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अमेरिकी मिडटर्म: भारतीय मूल के उम्मीदवारों की बंटी रणनीति, रिपब्लिकन का फोकस अपराध-महंगाई पर, डेमोक्रेट्स ने ट्रंप को घेरा

अमेरिकी मिडटर्म: भारतीय मूल के उम्मीदवारों की बंटी रणनीति, रिपब्लिकन का फोकस अपराध-महंगाई पर, डेमोक्रेट्स ने ट्रंप को घेरा
अमेरिकी मिडटर्म: भारतीय मूल के उम्मीदवारों की बंटी रणनीति, रिपब्लिकन का फोकस अपराध-महंगाई पर, डेमोक्रेट्स ने ट्रंप को घेरा

वाशिंगटन, 3 नवंबर (आईएएनएस)। अमेरिकी मध्यावधि चुनाव से ठीक पहले भारतीय मूल के अमेरिकी उम्मीदवारों ने मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए आखिरी चुनावी अपील की। रिपब्लिकन उम्मीदवारों ने अपराध, महंगाई और कानून-व्यवस्था को मुद्दा बनाया, जबकि डेमोक्रेट्स ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों पर सवाल खड़े किए।

ओहियो में रिपब्लिकन्स के गवर्नर पद उम्मीदवार विवेक रामास्वामी ने क्लीवलैंड में अपने राज्यव्यापी प्रचार अभियान का समापन किया। उन्होंने "संपत्ति कर में तत्काल कटौती, सड़कों पर कानून का शासन बहाल करने और ऊर्जा उत्पादन बढ़ाकर बिजली के बिल कम करने" का वादा किया।

सोशल मीडिया मंच एक्स पर उन्होंने लिखा, ''यह दाएं और बाएं की लड़ाई नहीं है। यह सही और गलत के बीच का चुनाव है। यह सामान्य समझ और पागलपन के बीच का फैसला है।''

टोलेडो में चुनाव प्रचार के बाद उन्होंने कहा, " गवर्नर बनने पर ओहियो के लोगों के हित उनकी एकमात्र जिम्मेदारी होंगे।"

न्यूयॉर्क में रिपब्लिकन उम्मीदवार सरिता कोमाटिरेड्डी ने अटॉर्नी जनरल लेटिटिया जेम्स को चुनौती दी है। उन्होंने चुनाव प्रचार के अंतिम दौर में बफेलो, रोचेस्टर, सिरैक्यूज और बिंघमटन का दौरा किया और लॉन्ग आइलैंड में अपना अभियान समाप्त किया।

कोमाटिरेड्डी ने अपराध, बेघर लोगों की समस्या और धोखाधड़ी के मामलों को लेकर मौजूदा अटॉर्नी जनरल पर निशाना साधा। उन्होंने एक्स पर लिखा, " लेटिटिया जेम्स के कार्यकाल में ये समस्याएं बढ़ी हैं और वह इनमें बदलाव नहीं करना चाहतीं।" उन्होंने खुद को न्यूयॉर्क के लोगों के लिए बदलाव का विकल्प बताया।

भारतीय प्रवासियों की बेटी कोमाटिरेड्डी ने अपने चुनाव प्रचार में अमेरिकी सपने और आप्रवासी परिवारों के संघर्ष को भी जगह दी। उनके अभियान की ओर से जारी बयान में कहा, "लोग इस देश में इसलिए आते हैं क्योंकि उन्हें उम्मीद होती है कि मेहनत करके वे अपने और अपने परिवार के लिए बेहतर जीवन बना सकते हैं।"

दूसरी ओर, डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों ने अपने अंतिम चुनावी संदेश में ट्रंप प्रशासन को केंद्र में रखा।

वर्जीनिया से कांग्रेस सदस्य सुहास सुब्रमण्यम ने कहा कि अगले दिन ऐसा कांग्रेस चुना जाएगा जो राष्ट्रपति के बजाय आम लोगों के लिए काम करेगी। उन्होंने एक्स पर लिखा, ''कल हम ऐसी कांग्रेस चुनेंगे जो राष्ट्रपति के लिए नहीं, बल्कि जनता के लिए काम करेगी।''

कैलिफोर्निया के कांग्रेस सदस्य रो खन्ना ने चुनाव प्रचार के अंतिम सप्ताहांत में ईरान के साथ जारी युद्ध का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि डेमोक्रेट्स ईरान में युद्ध के लिए निर्धारित बजट को शून्य करने के पक्ष में मतदान कर सकते हैं। खन्ना ने यह भी उल्लेख किया कि ट्रंप उन्हें चार बार 'हल्का नेता' कह चुके हैं।

टेक्सास में स्टेट हाउस डिस्ट्रिक्ट 47 से डेमोक्रेटिक उम्मीदवार पूजा सेठी ने भारतीय मूल के लोगों के खिलाफ नफरत के मुद्दे को अपने अंतिम चुनावी संदेश का हिस्सा बनाया। उन्होंने लिखा, ''हम डराए नहीं जाएंगे, हम चुप नहीं रहेंगे। टेक्सास में नफरत के लिए कोई जगह नहीं है।''

फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से डेमोक्रेटिक उम्मीदवार पिया दांडिया ने भी बच्चों के भविष्य को चुनावी मुद्दा बनाया। उनके चुनाव क्षेत्र में बाहरी संगठनों की ओर से बड़े पैमाने पर चुनावी खर्च किया गया है। उन्होंने मतदान से एक दिन पहले लिखा कि बच्चों के योग्य भविष्य के लिए संघर्ष करने का अब केवल एक दिन बचा है।

भारतीय मूल के उम्मीदवारों के ये अलग-अलग चुनावी संदेश अमेरिका के व्यापक राजनीतिक माहौल को भी दर्शाते हैं। जहां रिपब्लिकन पार्टी अपराध, कानून-व्यवस्था, करों और जीवनयापन की बढ़ती लागत को प्रमुख मुद्दा बना रही है, वहीं डेमोक्रेट्स ट्रंप प्रशासन की नीतियों, ईरान के साथ युद्ध और आम लोगों की आर्थिक परेशानियों को लेकर मतदाताओं के बीच जा रहे हैं।

--आईएएनएस

केआर/

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