सीएमआरएल डायरी के एक पन्ने से केरल की सियासत में बवाल, भाजपा ने लगाए गंभीर आरोप
तिरुवनंतपुरम, 24 सितंबर (आईएएनएस)। सीएमआरएल के मैनेजिंग डायरेक्टर एस. शशिधरन कार्था की डायरी का एक पन्ना, जो अब जांचकर्ताओं के पास है, एक नए राजनीतिक विवाद का कारण बन गया है। भाजपा के राज्य उपाध्यक्ष शोन जॉर्ज ने दावा किया है कि इस पन्ने में सत्ताधारी यूडीएफ और विपक्षी लेफ्ट, दोनों ही खेमों के कई वरिष्ठ नेताओं के नाम शामिल हैं।
जॉर्ज, जो पिछले तीन साल से सीएमआरएल-एक्जालॉजिक मामले को देख रहे हैं, ने सबसे पहले सोशल मीडिया पर उस पेज की एक तस्वीर जारी की और पूछा, "विजिलेंस जांच क्यों नहीं हो रही है? इस पेज पर दिए गए आंकड़े कई सवालों के जवाब देते हैं।"
गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि इस पेज पर मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन, गृह मंत्री रमेश चेन्निथला, मंत्री के. मुरलीधरन और शिबू बेबी जॉन के अलावा दोनों राजनीतिक गुटों के वरिष्ठ नेताओं के नाम भी शामिल हैं।
इस लिस्ट में पिनाराई विजयन, उनके पूर्व कैबिनेट सहयोगी पी. राजीव, के. बी. गणेश कुमार और सीपीआईएम के वरिष्ठ नेता, जैसे एलामराम करीम, राज्य सीपीआई (एम) सचिव एम.वी. गोविंदन और अन्य वामपंथी नेता भी शामिल हैं।
जॉर्ज ने आरोप लगाया कि ये एंट्रीज राजनेताओं को किए गए भुगतान की ओर इशारा करती हैं, जिसमें सतीशन के नाम के आगे 5 लाख रुपए की एंट्री भी शामिल है।
इन आरोपों की पुष्टि सिर्फ डायरी एंट्रीज से नहीं हो सकती; हर भुगतान का संदर्भ और प्रकृति जांच के जरिए ही तय की जा सकती है।
यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब राज्य सरकार ने सीएमआएल-एक्जालॉजिक लेन-देन के बारे में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से मिली जानकारी पर क्राइम ब्रांच की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम से शुरुआती जांच कराने का फैसला किया है।
यह फैसला सरकार को मिली कानूनी सलाह के बाद लिया गया। ईडी ने राज्य पुलिस प्रमुख को पत्र लिखकर 'भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम' के तहत अपराधों के संबंध में कार्रवाई करने को कहा था।
जॉर्ज ने सवाल उठाया कि मामले को विजिलेंस और एंटी-करप्शन ब्यूरो के बजाय क्राइम ब्रांच को क्यों सौंपा गया और मांग की कि पूरे मामले को सीबीआई को सौंप दिया जाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि गृह मंत्री के तौर पर चेन्निथला ने जानबूझकर विजिलेंस जांच के बजाय क्राइम ब्रांच का रास्ता चुना। हालांकि चेन्निथला ने कहा है कि सरकार ने एडवोकेट जनरल की कानूनी राय पर कार्रवाई की और ईडी की जानकारी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता था।
इस ताजा विवाद ने सीएमआरएल की पिछली जांचों की ओर भी लोगों का ध्यान खींचा है।
केरल हाईकोर्ट ने जून 2026 के अपने फैसले में दर्ज किया कि कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने जनवरी 2024 में सीएमआरएल की जांच का आदेश दिया था और बाद में इसे गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) को सौंप दिया था। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि इनकम टैक्स सेटलमेंट कमीशन ने बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए खर्चों, कथित गैर-कानूनी पेमेंट के लिए कैश जुटाने और बिना कोई सर्विस दिए वीना विजयन और एक्सलॉजिक को कथित तौर पर 1.72 करोड़ रुपए के पेमेंट से जुड़े निष्कर्षों को सही ठहराया था।
जॉर्ज द्वारा जारी किए गए पेज के बारे में उन्होंने बताया कि यह एसएफआईओ द्वारा कोर्ट में जमा किए गए दस्तावेजों में से एक था।
ईडी की पहल पर राज्य पुलिस की जांच शुरू होने वाली है, ऐसे में डायरी के नए खुलासे ने एक और राजनीतिक सवाल खड़ा कर दिया है: क्या क्राइम ब्रांच की शुरुआती जांच कथित राजनीतिक पेमेंट की पूरी लिस्ट की जांच करेगी या ईडी द्वारा बताए गए खास मामलों तक ही सीमित रहेगी?
--आईएएनएस
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