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असम: दंपति से मारपीट मामले में देबब्रत सैकिया ने मानवाधिकार आयोग से जांच की मांग की

गुवाहाटी, 17 जून (आईएएनएस)। असम विधानसभा में पूर्व नेता प्रतिपक्ष और पूर्व विधायक देबब्रत सैकिया ने लखीमपुर जिले के चौलधोवा थाना क्षेत्र के कोना नदी इलाके में एक दंपति के साथ कथित भीड़ द्वारा मारपीट, उत्पीड़न और सार्वजनिक अपमान के मामले की तत्काल जांच कराने की मांग करते हुए असम मानवाधिकार आयोग (एएचआरसी) का दरवाजा खटखटाया है।
असम: दंपति से मारपीट मामले में देबब्रत सैकिया ने मानवाधिकार आयोग से जांच की मांग की

गुवाहाटी, 17 जून (आईएएनएस)। असम विधानसभा में पूर्व नेता प्रतिपक्ष और पूर्व विधायक देबब्रत सैकिया ने लखीमपुर जिले के चौलधोवा थाना क्षेत्र के कोना नदी इलाके में एक दंपति के साथ कथित भीड़ द्वारा मारपीट, उत्पीड़न और सार्वजनिक अपमान के मामले की तत्काल जांच कराने की मांग करते हुए असम मानवाधिकार आयोग (एएचआरसी) का दरवाजा खटखटाया है।

बुधवार को आयोग के अध्यक्ष को सौंपे गए ज्ञापन में सैकिया ने इस घटना को "मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन" बताते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।

ज्ञापन के अनुसार, दंपति पर कथित तौर पर एक समूह ने हमला किया, उनके साथ सार्वजनिक रूप से मारपीट की गई, अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया और उन्हें अपमानित किया गया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाई गई और दंपति के व्यापारिक प्रतिष्ठान में तोड़फोड़ कर उन्हें भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया।

सैकिया ने कहा कि यह घटना संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत नागरिकों को प्राप्त समानता, स्वतंत्रता, व्यक्तिगत सुरक्षा और सम्मानपूर्वक जीवन जीने के अधिकार का गंभीर उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि भीड़ हिंसा, सार्वजनिक अपमान, महिलाओं पर हमला और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी घटनाएं कानून के शासन को कमजोर करती हैं और सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा करती हैं।

कांग्रेस नेता ने आयोग से इस मामले का स्वतः संज्ञान लेने और लखीमपुर जिला पुलिस प्रशासन तथा चौलधोवा थाना प्रभारी से घटना और पुलिस की कार्रवाई पर विस्तृत रिपोर्ट तलब करने की मांग की। उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की भी अपील की।

सैकिया ने अपने ज्ञापन में सभी आरोपियों की तत्काल पहचान कर गिरफ्तारी, पुलिस या प्रशासनिक अधिकारियों की कथित लापरवाही की जांच तथा पीड़ित दंपति को अंतरिम राहत के रूप में कम से कम 5 लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग भी की।

इसके अलावा उन्होंने दंपति के व्यापारिक प्रतिष्ठान को हुए नुकसान की भरपाई, पीड़ितों और गवाहों की सुरक्षा, निःशुल्क चिकित्सा सुविधा, मनोवैज्ञानिक परामर्श और कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की भी मांग की।

ज्ञापन में असम मानवाधिकार आयोग से राज्य में भीड़ हिंसा की पुनरावृत्ति रोकने और कानून-व्यवस्था को और सख्ती से लागू करने के लिए नीतिगत कदम उठाने की सिफारिश करने का भी आग्रह किया गया है।

--आईएएनएस

डीएससी

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