Samachar Nama
×

दिग्गज निवेशक 'रे डालियो' की चेतावनी, मध्य पूर्व में तनाव पिछले विश्व युद्ध के शुरुआती चरण जैसा

नई दिल्ली, 19 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिकी अरबपति निवेशक रे डालियो ने चेतावनी देते हुए कहा कि मध्य पूर्व में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता तनाव एक व्यापक, परस्पर जुड़े हुए पैटर्न का हिस्सा है जो विश्व युद्ध के शुरुआती चरण का रूप ले सकता है।
दिग्गज निवेशक 'रे डालियो' की चेतावनी, मध्य पूर्व में तनाव पिछले विश्व युद्ध के शुरुआती चरण जैसा

नई दिल्ली, 19 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिकी अरबपति निवेशक रे डालियो ने चेतावनी देते हुए कहा कि मध्य पूर्व में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता तनाव एक व्यापक, परस्पर जुड़े हुए पैटर्न का हिस्सा है जो विश्व युद्ध के शुरुआती चरण का रूप ले सकता है।

डालियो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि एक साथ कई मोर्चों पर संघर्ष तेजी से बढ़ रहे हैं, जो विश्व युद्ध की ओर ले जाने वाले ऐतिहासिक पैटर्न के अंतिम चरण जैसा दिखता है। डालियो ने 13 चरणों वाले ऐतिहासिक पैटर्न को "बिग साइकिल" नाम देते हुए कहा कि दुनिया 9वें चरण में है, और विश्व युद्ध के पिछले पैटर्न के अनुसार केवल तीन और चरण शेष हैं।

उन्होंने भविष्यवाणी की कि अगला चरण देशों के भीतर होगा, जहां विभिन्न देशों के नेतृत्व अपने प्रति मजबूत समर्थन की मांग करेंगे और युद्ध एवं अन्य नीतियों के विरोध को कुचल दिया जाएगा।

इसके बाद प्रमुख शक्तियों के बीच सीधा सैन्य संघर्ष होगा, जिसके बाद युद्धों के फंडिंग के लिए करों में भारी वृद्धि, ऋण जारी करना, मुद्रा सृजन, विदेशी मुद्रा नियंत्रण और पूंजी नियंत्रण जैसे कदम उठाए जाएंगे।

रूस-यूक्रेन-यूरोप-अमेरिका, इजरायल-गाजा-लेबनान-सीरिया और यमन-सूडान-सऊदी अरब-यूएई जैसे वर्तमान संघर्ष पिछले विश्व युद्धों से मिलते-जुलते हैं और इनमें प्रमुख शक्तियां, गठबंधन और व्यापार विवाद शामिल हैं।

डालियो ने कहा, “ये संघर्ष मिलकर एक विश्व युद्ध का रूप लेते हैं, जो पिछले ‘विश्व युद्धों’ के समान है,” और आगे कहा, “मुझे नहीं पता कि आगे क्या होगा, और मैं अब भी पारस्परिक लाभ वाले संबंधों पर आधारित एक शांतिपूर्ण विश्व की आशा करता हूं।”

उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका 70 से अधिक देशों में 700 से अधिक सैन्य अड्डों के साथ “सबसे अधिक विस्तारित प्रमुख शक्ति” है और तर्क दिया कि यह “लंबे समय तक संघर्ष सहने में सबसे कमजोर” भी है।

उन्होंने संभावना जताई, “एशिया में कुछ ऐसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं जो अमेरिका की चुनौती का सामना करने की तत्परता की परीक्षा लेंगी और उसे उजागर करेंगी।”

हालांकि, उन्होंने भविष्यवाणी की, “मध्य पूर्व में अपनी व्यापक व्यस्तता और मध्यावधि चुनावों से पहले ईरान युद्ध के लिए अमेरिकी जनता के समर्थन की कमी” के कारण अमेरिका के लिए इस चुनौती का सामना करना मुश्किल होगा।

ऐसी स्थिति अमेरिकी सैन्य अड्डों वाले अन्य देशों की सरकारों को अमेरिकी समर्थन के बारे में अपनी अपेक्षाओं का पुनर्मूल्यांकन करने के लिए प्रेरित कर सकती है।

--आईएएनएस

एबीएस/

Share this story

Tags