भाजपा-जेडीएस विधायकों के सूखा प्रभावित क्षेत्रों की अनदेखी कर रही कर्नाटक सरकार: नारायणस्वामी
बेंगलुरु, 7 सितंबर (आईएएनएस)। कर्नाटक विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ भाजपा नेता चलवाड़ी नारायणस्वामी ने सोमवार को कांग्रेस सरकार पर सूखा प्रभावित क्षेत्रों की घोषणा में विपक्ष के प्रतिनिधित्व वाले विधानसभा क्षेत्रों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया।
विधान सौधा के पास विरोध प्रदर्शन कर रहे जेडी (एस) विधायक शरणगौड़ा कंदकुर को समर्थन देने के बाद मीडिया से बातचीत में नारायणस्वामी ने कहा कि सूखा प्रभावित घोषित क्षेत्रों में भाजपा और जेडी(एस) के विधायकों वाले केवल 17 विधानसभा क्षेत्र शामिल किए गए हैं, जबकि बाकी अधिकांश क्षेत्र सत्तारूढ़ दल के विधायकों के हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने जानबूझकर विपक्षी विधायकों के क्षेत्रों को निशाना बनाया। गुरमिटकल का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र राज्य के सबसे पिछड़े इलाकों में से एक है और गंभीर सूखे की मार झेल रहा है।
नारायणस्वामी ने कहा, "कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे आठ बार गुरमिटकल से विधायक रहे हैं। यह क्षेत्र गंभीर सूखे से प्रभावित है, लेकिन केवल इसलिए सूखा प्रभावित इसे घोषित नहीं किया गया, क्योंकि शरणगौड़ा कंदकुर वहां के मौजूदा विधायक हैं। यदि सरकार को विधायकों से कोई व्यक्तिगत नाराजगी है तो उन्हें जेल भेज दीजिए, लेकिन निर्दोष जनता को सजा क्यों दी जा रही है?"
भाजपा नेता ने विधानसभा सत्र को निर्धारित समय से पहले समाप्त करने के फैसले पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने मानसून सत्र के दौरान कम बारिश के कारण पैदा हुए सूखे की स्थिति पर चर्चा की मांग की थी, लेकिन सरकार ने उनकी बात नहीं मानी और सत्र को तीन दिन पहले ही समाप्त कर दिया।
उन्होंने पूछा, "अब सूखे पर चर्चा के लिए विशेष सत्र बुलाया गया है। इसकी क्या जरूरत थी और यह कैसे उचित है?"
नारायणस्वामी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार सूखे की समस्या से निपटने में विफल रही है और एक भ्रष्ट मंत्री को जांच और सवालों से बचाने के लिए सत्र समय से पहले समाप्त किया गया।
उन्होंने बताया कि भाजपा ने राज्य में सूखे की स्थिति का आकलन करने के लिए छह टीमें गठित की थीं। इन टीमों ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी। हमने सरकार को बताया था कि 200 से अधिक विधानसभा क्षेत्र सूखे की चपेट में हैं, लेकिन सरकार ने हमारी रिपोर्ट को गंभीरता से नहीं लिया।
नारायणस्वामी ने यह भी आरोप लगाया कि जिलों में सूखे की स्थिति का आकलन करने भेजे गए नए मंत्री निरीक्षण करने के बजाय सम्मान समारोहों में व्यस्त रहे।
उन्होंने दावा किया कि सरकार ने शुरुआत में केवल 101 तालुकों को औपचारिकता के तौर पर सूखा प्रभावित घोषित किया था और भाजपा की पदयात्रा शुरू होने के बाद सूची का विस्तार किया गया।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के हेलीकॉप्टर से दौरा करने पर भी उन्होंने सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "बाढ़ की स्थिति में हवाई सर्वेक्षण समझ में आता है, लेकिन जब बारिश नहीं हो रही है और राज्य सूखे से जूझ रहा है, तब मुख्यमंत्री हेलीकॉप्टर से यात्रा क्यों कर रहे हैं?"
उन्होंने कहा कि सरकार को लोगों के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुननी चाहिए, न कि केवल प्रतीकात्मक गतिविधियां करनी चाहिए।
पूर्व मंत्री बी. नागेंद्र से जुड़े विवाद पर नारायणस्वामी ने कहा कि यदि नागेंद्र को क्लीन चिट मिलने के बाद दोबारा मंत्री बनाने की बात कही जा रही है, तो यह सवाल उठता है कि ये क्लीन चिट आखिर किस फैक्ट्री में बनती है?
उन्होंने कांग्रेस सरकार पर अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) आरक्षण से जुड़े कदमों को वापस लेने का भी आरोप लगाया। साथ ही दावा किया कि सरकार कई मोर्चों पर "भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और छल" में लिप्त है।
नारायणस्वामी ने गृह लक्ष्मी गारंटी योजना के क्रियान्वयन की भी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि लाभार्थियों को नियमित रूप से 2,000 रुपए नहीं मिल रहे हैं। सरकार महिलाओं के साथ भिखारियों जैसा व्यवहार कर रही है और महिलाएं कांग्रेस की गुलाम नहीं हैं।
इसके अलावा उन्होंने स्कूली बच्चों को जूते उपलब्ध कराने में अनियमितताओं तथा कर्नाटक रेजिडेंशियल एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस सोसायटी को लेकर भी आरोप लगाए।
नारायणस्वामी ने दावा किया कि कांग्रेस के कई विधायक भी सरकार के कामकाज से नाराज हैं और उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा, "कांग्रेस के विधायक भी अब विपक्षी विधायकों की तरह महसूस कर रहे हैं। असंतोष बढ़ रहा है। वे नाराज और निराश हैं। यदि केवल कुछ लोगों को ही लाभ मिलता रहेगा तो बाकी लोग चुप नहीं बैठेंगे।"
--आईएएनएस
एएमटी/वीसी

