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सीमा शुल्क और जुर्माने के मामले पर दिल्ली भाजपा के निशाने पर भगवंत मान

सीमा शुल्क और जुर्माने के मामले पर दिल्ली भाजपा के निशाने पर भगवंत मान
सीमा शुल्क और जुर्माने के मामले पर दिल्ली भाजपा के निशाने पर भगवंत मान

नई दिल्ली, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ​​ने शुक्रवार को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा विदेश यात्रा से लौटने पर सीमा शुल्क से बचने के असफल प्रयास की आलोचना की। उन्होंने अरविंद केजरीवाल से उन सामानों का विवरण साझा करने को कहा जिन पर सीमा शुल्क विभाग ने जुर्माना लगाया।

मल्होत्रा ​​ने कहा कि देश और पंजाब की जनता अरविंद केजरीवाल से यह जानना चाहती है कि भगवंत मान ने सीमा शुल्क नियमों का उल्लंघन क्यों किया और वे किन कर योग्य वस्तुओं पर कर चोरी करने की कोशिश कर रहे थे।

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि मान अक्सर शराब पीकर संसद और विधानसभा में प्रवेश करने के कई रिकॉर्ड बनाने के लिए सुर्खियों में रहते थे, लेकिन अब वे सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के तहत 50,000 रुपए का जुर्माना पाने वाले देश के पहले मुख्यमंत्री बन गए हैं।

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल का ध्यान उन खबरों की ओर दिलाया, जिनके अनुसार मान विदेश यात्रा से लौटते समय सीमा शुल्क नियमों का उल्लंघन करते हुए विलासिता की कर योग्य वस्तुएं ले जाने के बावजूद ग्रीन चैनल से निकलने का प्रयास कर रहे थे।

मल्होत्रा ​​ने खबरों का हवाला देते हुए कहा कि हालांकि, सतर्क सीमा शुल्क अधिकारियों ने उन्हें रोका, उनके सामान की जांच की और परिणामस्वरूप कई वस्तुओं पर 50,000 रुपए का जुर्माना लगाया।

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि कर योग्य सामान ले जाते हुए कथित तौर पर ग्रीन चैनल से जबरन निकलने की कोशिश करके मान आम नागरिकों को क्या संदेश देना चाहता था, यह समझ से परे है।

एक अन्य घटनाक्रम में, दिल्ली भाजपा प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने सरकारी स्कूलों में वितरित पाठ्यपुस्तकों में 'खराब गुणवत्ता वाले कागज' को लेकर घोटाले का आरोप लगाने के लिए आम आदमी पार्टी (आप) पर निशाना साधा।

कपूर ने कहा कि आप सरकार के 11 वर्षों के शासनकाल में दिल्ली में कक्षा 6 से 12 तक की पाठ्यपुस्तकों का संकट बना रहा। इसके अलावा, 2022 में केजरीवाल सरकार के सत्ता में आते ही, वहां भी पाठ्यपुस्तकों की कमी हो गई।

दिल्ली भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि रिकॉर्ड इस बात के गवाह हैं कि केजरीवाल के 11 वर्षों के शासनकाल में पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध न कराने से संबंधित मामले लगभग हर साल अदालतों तक पहुंचे और शिक्षा विभाग को कई बार फटकार लगाई गई।

--आईएएनएस

एमएस/

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