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विकसित देशों को उत्सर्जन कम करने में पहल करनी चाहिए : विदेश मंत्रालय

विकसित देशों को उत्सर्जन कम करने में पहल करनी चाहिए : विदेश मंत्रालय
विकसित देशों को उत्सर्जन कम करने में पहल करनी चाहिए : विदेश मंत्रालय

नई दिल्ली, 4 सितंबर (आईएएनएस)। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि विकसित देशों को, जो ऐतिहासिक रूप से उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार हैं और जिन्होंने जलवायु परिवर्तन संकट में बहुत ज्यादा योगदान दिया है, इसे कम करने में पहल करनी चाहिए और विकासशील देशों की मदद करनी चाहिए।

नई दिल्ली में एक मीडिया ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल की टिप्पणियों पर मीडिया के सवालों का जवाब दिया। खनाल ने हिमालयी देश में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद बड़े औद्योगिक उत्सर्जकों से न्याय और मुआवजे की दिशा में राजनयिक बदलाव की बात कही थी। इस बाढ़ में शुक्रवार शाम तक 1,294 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और 5,053 लोग अभी भी लापता हैं।

जायसवाल ने कहा, "इस त्रासदी के मद्देनजर, हमने नेपाल की सरकार और वहां के लोगों के प्रति एकजुटता और समर्थन व्यक्त किया है। एक करीबी दोस्त और साझेदार के तौर पर भारत ने तुरंत प्रतिक्रिया दी, और हम देश में बचाव, राहत, पुनर्निर्माण और रिकवरी के प्रयासों में सहयोग जारी रखे हुए हैं।"

उन्होंने आगे कहा, "भारत का हमेशा से यह मानना ​​रहा है कि जलवायु परिवर्तन एक साझा चुनौती है और इस संबंध में कार्रवाई 'साझा लेकिन अलग-अलग जिम्मेदारियों और संबंधित क्षमताओं' के सिद्धांत पर आधारित होनी चाहिए; विकसित देशों को, जो ऐतिहासिक रूप से उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार हैं और जिन्होंने इस मौजूदा संकट में सबसे अधिक योगदान दिया है, उत्सर्जन कम करने में पहल करनी चाहिए और इस चुनौती से निपटने के लिए विकासशील देशों को वित्त और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के माध्यम से समर्थन देना चाहिए।"

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने यह भी बताया कि नेपाल के प्रधानमंत्री बालेनद्र शाह ने भारत को उसके समर्थन के लिए धन्यवाद दिया है और कहा कि भारत को नेपाल के लोगों की मदद करने में खुशी है।

उन्होंने कहा, "हमने देखा है कि नेपाल के प्रधानमंत्री ने हमारे समर्थन के लिए हमें धन्यवाद दिया है। जैसा कि आपने देखा होगा, जब यह त्रासदी आई, तो प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) ने नेपाल के प्रधानमंत्री से बात की और कहा कि भारत संकट की इस घड़ी में नेपाल के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है और उसे पूरा समर्थन देगा तथा हर संभव मदद करेगा। हमें खुशी है कि हम अपने दोस्तों, साझेदारों और नेपाल के लोगों की मदद कर पा रहे हैं।"

काठमांडू की स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इस सप्ताह की शुरुआत में खनाल ने कहा था कि वे अपने राजनयिक ढांचे को 'सहायता' से बदलकर 'न्याय और मुआवजे' की ओर ले जा रहे हैं और यह दान का मामला नहीं है।

--आईएएनएस

एससीएच

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