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डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से तमिलनाडु की सरकारी बस सेवाओं पर बढ़ा संकट, सालाना 175 करोड़ का अतिरिक्त बोझ

चेन्नई, 16 मई (आईएएनएस)। डीजल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी ने तमिलनाडु की सरकारी परिवहन निगमों की आर्थिक मुश्किलें ज्यादा बढ़ा दी हैं। तेल कंपनियों द्वारा हाईस्पीड डीजल के दाम में 2.86 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद राज्य के परिवहन विभाग पर सालाना करीब 175.58 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ने का अनुमान है।
डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से तमिलनाडु की सरकारी बस सेवाओं पर बढ़ा संकट, सालाना 175 करोड़ का अतिरिक्त बोझ

चेन्नई, 16 मई (आईएएनएस)। डीजल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी ने तमिलनाडु की सरकारी परिवहन निगमों की आर्थिक मुश्किलें ज्यादा बढ़ा दी हैं। तेल कंपनियों द्वारा हाईस्पीड डीजल के दाम में 2.86 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद राज्य के परिवहन विभाग पर सालाना करीब 175.58 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ने का अनुमान है।

तमिलनाडु की आठ सरकारी परिवहन इकाइयां (मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन 'एमटीसी', स्टेट एक्सप्रेस ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन 'एसईटीसी' और तमिलनाडु स्टेट ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन 'टीएनएसटीसी') की छह शाखाएं हर दिन लगभग 19,000 बसें चलाती हैं। ये बसें राज्यभर में 10,120 से अधिक रूटों पर सेवा देती हैं।

आंकड़ों के मुताबिक, ये बसें रोजाना करीब 16.82 लाख लीटर डीजल खपत करती हैं और लगभग 81 लाख किलोमीटर का सफर तय करती हैं। परिवहन विभाग के सचिव शुंचोंगगाम जातक चिरु ने बताया कि राज्य की परिवहन कंपनियां पहले से ही हर दिन लगभग 19 करोड़ रुपये का घाटा झेल रही हैं। अब डीजल महंगा होने के बाद यह दैनिक घाटा करीब 48.11 लाख रुपये और बढ़ जाएगा।

अधिकारियों के अनुसार, सरकारी परिवहन निगम हर साल केवल डीजल खरीदने पर लगभग 5,200 करोड़ रुपये खर्च करते हैं। यह कुल परिचालन खर्च का करीब 26 प्रतिशत हिस्सा है।

तमिलनाडु में सरकारी बस सेवाएं आज भी सार्वजनिक परिवहन की रीढ़ मानी जाती हैं। राज्य के 1,000 से अधिक आबादी वाले करीब 98 प्रतिशत गांव बस सेवाओं से जुड़े हुए हैं।

परिवहन कर्मचारी यूनियनों का कहना है कि सरकार लंबे समय से बढ़ती ईंधन कीमतों के हिसाब से बस किराये में संशोधन नहीं कर रही है। सरकारी बसों का किराया आखिरी बार जनवरी 2018 में बढ़ाया गया था, जब डीजल की कीमत करीब 65 रुपए प्रति लीटर थी। अब यही कीमत बढ़कर लगभग 95 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गई है।

रिकॉर्ड बताते हैं कि परिवहन निगमों का औसत दैनिक घाटा 2022-23 में 16.83 करोड़ रुपए था, जो 2023-24 में बढ़कर 17.7 करोड़ रुपए और 2024-25 में 18.9 करोड़ रुपए हो गया।

इसके बावजूद तमिलनाडु में देश में सबसे ज्यादा सार्वजनिक परिवहन यात्रियों की संख्या दर्ज की जा रही है। 2021-22 में जहां रोजाना 1.55 करोड़ लोग बसों से सफर करते थे, वहीं 2025-26 में यह संख्या बढ़कर करीब 2.05 करोड़ हो गई। इसमें 'विदियाल पयानम' योजना के तहत मुफ्त यात्रा करने वाली करीब 70 लाख महिला यात्री भी शामिल हैं।

बता दें कि 'विदियाल पयानम' तमिलनाडु सरकार द्वारा मई 2021 में शुरू की गई एक प्रमुख जनकल्याणकारी योजना है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य की महिलाओं को सशक्त बनाना और उनकी आर्थिक सहायता करना है। इसके तहत महिलाएं राज्य परिवहन निगम की सामान्य (साधारण/व्हाइट बोर्ड) बसों में पूरी तरह से मुफ्त यात्रा कर सकती हैं। यह सुविधा राज्य की सभी महिलाओं के साथ-साथ ट्रांसजेंडर्स और दिव्यांगजनों (पहाड़ी क्षेत्रों में) के लिए भी उपलब्ध है।

तमिलनाडु में बस किराया देश के सबसे सस्ते किरायों में गिना जाता है। साधारण बसों का किराया 58 पैसे प्रति किलोमीटर है, जबकि अल्ट्रा डीलक्स बसों में 1 रुपए प्रति किलोमीटर लिया जाता है। वहीं पड़ोसी राज्यों कर्नाटक और केरल में साधारण बसों का किराया 75 पैसे से 1 रुपए प्रति किलोमीटर तक है, जबकि प्रीमियम सेवाओं का किराया 1.20 रुपए से 1.68 रुपए प्रति किलोमीटर तक पहुंचता है।

--आईएएनएस

वीकेयू/पीएम

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