Samachar Nama
×

सामना में केंद्र पर शिवसेना (यूबीटी) का बड़ा हमला, कहा-'लोकतंत्र को खत्म करने की साजिश चल रही'

सामना में केंद्र पर शिवसेना (यूबीटी) का बड़ा हमला, कहा-'लोकतंत्र को खत्म करने की साजिश चल रही'
सामना में केंद्र पर शिवसेना (यूबीटी) का बड़ा हमला, कहा-'लोकतंत्र को खत्म करने की साजिश चल रही'

मुंबई, 10 अक्टूबर (आईएएनएस)। शिवसेना (यूबीटी) ने शनिवार को केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए उस पर भारतीय लोकतंत्र को उसके अंत की ओर धकेलने का आरोप लगाया।

ठाकरे खेमे ने पार्टी के मुखपत्र सामना के संपादकीय में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के आसपास बढ़ते राजनीतिक टकराव और उनके इस्तीफे की मांग को लेकर व्यापक विपक्षी विरोध प्रदर्शनों पर टिप्पणी की।

संपादकीय में इस बात पर भी कहा गया कि चुनावी धांधली के आरोपों से प्रेरित होकर वरिष्ठ कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चलाए गए आक्रामक अभियान ने सत्तारूढ़ भाजपा में हलचल मचा दी है।

इसमें कहा कि व्यवस्थित चुनावी अनियमितताओं के आरोपों का समाधान करने के बजाय, सत्ताधारी प्रतिष्ठान हर कीमत पर चुनाव प्रमुख का संरक्षण कर रहा है, और इस तरह की कार्रवाइयों का संरक्षण करना "राष्ट्र के साथ विश्वासघात" बताया गया है।

हालिया प्रदर्शनों से निपटने के तरीके की निंदा करते हुए संपादकीय में प्रशासन के दोहरे मापदंड की ओर इशारा किया गया। संपादकीय में आरोप लगाया गया,

"जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी जैसे विपक्षी नेताओं को घसीटा गया, उनके साथ मारपीट की गई और उन्हें पुलिस वाहनों में जबरदस्ती डाला गया जबकि कांग्रेस मुख्यालय के बाहर उग्र प्रदर्शन कर रही भाजपा महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं को गृह मंत्रालय द्वारा पूर्ण सुरक्षा प्रदान की गई।"

ठाकरे खेमे ने कहा कि सरकार ने विपक्ष के युवा नेतृत्व वाले "तिलचट्टे" आंदोलन को कुचलने के लिए जंतर-मंतर पर बजरंग दल के लगभग दो लाख सशस्त्र सदस्यों को तैनात करने की योजना बनाई है।

इसमें तर्क दिया गया कि वैध सार्वजनिक असहमति को हिंसक रूप से दबाने के लिए राजनीतिक गिरोहों और "निजी सेनाओं" पर भरोसा करना पूर्ण अराजकता और नागरिक अशांति को आमंत्रित करता है।

मौजूदा प्रशासनिक अवरोधों का विवरण देते हुए संपादकीय में कहा गया है कि दिल्ली पुलिस ने विरोध प्रदर्शनों के लिए औपचारिक अनुमति देने से इनकार कर दिया, दिल्ली की ओर जाने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों को रास्ते में ही रद्द कर दिया गया और भाग लेने के लिए यात्रा कर रहे युवा प्रदर्शनकारियों को रोका गया और गिरफ्तार कर लिया गया।

वरिष्ठ भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी द्वारा अब्राहम लिंकन के लोकतांत्रिक सिद्धांतों (जो स्वतंत्र चुनाव, पारदर्शी नौकरशाही और जिम्मेदार शासन पर जोर देते हैं) के संबंध में दिए गए बयानों का हवाला देते हुए, संपादकीय में अफसोस जताया गया कि वर्तमान व्यवस्था में इनमें से कोई भी सिद्धांत जीवित नहीं है, जहां संवैधानिक निकाय संस्थागत नियंत्रण का सामना कर रहे हैं।

उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने कहा कि मौजूदा राजनीतिक माहौल तानाशाही के स्तर को भी पार कर चुका है, और सत्तारूढ़ प्रशासन कथित तौर पर राजनीतिक जवाबदेही के बजाय शारीरिक धमकी के माध्यम से विपक्ष के संकल्प को तोड़ने के लिए तैयार है।

जैसे-जैसे विपक्षी दल एकजुट हो रहे हैं और राज्य तंत्र तथा प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव और टकराव चरम पर पहुंच रहा है, इसने चेतावनी दी है कि लोकतांत्रिक ढांचों के क्षरण के खिलाफ सार्वजनिक असंतोष एक महत्वपूर्ण सीमा तक पहुंच गया है।

--आईएएनएस

एसएके/पीएम

Share this story