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दिल्ली पुलिस की इंटर-स्टेट सेल की बड़ी कार्रवाई, एनडीपीएस एक्ट के तहत घोषित अपराधी गिरफ्तार

नई दिल्ली, 14 मई (आईएएनएस)। दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की इंटर-स्टेट सेल (आईएससी) ने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेस (एनडीपीएस) एक्ट के तहत एक घोषित अपराधी को गिरफ्तार किया है। अपराधी पिछले सात सालों से गिरफ्तारी से बच रहा था। पुलिस ने गुरुवार को इस कार्रवाई की जानकारी दी।
दिल्ली पुलिस की इंटर-स्टेट सेल की बड़ी कार्रवाई, एनडीपीएस एक्ट के तहत घोषित अपराधी गिरफ्तार

नई दिल्ली, 14 मई (आईएएनएस)। दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की इंटर-स्टेट सेल (आईएससी) ने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेस (एनडीपीएस) एक्ट के तहत एक घोषित अपराधी को गिरफ्तार किया है। अपराधी पिछले सात सालों से गिरफ्तारी से बच रहा था। पुलिस ने गुरुवार को इस कार्रवाई की जानकारी दी।

आरोपी की पहचान 30 वर्षीय हरप्रीत सिंह उर्फ ​​मणि के रूप में हुई है, जो पंजाब के बठिंडा का रहने वाला है। 5 जनवरी 2018 को बठिंडा में दर्ज की गई एक एफआईआर में उसे एनडीपीएस एक्ट के तहत 'घोषित अपराधी' बताया गया था।

अधिकारियों के अनुसार, आरोपी पिछले सात सालों से लगातार अपनी छिपने की जगहें बदलकर और अपनी पहचान छिपाकर गिरफ्तारी से बच रहा था। जांच में यह भी पता चला कि वह एक और आपराधिक मामले में भी वांछित है, जो बठिंडा में ही दर्ज है।

5 जनवरी 2018 को बठिंडा कैंट पुलिस स्टेशन के अधिकारियों ने आरोपी हरप्रीत सिंह को तब गिरफ्तार किया, जब वह एक पॉलीथीन बैग में नशीली दवाएं ले जा रहा था। उसके कब्जे से बरामद की गई प्रतिबंधित वस्तुओं में 'विंसरेक्स' सिरप की आठ बोतलें, 'ओनेरेक्स' सिरप की चार बोतलें और 'कैरिसोमा' टैबलेट की 15 स्ट्रिप्स शामिल थीं।

संबंधित पुलिस स्टेशन में एनडीपीएस एक्ट की धारा 22/61/85 के तहत एफआईआर नंबर 03/2018 दर्ज की गई और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद 2019 में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने उसे जमानत दे दी। बाद में, आरोपी जमानत पर बाहर आने के बाद फरार हो गया और 23 सितंबर, 2020 को उसे 'घोषित अपराधी' घोषित कर दिया गया।

अधिकारियों ने बताया कि आईएससी क्राइम ब्रांच की एक टीम फरार आरोपी का पता लगाने और उसे पकड़ने के लिए दिन-रात काम कर रही थी। लगातार क्रिमिनल इंटेलिजेंस इकट्ठा करने, फील्ड वेरिफिकेशन और टेक्निकल सर्विलांस के ज़रिए ऐसी पुख्ता जानकारी मिली, जिससे पता चला कि आरोपी अक्सर दिल्ली के ट्रांस-यमुना इलाके में आता-जाता रहता था।

आगे की निगरानी और स्थानीय पूछताछ से पता चला कि आरोपी गाजियाबाद इलाके में किराए के मकानों में रह रहा था और पुलिस की नजर से बचने के लिए लगातार अपनी जगह बदल रहा था।

11 मई को हेड कांस्टेबल नेमी चंद को एक गुप्त सूचना मिली कि आरोपी हरप्रीत सिंह दिलशाद गार्डन इलाके में आएगा। इस सूचना पर तुरंत कार्रवाई करते हुए, इंस्पेक्टर शिवराज सिंह बिष्ट के नेतृत्व में और एसीपी, आईएससी, रमेश लांबा की कड़ी निगरानी में एक विशेष टीम बनाई गई, जिसमें एसआई रविंदर कुमार, एसआई संजय कुमार, एएसआई रतन सिंह, हेड कांस्टेबल विकास, हेड कांस्टेबल राम हरि, हेड कांस्टेबल नरेंद्र, हेड कांस्टेबल नेमी चंद और कांस्टेबल प्रवीण कुमार शामिल थे।

तलाशी अभियान चलाया गया और आरोपी हरप्रीत सिंह को दिलशाद गार्डन मेट्रो स्टेशन के पास से पकड़ लिया गया। पूछताछ के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस ने बताया कि पूछताछ के दौरान आरोपी ने खुलासा किया कि फरार होने के बाद वह अपने परिवार के साथ फरीदाबाद, लोनी, हिंडन विहार और गाजियाबाद में रहा। इस दौरान उसने दिल्ली-एनसीआर के अलग-अलग भोजनालयों में काम किया और पुलिस की नजर से बचने के लिए अपने रिश्तेदारों और जान-पहचान वालों से बहुत कम संपर्क रखा।

इसके अलावा, उसकी गिरफ्तारी के बारे में संबंधित पुलिस थाने को सूचित कर दिया गया है, ताकि आगे की जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा सके।

--आईएएनएस

पीएसके

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