फर्जी केवाईसी अपडेट के नाम पर 50 से अधिक लोगों से ठगी, आरोपी झारखंड से गिरफ्तार
नई दिल्ली, 25 अक्टूबर (आईएएनएस)। दिल्ली पुलिस ने झारखंड से संचालित एक साइबर धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़ किया है और बैंक अधिकारी बनकर फर्जी क्रेडिट कार्ड लेनदेन के जरिए 50 से अधिक लोगों को ठगने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें एक बी.टेक स्नातक भी शामिल है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।
आरोपियों की पहचान आफताब अंसारी (24) और अब्दुल मजीद (23) के रूप में हुई है। शाहदरा जिले के साइबर पुलिस स्टेशन ने चार दिन के अभियान के बाद झारखंड के धनबाद जिले में दोनों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने तीन मोबाइल बरामद किए हैं जिनमें वॉट्सऐप चैट और धोखाधड़ी से जुड़े अन्य डिजिटल सबूत मौजूद हैं।
पुलिस के मुताबिक, यह जांच तरनजीत सिंह की शिकायत के बाद शुरू हुई, जिन्होंने आरोप लगाया कि एचडीएफसी बैंक के अधिकारी बनकर अज्ञात व्यक्तियों ने उनसे फोन और वॉट्सऐप पर संपर्क किया और दावा किया कि वे उनके क्रेडिट कार्ड के ग्राहक पहचान (केवाईसी) विवरण को अपडेट करने में उनकी मदद कर सकते हैं। शिकायतकर्ता को बाद में अपने क्रेडिट कार्ड पर अनधिकृत लेनदेन का पता चला।
पुलिस ने धनबाद जिले के झरिया क्षेत्र में एक डिलीवरी पते पर 1,39,999 रुपए मूल्य का सैमसंग गैलेक्सी एस26 अल्ट्रा फोन ट्रैक किया, जिसे विवादित क्रेडिट कार्ड लेनदेन का उपयोग करके जियोमार्ट पर खरीदा गया था।
टीम ने चार दिनों तक निगरानी और फील्ड सत्यापन करने के बाद एक डिलीवरी एजेंट की सहायता से जाल बिछाया। पुलिस ने संदिग्धों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले स्थान पर एक नकली मोबाइल फोन की डिलीवरी की व्यवस्था की। अधिकारियों ने बताया कि दोनों आरोपी डिलीवरी लेने पहुंचे और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
ऑपरेशन के दौरान अंसारी से दो और माजिद से एक मोबाइल फोन बरामद किया गया। बताया जाता है कि इन डिवाइसों में वॉट्सऐप बातचीत और जांच से संबंधित अन्य डिजिटल सामग्री मौजूद थी।
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों और उनके साथियों ने पीड़ितों को लुभाने के लिए फेसबुक सहित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके क्रेडिट कार्ड के केवाईसी अपडेट में सहायता का विज्ञापन किया। इच्छुक लोगों को ऑनलाइन फॉर्म भरने के लिए कहा गया, जिसके माध्यम से उनकी व्यक्तिगत और संपर्क जानकारी एकत्र की गई।
ज्यादातर 50 वर्ष से अधिक आयु के भोले-भाले व्यक्तियों को इन धोखेबाजों ने निशाना बनाया, जिन्होंने बैंक अधिकारी बनकर वीडियो कॉल के माध्यम से केवाईसी सत्यापन में सहायता का वादा किया।
इन वीडियो कॉल में पीड़ितों से इलेक्ट्रॉनिक सत्यापन पूरा करने के बहाने कैमरे पर अपने क्रेडिट कार्ड की जानकारी, जिसमें कार्ड नंबर और सीवीवी शामिल थे, दिखाने और अपने मोबाइल फोन की स्क्रीन साझा करने के लिए कहा गया। पुलिस को संदेह है कि इससे आरोपियों को पीड़ितों के उपकरणों पर प्राप्त वन टाइम पासवर्ड तक पहुंच प्राप्त करने और अनधिकृत ऑनलाइन लेनदेन करने में मदद मिली।
धोखाधड़ी करने वालों ने क्रेडिट कार्ड की जानकारी का दुरुपयोग करके ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से महंगे मोबाइल फोन खरीदे। पकड़े जाने से बचने के लिए उपकरणों को झारखंड और पश्चिम बंगाल के उन स्थानों पर पहुंचाया गया, जो आरोपियों के गृह जिले से दूर थे।
पुलिस ने बताया कि बाद में इन फोनों को स्थानीय बाजारों में अपेक्षाकृत कम कीमतों पर बेच दिया गया। चूंकि उपकरण सीलबंद थे और उनके साथ खरीद का बिल भी था, इसलिए वे वैध प्रतीत हुए।
प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि लगभग 50 लोगों को इसी तरह ठगा गया है। पुलिस पीड़ितों की संख्या और अपराध में शामिल लोगों की कुल संख्या की पुष्टि कर रही है, क्योंकि यह माना जा रहा है कि इसमें कई अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं।
दिल्ली पुलिस ने जनता को सलाह दी है कि वे फोन या वीडियो कॉल पर क्रेडिट कार्ड की जानकारी, सीवीवी, ओटीपी या पिन साझा न करें और न ही किसी अनजान व्यक्ति के साथ मोबाइल स्क्रीन साझा करें।
--आईएएनएस
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