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कावेरी जल विवाद : पानी की कमी पर 22 जुलाई को होगी सीडब्ल्यूएमए की बैठक, तमिलनाडु ने कर्नाटक पर बढ़ाया दबाव

कावेरी जल विवाद : पानी की कमी पर 22 जुलाई को होगी सीडब्ल्यूएमए की बैठक, तमिलनाडु ने कर्नाटक पर बढ़ाया दबाव
कावेरी जल विवाद : पानी की कमी पर 22 जुलाई को होगी सीडब्ल्यूएमए की बैठक, तमिलनाडु ने कर्नाटक पर बढ़ाया दबाव

चेन्नई, 21 जुलाई (आईएएनएस)। कावेरी नदी के पानी को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। मौजूदा जल वर्ष में तमिलनाडु को निर्धारित हिस्से से काफी कम पानी मिलने के कारण चिंता गहरा गई है। इसी बीच कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) की एक महत्वपूर्ण बैठक बुधवार को नई दिल्ली में होने जा रही है। इस बैठक में कावेरी नदी के जल बंटवारे और तमिलनाडु को पानी की आपूर्ति का मुद्दा प्रमुख रहेगा।

तमिलनाडु सरकार का कहना है कि कर्नाटक-तमिलनाडु सीमा पर स्थित बिलिगुंडलु, जो दोनों राज्यों के बीच पानी मापने का आधिकारिक केंद्र है, वहां इस वर्ष अब तक तय मात्रा से काफी कम पानी पहुंचा है।

आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से 19 जुलाई तक तमिलनाडु को केवल करीब 3.44 टीएमसी (हजार मिलियन क्यूबिक फीट) पानी मिला है। जबकि कावेरी जल बंटवारा व्यवस्था के तहत इस अवधि में राज्य को इससे करीब 21 टीएमसी अधिक पानी मिलना चाहिए था। यानी तमिलनाडु इस समय लगभग 21 टीएमसी पानी की कमी का सामना कर रहा है।

यह स्थिति ऐसे समय सामने आई है, जब एक सप्ताह पहले हुई कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूएमए) की बैठक में तमिलनाडु और कर्नाटक दोनों ने अपना-अपना पक्ष रखा था। हालांकि, समिति ने उस समय कोई फैसला नहीं लिया और मामले की समीक्षा 28 जुलाई को होने वाली अगली बैठक तक टाल दी।

चेन्नई के जल संसाधन विशेषज्ञों का कहना है कि कर्नाटक के जलाशयों में पानी का अच्छा प्रवाह हो रहा है, लेकिन उसके मुकाबले तमिलनाडु की ओर बहुत कम पानी छोड़ा जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा जल वर्ष की शुरुआत से अब तक कर्नाटक के कावेरी बेसिन के चार प्रमुख बांधों में करीब 30 टीएमसी पानी आया है, जबकि इसी अवधि में तमिलनाडु को 4 टीएमसी से भी कम पानी मिला है।

कर्नाटक राज्य प्राकृतिक आपदा निगरानी केंद्र के आंकड़ों के मुताबिक, सोमवार तक इन चारों जलाशयों में कुल 31.61 टीएमसी पानी का प्रवाह दर्ज किया गया, जबकि वहां से केवल 5.26 टीएमसी पानी छोड़ा गया। फिलहाल इन जलाशयों में करीब 59 टीएमसी पानी मौजूद है, जबकि उनकी कुल भंडारण क्षमता 114.57 टीएमसी है।

इस बीच तमिलनाडु के लिए सबसे महत्वपूर्ण सिंचाई स्रोत मेट्टूर बांध का जलस्तर भी चिंता का कारण बना हुआ है। मंगलवार सुबह बांध का जलस्तर 75.14 फीट दर्ज किया गया, जबकि इसकी पूर्ण क्षमता 120 फीट है। वहीं, बांध में करीब 37.3 टीएमसी पानी मौजूद है, जबकि इसकी कुल भंडारण क्षमता 93.47 टीएमसी है।

बढ़ती चिंता के बीच एआईएडीएमके के महासचिव पलानीस्वामी ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार तमिलनाडु के हिस्से का कावेरी जल दिलाने में विफल रही है। पलानीस्वामी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के साथ प्रभावी ढंग से बातचीत नहीं की और न ही राज्य पर पर्याप्त दबाव बनाया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कर्नाटक सरकार कावेरी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं कर रही है।

पलानीस्वामी ने कहा कि कावेरी डेल्टा के किसान सिंचाई के लिए पानी का इंतजार कर रहे हैं। पानी नहीं मिलने से खेती का काम प्रभावित हो रहा है और बड़ी संख्या में कृषि मजदूरों के सामने रोजगार का संकट पैदा हो गया है। उन्होंने टीवीके सरकार से मांग की कि वह कर्नाटक पर और अधिक दबाव बनाए।

--आईएएनएस

वीकेयू/पीएम

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