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केरल : लेफ्ट पार्टियों में तनाव, पलक्कड़ में सीपीआई और सीपीआई(एम) के बीच दिखी सार्वजनिक बहस

पलक्कड़, 6 जनवरी (आईएएनएस)। केरल में भले ही सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाली लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) सरकार में सीपीआई दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी है, लेकिन पिछले कुछ समय से दोनों कम्युनिस्ट पार्टियों के बीच रिश्ते साफ तौर पर तनावपूर्ण हो गए हैं।
केरल : लेफ्ट पार्टियों में तनाव, पलक्कड़ में सीपीआई और सीपीआई(एम) के बीच दिखी सार्वजनिक बहस

पलक्कड़, 6 जनवरी (आईएएनएस)। केरल में भले ही सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाली लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) सरकार में सीपीआई दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी है, लेकिन पिछले कुछ समय से दोनों कम्युनिस्ट पार्टियों के बीच रिश्ते साफ तौर पर तनावपूर्ण हो गए हैं।

जो नाराजगी पहले अंदर ही अंदर बनी हुई थी, अब वह धीरे-धीरे खुले तौर पर सामने आने लगी है। इसका उदाहरण तब देखने को मिला, जब सीपीआई(एम) के पलक्कड़ जिले के सचिवालय सदस्य एस. अजयकुमार ने मन्नूर, ओट्टापलम में एक सार्वजनिक सभा के दौरान सीपीआई पर तीखा हमला बोला और कड़े शब्दों में उसकी आलोचना की।

अजय कुमार ने सीपीआई के राष्ट्रीय महासचिव बिनॉय विश्वम पर 'चौथे दर्जे के राजनेता' जैसा व्यवहार करने का आरोप लगाया। उन्होंने सीपीआई पर राजनीतिक अवसरवादिता का आरोप लगाते हुए कहा कि हार का ठीकरा आसानी से सीपीआई(एम) पर फोड़ दिया जाता है, जबकि जीत का पूरा श्रेय सीपीआई खुद ले लेती है।

पार्टी की चुनावी ताकत का मजाक उड़ाते हुए, उन्होंने दावा किया कि राज्य में सीपीआई को मुश्किल से पांच प्रतिशत वोट मिलते हैं और उसमें अकेले एक भी सीट जीतने की क्षमता नहीं है।

उन्होंने मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और अन्य मंत्रियों की सीपीआई की आलोचना पर भी सवाल उठाया और पूछा कि क्या सीपीआई द्वारा संभाले जाने वाले विभाग आलोचना से परे थे?

यह नाराजगी उन कई घटनाओं के बाद सामने आया है जिन्होंने सत्ताधारी गठबंधन को परेशान कर दिया है।

पहला बड़ा विवाद तब सामने आया जब केरल सरकार ने एलडीएफ या राज्य कैबिनेट में बिना किसी चर्चा के पीएम-श्री स्कूल कार्यक्रम में शामिल होने का फैसला किया।

सीपीआई ने खुले तौर पर आपत्ति जताई, सीपीआई (एम) पर एकतरफा फैसले लेने का आरोप लगाया, और तब तक विरोध जारी रखा जब तक पिनाराई विजयन सरकार को इस योजना से पीछे हटने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ा। इस घटना ने गठबंधन के अंदर साफ तौर पर दरार पैदा कर दी।

तब से, दोनों पार्टियों के बीच संबंध अस्थिर और नाजुक बने हुए हैं।

दिसंबर के स्थानीय निकाय चुनावों के बाद स्थिति और खराब हो गई, जहां एलडीएफ का प्रदर्शन उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा, जिससे अंदरूनी आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए और सत्ताधारी गठबंधन के अंदर आपसी भाईचारे में साफ तौर पर कमी आई।

पलक्कड़, खासकर ओट्टापलम, लंबे समय से सीपीआई-सीपीआई(एम) की तीव्र प्रतिद्वंद्विता का अखाड़ा रहा है। साथ ही अजय कुमार की टिप्पणियों को एक अलग घटना के बजाय गहरी बेचैनी की झलक के रूप में देखा जा रहा है।

बता दें कि अप्रैल/मई में केरल विधानसभा चुनाव होने की संभावना है। ऐसे में मतभेदों का सार्वजनिक रूप से सामने आना वामपंथियों के एकजुटता और स्थिरता दिखाने के प्रयासों को जटिल बना सकता है।

--आईएएनएस

एससीएच/एएस

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