात्रा में भी साथ ले जाने का फैसला करता है।

बुद्ध अपने शिष्यों से पूछते हैं कि क्या उस व्यक्ति का ऐसा करना सही है। सभी शिष्य एक स्वर में इसका जवाब "नहीं" देते हैं।

दिव्या ने लिखा कि इस कहानी का संदेश यह है कि जीवन के कठिन दौर को पार करने में मदद करने वाली हर चीज को हमेशा अपने साथ ढोते रहने की जरूरत नहीं होती। उन्होंने कहा कि किसी चीज को छोड़ देना कृतघ्नता नहीं है, बल्कि जीवन से मिले सबक को स्वीकार करना है।

पोस्ट के अंत में उन्होंने लिखा, "न्याय मिलने में देर हो सकती है, लेकिन सच की आवाज कभी खत्म नहीं होती।" इसके साथ ही उन्होंने लोगों से अपनी राय भी साझा करने को कहा।

यह पोस्ट ऐसे समय आया है, जब हाल ही में केरल मंत्रिमंडल ने नवीन बाबू की मौत की जांच सीबीआई को सौंपने का फैसला किया है। नवीन बाबू के परिवार ने पुलिस जांच पर असंतोष जताते हुए लगातार केंद्रीय एजेंसी से जांच की मांग की थी।

15 अगस्त 2024 को नवीन बाबू अपने सरकारी आवास में मृत पाए गए थे। इससे एक दिन पहले दिव्या ने कन्नूर कलेक्ट्रेट में आयोजित उनके विदाई समारोह के दौरान सार्वजनिक रूप से उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे।

इस घटना के बाद बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था और पुलिस ने दिव्या के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया था। बाद में उन्हें गिरफ्तार किया गया और फिर जमानत मिल गई। यह मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।

हालांकि दिव्या के सोशल मीडिया पोस्ट में न तो इस मामले का सीधा उल्लेख है और न ही उनकी पार्टी में स्थिति का, लेकिन पोस्ट के समय को देखते हुए उनके राजनीतिक भविष्य और नवीन बाबू की मौत से जुड़े अब तक अनसुलझे सवालों को लेकर चर्चा फिर से तेज हो गई है।

--आईएएनएस

एएमटी/वीसी

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